Pahadi Bhatt Ki Churkani Recipe: दाल और सब्जी खाकर हो गए हैं बोर? तो ट्राई करें पहाड़ों की मशहूर भट्टी की चुड़कानी, नोट कर लें रेसिपी
Pahadi Bhatt Ki Churkani Recipe: अगर आप रोज-रोज अरहर, मसूर और उड़द की दाल खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार दोपहर के खाने में कुछ अलग और स्वादिष्ट ट्राई कर सकते हैं. उत्तराखंड की पारंपरिक डिश भट्ट की चुड़कानी स्वाद और सेहत दोनों का शानदार मेल है. यह डिश खासतौर पर कुमाऊं क्षेत्र में बहुत पसंद की जाती है. काले भट्ट यानी ब्लैक सोयाबीन से बनने वाली यह रेसिपी बेहद पौष्टिक मानी जाती है. भट्ट की चुड़कानी कम मसालों में तैयार हो जाती है. इसका स्वाद इतना खास होता है कि एक बार खाने के बाद लोग इसे बार-बार बनाना पसंद करते हैं. पहाड़ों में इसे ज्यादातर गर्म चावल या मंडुवे की रोटी के साथ खाया जाता है.
क्यों फायदेमंद है भट्ट की दाल
भट्ट की दाल को काला सोयाबीन भी कहा जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉलेट भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. यह दाल शरीर को ताकत देने में मदद करती है. साथ ही यह हड्डियों को मजबूत बनाती है. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी इसे फायदेमंद माना जाता है. जिन लोगों को पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए भी यह अच्छी मानी जाती है. इसके अलावा यह इम्यूनिटी बढ़ाने और वजन कंट्रोल करने में भी मदद करती है.
लोहे की कड़ाही में आता है असली स्वाद
उत्तराखंड में भट्ट की चुड़कानी को पारंपरिक तरीके से लोहे की कड़ाही में बनाया जाता है. इससे इसका रंग गहरा और स्वाद ज्यादा बढ़िया हो जाता है. साथ ही खाने में आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि पहाड़ों में आज भी लोग इसे पुराने तरीके से बनाना पसंद करते हैं.
भट्ट की चुड़कानी की सामग्री
- 1 कप भट्ट की दाल
- 2 से 3 बड़े चम्मच गेहूं का आटा
- 2 से 3 बड़े चम्मच सरसों का तेल
- 1 छोटा चम्मच जीरा
- एक चुटकी हींग
- 1 बारीक कटा प्याज
- 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट
- 2 से 3 हरी मिर्च
- हल्दी पाउडर
- धनिया पाउडर
- लाल मिर्च पाउडर
- नमक स्वादानुसार
- गर्म पानी जरूरत के अनुसार
- टमाटर (इच्छानुसार)
भट्ट की चुड़कानी बनाने की विधि (Pahadi Bhatt Ki Churkani Recipe In Hindi)
सबसे पहले लोहे की कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. अब इसमें भट्ट की दाल डालकर मध्यम आंच पर भूनें. दाल को तब तक भूनें जब तक वह हल्की चटकने न लगे और उसमें से खुशबू न आने लगे. इस दौरान थोड़ा सावधान रहें क्योंकि दाल उछल सकती है. अब दाल को कड़ाही के एक तरफ कर दें. दूसरी तरफ गेहूं का आटा डालें और उसे हल्का भूरा होने तक भून लें. इससे चुड़कानी का स्वाद और गाढ़ापन दोनों बढ़ जाते हैं. इसके बाद दूसरी कड़ाही में तेल गर्म करें. फिर उसमें जीरा और हींग डालें. अब प्याज, हरी मिर्च और अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर अच्छे से भूनें. प्याज हल्का सुनहरा होने लगे तो उसमें हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक डाल दें. अगर आप चाहें तो इस समय बारीक कटे टमाटर भी डाल सकते हैं. मसाले अच्छी तरह भुन जाएं तो उसमें धीरे-धीरे गर्म पानी मिलाएं. पानी डालते समय लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें. अब इसमें भुनी हुई दाल डालें और कुछ देर पकने दें. जब चुड़कानी गाढ़ी हो जाए तो गैस बंद कर दें. ऊपर से हरा धनिया डालें और गर्मागर्म चावल या मंडुवे की रोटी के साथ सर्व करें.
पहाड़ों के स्वाद का देसी एहसास
भट्ट की चुड़कानी सिर्फ एक डिश नहीं बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान भी है. इसका स्वाद सादा होने के बावजूद बेहद खास लगता है. अगर आप घर पर कुछ हेल्दी और अलग बनाना चाहते हैं, तो यह पहाड़ी रेसिपी जरूर ट्राई करें.
इंदिरापुरम में विकास कार्य बने मुसीबत, सड़क बंद और टूटे रास्तों से जनता परेशान
गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र में इन दिनों विकास कार्यों की रफ्तार आम जनता की परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है. एक तरफ CISF कट के पास मेट्रो निर्माण कार्य के चलते गाजियाबाद आने-जाने वाली मुख्य सड़क को बंद कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा सीवर लाइन और नालों के चौड़ीकरण के काम ने इंदिरापुरम और वसुंधरा की अंदरूनी सड़कों की हालत बदतर कर दी है.
इंदिरापुरम से जुड़ती है सड़कें
यह सड़क इंदिरापुरम होते हुए सीधे मोहन नगर और साहिबाबाद को जोड़ती है. सड़क बंद होने के कारण हजारों लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे सुबह और शाम के समय भारी जाम की स्थिति बनी रहती है. ऑफिस जाने वाले लोगों को रोजाना घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ रहा है.
निर्माण कार्यों की रफ्तार बहुत धीमी!
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम ने कई इलाकों में एक साथ खुदाई और निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी है. जगह-जगह सड़कें खोदी गई हैं, बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं और कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह बंद कर दी गई है. इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बना हुआ है.
सड़कों पर सीवर का पानी भरा
इंदिरापुरम की एक सड़क पर सीवर लाइन डालने के लिए गहरी खुदाई की गई, जिसके चलते पाइपलाइन टूट गई और सड़क पर पानी भर गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि गड्ढों के आसपास न तो बैरिकेड लगाए गए हैं और न ही किसी तरह के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं. बताया जा रहा है कि कई गड्ढे 15 से 20 फीट तक गहरे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. लोगों को डर है कि कहीं नोएडा जैसी कोई बड़ी दुर्घटना गाजियाबाद में भी न हो जाए.
इंदिरापुरम और वसुंधरा की अधिकांश सड़कें
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन ने बिना योजना के पूरे इलाके में एक साथ काम शुरू कर दिया, जिसकी वजह से इंदिरापुरम और वसुंधरा की अधिकांश सड़कें टूट चुकी हैं. कई जगह हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं.
मानसून से पहले बढ़ी लोगों की चिंता
अब जबकि मानसून आने में लगभग एक महीना ही बाकी है, लोगों की चिंता और बढ़ गई है. यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए तो बारिश के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं. जलभराव, ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा.जनता का कहना है कि जो काम उनकी सुविधा के लिए शुरू किए गए थे, वही अब उनके लिए बड़ी असुविधा का कारण बनते जा रहे हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए, सुरक्षा मानकों का पालन हो और आम जनता को राहत देने के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था बेहतर बनाई जाए.
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