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Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिमी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो जाएंगे भगवान विष्णु

Padmini Ekadashi 2026: आज 27 मई को अधिकमास की पहली एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है. इस एकादशी को कमला और पुण्यवर्धिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर 3 साल में एक बार आने वाले अधिकमास के शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इसे सभी व्रतों में अत्यधिक पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाला माना गया है. इस दिन श्रीहरि और मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा की जाती है. पद्मिनी एकादशी के दिन अनजाने में की गई गलतियां आपके व्रत और पूजा के पुण्य को कम कर सकती हैं. आइए जानते हैं कि पद्मिनी एकादशी पर आपको भूलकर भी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. 

पद्मिनी एकादशी भूलकर भी न करें गलतियां 

चावल न खाएं 

एकादशी के दिन घर में चावल बनाने और खाना पूरी तरह से वर्जित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल खाने से रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म मिलता है. 

तामसिक भोजन से करें परहेज 

एकादशी के दिन भूलकर भी मांस, मछली, प्याज, लहसुन, अंडा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ जैसे शराब, तंबाकू आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए. अगर आप इन चीजों का सेवन करते हैं भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं. 

क्रोध करने से बचें 

इसके अलावा एकादशी का व्रत मानसिक पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन किसी पर गुस्सा न करें, न हीं घर में किसी को अपशब्द बोलें. विवाद या झगड़े का माहौल बिल्कुल न बनने दें. 

तुलसी के पत्ते न तोड़ें 

भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना और उनके पत्ते तोड़ना सख्त मना होता है. पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें.

बाल और नाखून न काटे 

एकादशी तिथि पर बाल कटवाना, नाखून काटना और दाढ़ी बनाना पूरी तरह से वर्जित है. यहां तक कि इस दिन कपड़े धोने और साबुन का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए. 

पद्मिनी एकादशी पर करें ये उपाय (Padmini Ekadashi Upay) 

आर्थिक तंगी और कर्ज मुक्ति 

आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति पाना चाहते हैं तो पद्मिनी एकादशी के दिन सुबह भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा करें. दक्षिणावर्ती शंख में केसर दूध भरकर उनका अभिषेक करें. इससे घर में धन का प्रवाह बढ़ता है और दरिद्रता दूर होती है. 

नौकरी और करियर के लिए उपाय 

इसके अलावा पद्मिनी एकादशी पर नौकरी और करियर में तरक्की चाहते हैं तो इस दिन शाम को तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं. इसके बाद तुलसी की 11 या 21 बार परिक्रमा करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. 

यह भी पढ़ें: Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मिनी एकादशी पर पूजा के समय जरूर पढ़े ये खास व्रत कथा, श्री हरि की रहेगी विषेश कृपा

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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उत्तर प्रदेश में खेल क्रांति, अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा स्टेडियम, पूरे पश्चिमी यूपी के खिलाड़ियों के लिए होगा वरदान

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में खेल क्रांति होने वाली है. योगी सरकार अलीगढ़ मंडल को एक खास सौगात देने वाली है. आने वाले कुछ सालों में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की दिशा को बदल दिया है. 13 हजार स्क्वायर मीटर में बने 57 करोड़ से ज्यादा की लागत से ओलंपिक स्टैंडर्ड इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब बनकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है. सीएम योगी आदित्यनाथ जल्द ही इसे जनता को समर्पित करने वाले हैं. यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए वरदान साबित होने वाला है. 

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के अनुसार, यह मंडल का पहला ऐसा विश्वस्तरीय इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स होने वाला है जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित करेगा. सरकार की  मंशा केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि गांव, कस्बों और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बन सकेगी. 

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार विश्वस्तरीय सुविधाएं

इस विशाल खेल परिसर की खासियत है कि इसमें राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल है. अत्याधुनिक तकनीक से तैयार यह पूल आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगितओं के आयोजन का केंद्र होने वाला है. अब तक बड़े शहरों पर निर्भर रहने अलीगढ़ को खास सुविधा मिलेगी. शहर में उच्च स्तरीय अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सकेगा. 

कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल बनाए गए हैं. यहां पर विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है. इसके साथ ही बिलियर्ड्स रूम और हाईटेक जिम की सुविधा भी खिलाड़ियों को दी गई है. पेशेवर प्रशिक्षण  और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए तैयार यह परिसर खिलाड़ियों को बड़े शहरों जैसी सुविधा को उपलब्ध कराते हैं. 

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  Sports

Ravi Shastri Birthday: एक चोट ने 31 की उम्र में खत्म कर दिया था तूफानी Career, जानें अनसुनी कहानी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी और कोच रवि शास्त्री आज यानी की 27 मई को अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि रवि शास्त्री उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने बतौर खिलाड़ी, कोच और कमेंटेटर के रूप में भारतीय क्रिकट में अपनी एक मजबूत छाप छोड़ी है। उन्होंने बतौर क्रिकेटर बल्ले और गेंद दोनों से टीम को जीत दिलाई। फिर बाद में कोच और कमेंट्री की दुनिया में भी एक खास मुकाम हासिल किया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर रवि शास्त्री के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

मुंबई में 27 मई 1962 को रवि शास्त्री का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम डॉ एम जयद्रथ शास्त्री था और मां का नाम लक्ष्मी शास्त्री है। वहीं 18 मार्च 1990 को रवि शास्त्री का ऋतु सिंह से विवाह हुआ था। वहीं शादी के करीब 22 सालों बाद आपसी मतभेद के कारण साल 2012 में दोनों का तलाक हो गया था।

क्रिकेट करियर

घरेलू क्रिकेट में मुंबई की ओर से खेलते हुए रवि शास्त्री ने अपनी पहचान बनाई थी। फिर साल 1981 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाद थे। रवि शास्त्री अपने समय के सबसे भरोसेमंद और ऑलराउंडर माने जाते थे। उन्होंने इंडिया के लिए 80 टेस्ट और 150 वनडे मुकाबले खेले थे। टेस्ट में रवि शास्त्री के नाम 3830 रन और 151 विकेट दर्ज हैं। वहीं वनडे में रवि शास्त्री ने 3108 रन और 129 विकेट हासिल किए। साल 1983 में विश्व विजेता टीम इंडिया का हिस्सा होना भी रवि शास्त्री के क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।

बनाए कई यादगार रिकॉर्ड

घरेलू क्रिकेट में रवि शास्त्री ने कई यादगार रिकॉर्ड बनाए थे। उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम में 10 जनवरी 1985 को रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा के खिलाफ एक ओवर की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के लगाए थे। इस मुकाबले में रवि शास्त्री ने सिर्फ 113 मिनट में अपना दोहरा शतक जड़ दिया था। जोकि लंबे समय तक एक विश्व रिकॉर्ड रहा था।

ऐसे खत्म हुआ शानदार सफर

रवि शास्त्री का अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा चल सकता था, लेकिन घुटने में चोट के कारण उन्होंने सिर्फ 31 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। रवि शास्त्री ने अपने करियर में भारत के लिए सिर्फ एक टेस्ट मैच में कप्तानी की थी।

कोच के रूप में टीम इंडिया को बनाया निडर

बता दें कि साल 2014 से 2016 तक रवि शास्त्री भारतीय टीम के डायरेक्टर रहे। इसके बाद साल 2017 से लेकर 2021 तक वह भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे। उन्होंने कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर विदेशों में टीम इंडिया को ऐतिहासिक जीत दिलाएं। ऑस्ट्रेलिया की धरती पर लगातार दो बार टेस्ट सीरीज जीतना, टेस्ट क्रिकेट में भारत को लंबे समय तक दुनिया की नंबर 1 टीम बनाए रखना और खिलाड़ियों में जीतने की जिद पैदा करना आदि रवि शास्त्री के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियां हैं।
Wed, 27 May 2026 11:33:04 +0530

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