FINAL में पहुंचने के बाद रजत पाटीदार ने किया रणनीति का खुलासा, बोले-'आपको बॉडी लैंग्वेज में दिखाना होगा...'
Rajat Patidar Statement After Reach Into The Final: आईपीएल 2026 का क्वालीफायर 1 रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम गुजरात टाइटंस के बीच खेला गया. धर्मशाला में खेले गए इस हाईवोल्टेज मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और फाइनल में जगह पक्की कर ली. कैप्टन रजत पाटीदार इस मैच में आरसीबी की जीत के हीरो रहे, जिन्होंने कमाल की 93 रनों की पारी खेली. इस जीत के बाद कैप्टन पाटीदार ने अपनी रणनीति का खुलासा किया और बताया कि कैसे उन्होंने गुजरात टाइटंस को धूल चटाई. आइए जानते हैं रजत पाटीदार ने क्या-क्या कहा...
रजत पाटीदार ने बताई अपनी स्ट्रैटजी
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ 92 रनों से एक बड़ी जीत दर्ज की और फाइनल में जगह पक्की कर ली. इस अहम मैच में आरसीबी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255 रनों का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसे चेज करने उतरी जीटी 162 पर ही सिमट गई और आरसीबी ने मैच अपने नाम कर लिया. पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में कप्तान रजत पाटीदार ने खुलासा किया कि उन्होंने जीटी के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाया, जिसने उन्हें जीत दर्ज करने में मदद की.
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रजत पाटीदार ने कहा, "यह हमारे लिए एक शानदार मैच था और खासकर बल्लेबाजों ने जिस तरह से इस मैच में दबदबा बनाया, जिस तरह से हर बल्लेबाज ने आक्रामक बल्लेबाजी की, वह हमारे लिए बहुत अच्छा रहा. जीटी गेंदबाजों पर हमला करने की हमारी कोई स्ट्रैटजी नहीं थी, लेकिन हम इसके लिए तैयार थे क्योंकि आपको अपनी बॉडी लैंग्वेज से यह दिखाना होता है कि हम आप पर हमला करने आ रहे हैं."
"यह हर बल्लेबाज में दिख रहा था. इसलिए हमने मीटिंग में इस बारे में बात की थी कि हमें अच्छी बॉडी लैंग्वेज और आक्रामक मानसिकता दिखानी होगी. यह एक बड़ा मंच था, क्वालीफायर 1, जिस तरह से हमने खेला, जिस तरह से हमने इस मैच में दबदबा बनाया, मुझे लगता है कि यह शानदार था."
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अपनी बल्लेबाजी पर क्या बोले रजत पाटीदार?
गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में रजत पाटीदार ने धमाकेदार पारी खेली. उन्होंने महज 33 गेंदों में 9 छक्कों और 5 चौकों की मदद से 93 रनों की पारी खेली. इस पारी की बदौलत ही आरसीबी 254 के स्कोर तक पहुंच पाई थी. इसलिए पाटीदार को प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
रजत पाटीदार ने अपनी बल्लेबाजी के बारे में बात करते हुए कहा, "मेरी बल्लेबाजी का तरीका हमेशा की तरह है. शुरुआत में, मैं कुछ गेंदें, 8-10 गेंदें लेता हूं यह देखने के लिए कि विकेट कैसा व्यवहार कर रहा है और गेंद क्या कर रही है. उसके बाद, मेरे दिमाग में यह साफ होता है कि मुझे कैसे खेलना है और मैं विकेट की चिंता नहीं करता. मुझे हमेशा गेंदबाजों पर दबाव बनाना पसंद है."
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जीटी की कमजोरी पर किया वार
रजत पाटीदार ने आगे खुलासा किया कि उन्होंने गुजरात टाइटंस को हराने के लिए उनकी कमजोरी पर वार किया. GT के टॉप-3 बल्लेबाज उनके लिए रन बनाते हैं. इसलिए RCB के गेंदबाजों ने सुनिश्चित किया कि वह इन तीनों ही बल्लेबाजों को पावर प्ले में ही आउट कर दे.
गेंदबाजी के बारे में बात करते हुए रजत पाटीदार ने आगे कहा, "सच कहूं तो, विकेट पर गेंद को नीचे से मारना और लंबे छक्के लगाना उतना आसान नहीं था क्योंकि गेंद में काफी उछाल था और गेंदबाजों ने जिस तरह से अपनी रणनीति को अंजाम दिया, स्टंप्स पर ज्यादा गेंदें फेंकीं, मुझे लगता है कि इससे मदद मिली. जीटी ने अब तक जिस तरह से खेला है, मुझे लगता है कि तीन मुख्य बल्लेबाज टॉप-3 थे और हम क्लीयर थे कि हमें उन्हें पावरप्ले में आउट करना है और यह प्लान काम कर गया."
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Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मिनी एकादशी पर पूजा के समय जरूर पढ़े ये खास व्रत कथा, श्री हरि की रहेगी विषेश कृपा
Padmini Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में पद्मिमी एकादशी के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह आम दिनों में नहीं बल्कि मलमास यानी पुरुषोत्तम मास में आती है. उदया तिथि के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत आज यानी 27 मई को रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी असीम कृपा प्राप्त होती है. लेकिन, शास्त्रों में साफ कहा गया है कि जब तक इस दिन पद्मिमी एकादशी की कथा का पाठ न किया जाए तब तक यह व्रत पूरा नहीं माना जाता है. आइए जानते हैं क्या है वो पौराणिक कथा जिसके बिना यह महाव्रत अधूरा माना जाता है.
पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Padmini Ekadashi 2026 Shubh Muhurat)
ज्येष्ठ माह की एकादशी तिथि कल यानी 26 मई को सुबह 05 बजकर 10 मिनट से शुरू हो चुकी है और आज 27 मई को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर खत्म हो गया है. इस व्रत का पारण 28 मई को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 56 मिनट तक होगा. वहीं ब्रह्म मुहूर्त की बात करें तो सुबह 04 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक होगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 10 मिनट से लेकर 7 बजकर 31 मिनट तक होगा.
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा (Padmini Ekadashi Vrat Katha)
कथा के अनुसार, एक समय की बात है कार्तवीर्य ने रावण को अपने बन्दीगृह में बन्दी बना लिया. उसे महर्षि पुलस्त्य ने कार्तवीर्य से विनय करके छुड़ाया. इस घटना को सुनकर नारदजी ने महर्षि पुलस्त्य से पूछा- 'हे महर्षि! इस मायावी रावण को, जिसने सभी देवताओं सहित देवराज इन्द्र को जीत लिया था, कार्तवीर्य ने उसे किस प्रकार जीता? कृपा कर मुझे विस्तारपूर्वक बतायें.'
महर्षि पुलस्त्य ने कहा- 'हे नारद! आप पहले कार्तवीर्य की उत्पत्ति की कथा श्रवण करो- त्रेतायुग में महिष्मती नामक नगरी में कार्तवीर्य नाम का एक राजा राज्य करता था. उस राजा की सौ स्त्रियां थीं, उनमें से किसी के भी राज्य का भार सम्भालने वाला योग्य पुत्र नहीं था. तब राजा ने सम्मानपूर्वक ब्राह्मणों को आमन्त्रित किया तथा पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ करवाये, किन्तु सब व्यर्थ रहे. जिस प्रकार दुखी मनुष्य को भोग नीरस प्रतीत होते हैं, उसी प्रकार राजा को भी अपना राज्य पुत्र के बिना दुःखमय प्रतीत होता था. अन्त में वह तप के द्वारा ही सिद्धियों को प्राप्त जानकर तपस्या करने के लिये वन को चला गया. उसकी स्त्री, जो राजा हरिश्चन्द्र की पुत्री प्रमदा थी, वस्त्रालङ्कारों को त्यागकर अपने पति के साथ गन्धमादन पर्वत पर चली गयी. उस स्थान पर इन लोगों ने दस हजार वर्ष तक तप किया, किन्तु सिद्धि प्राप्त न हो सकी. राजा की देह अस्थियों का ढांचा मात्र ही रह गयी. यह देख प्रमदा ने श्रद्धापूर्वक महासती अनसूया से प्रश्न किया- 'मेरे स्वामी को तप करते हुए दस हजार वर्ष व्यतीत हो गए, किन्तु अभी तक प्रभु प्रसन्न नहीं हुए हैं, जिससे मुझे पुत्र प्राप्त हो. इसका क्या कारण है?'
प्रमदा का प्रश्न सुनकर देवी अनसूया ने कहा- 'अधिक मास जो कि छत्तीस माह के उपरान्त आता है, उसमें दो एकादशी होती हैं. इसमें शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पद्मिनी तथा कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम परम है. इनके जागरण एवं व्रत करने से ईश्वर तुम्हें अवश्य ही पुत्र प्रदान करेंगे.'
अनसूया ने व्रत का विधान सुनाया
तत्पश्चात् देवी अनसूया ने व्रत का विधान बताया. रानी प्रमदा ने देवी अनसूया द्वारा वर्णित विधि के अनुसार एकादशी का व्रत एवं रात्रि में जागरण किया. इससे भगवान विष्णु उस पर बहुत प्रसन्न हुए तथा वरदान मांगने को कहा. रानी प्रमदा ने कहा - 'प्रभु आप यह वरदान मेरे पति को दीजिए.'
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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