NEET-UG 2026 पेपर लीक केस: हूलिया बदलकर घूम रहा था आरोपी, ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा
NEET-UG 2026 Paper Leak Case: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से एक संदिग्ध आरोपी को हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों की नजर में था और अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपना हुलिया तक बदल लिया था. इस कार्रवाई के बाद पेपर लीक नेटवर्क के कई और राज खुलने की संभावना जताई जा रही है.
राजस्थान पुलिस के इनपुट पर हुई कार्रवाई
नासिक शहर के डीसीपी किरण कुमार चव्हाण ने बताया कि मंगलवार सुबह राजस्थान पुलिस ने इस मामले में सहयोग मांगा था. राजस्थान से मिले तकनीकी इनपुट और खुफिया जानकारी के आधार पर नासिक क्राइम ब्रांच ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध को हिरासत में ले लिया.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी का संबंध सीधे NEET-UG पेपर लीक मामले से जुड़ा हुआ माना जा रहा है. राजस्थान पुलिस की टीम के नासिक पहुंचने के बाद आरोपी को औपचारिक रूप से उनके हवाले किया जाएगा.
#WATCH | Nashik, Maharashtra: Deputy Commissioner of Police Kiran Kumar Chauhan says, "A request from Rajasthan Police was received this morning for taking an individual into custody in connection with NEET exam matter. Accordingly, Nashik Police Crime Branch Unit 2 has nabbed a… pic.twitter.com/7D9tmGqyaW
— ANI (@ANI) May 12, 2026
पहचान छिपाने के लिए बदला था लुक
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अपनी वेशभूषा और हेयर स्टाइल पूरी तरह बदल ली थी. शुरुआती दौर में पुलिस को उसकी पहचान करने में मुश्किलें आईं, लेकिन मोबाइल लोकेशन, तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट्स की मदद से आखिरकार उसे पकड़ लिया गया.
सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिया गया युवक पिछले कुछ वर्षों से मध्य प्रदेश के भोपाल में पढ़ाई कर रहा था. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह पेपर लीक नेटवर्क में किस स्तर पर शामिल था और किन लोगों के संपर्क में था.
रद्द हुई NEET-UG 2026 परीक्षा
पेपर लीक विवाद बढ़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है. एजेंसी ने कहा कि प्राप्त सूचनाओं और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हो गया है कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं होगा.
अब यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. NTA ने यह भी कहा है कि नए एडमिट कार्ड और परीक्षा शेड्यूल की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से साझा की जाएगी.
23 लाख छात्रों के भविष्य पर असर
NEET-UG 2026 परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी. इस परीक्षा में लगभग 23 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था. ऐसे में पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
कई छात्र सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रश्नपत्र कैसे बाहर पहुंच गया. वहीं दोबारा परीक्षा कराने के फैसले से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ने की भी चर्चा हो रही है.
CBI करेगी पूरे मामले की जांच
केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी है. NTA ने कहा है कि एजेंसी जांच में पूरा सहयोग करेगी और सभी जरूरी रिकॉर्ड व दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे.
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं.
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'ऑपरेशन सिंदूर' के डर से नहीं उबरी मुनीर की सेना: दिया विवादित बयान, मानवाधिकार संगठन ने लताड़ा
क्वेटा, 12 मई (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत से करारी शिकस्त खा चुके पाकिस्तान का दर्द अब भी हरा है। यही वजह है कि भारतीय सेना की जाबांजी की कहानी कहते उस अभियान के एक साल पूरे होने पर कुछ ऐसा कहा गया जो लैंगिक असमानता को लेकर उसकी सोच दर्शाता है। नतीजतन अपने ही घर में वो घिर गया है। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने कड़े शब्दों में उसकी निंदा की है।
बीएनएम अध्यक्ष नसीम बलोच ने मंगलवार को पाकिस्तानी शस्त्र सेना के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उसने ऑपरेशन सिंदूर नाम चुने जाने पर तंज कसा था। बलोच के अनुसार, जो कहा गया वो बातें पाकिस्तान में महिलाओं के प्रति एक पिछड़ी सोच और गहरे भेदभाव को दिखाती हैं।
पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (डीजी आईएसपीआर) के महासचिव की बातों का हवाला देते हुए (जो देश की आर्म्ड फोर्सेज़ की ऑफिशियल मीडिया और पब्लिक रिलेशंस विंग है) कहा कि सिंदूर महिलाओं से जुड़ा है, और एक सैन्य अभियान को मर्दों वाला नाम दिया जाना चाहिए था।
इसी पर नसीम ने कहा कि बयान से पता चलता है कि पाकिस्तानी समाज में महिलाओं की स्थिति क्या है और उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है।
बलोच कार्यकर्ता ने कहा, यह बयान सिर्फ एक शब्द के बारे में नहीं था; यह एक गहरी सोच को दर्शाता है, जहां महिलाओं से जुड़ी किसी भी चीज को कमजोर और कमतर समझा जाता है या फिर उसे तवज्जो ही नहीं दी जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं को अक्सर पुरुषों के मुकाबले समाज में कमतर आंका जाता है, इसीलिए औरत मार्च जैसे आंदोलनों और महिला अधिकारों के कैंपेन का अक्सर मजाक उड़ाया जाता है या फिर उनके खिलाफ नफरत भरी बातें कही जाती हैं।
यह कहते हुए कि बलूचिस्तान महिलाओं के प्रति ऐसे पुरुष-प्रधान नजरिए के बिल्कुल उलट है, नसीम ने कहा, बलूच महिलाओं ने ऐतिहासिक रूप से समाज में एक सम्मानित और प्रभावशाली स्थान रखा है और सदियों से लड़ाई के मैदान और विरोध का हिस्सा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा, इतिहास से लेकर आज तक, बलोच महिलाएं हिम्मत, सम्मान और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि ताकत और सम्मान जेंडर से तय नहीं होते।
इससे पहले रविवार को, मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने सिंध सरकार की आलोचना की थी। दरअसल, सरकार ने संगठन को औरत मार्च प्रोग्राम में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। इस कदम को बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ सरकारी फासीवाद करार दिया गया।
--आईएएनएस
केआर/
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