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'ऑपरेशन सिंदूर' के डर से नहीं उबरी मुनीर की सेना: दिया विवादित बयान, मानवाधिकार संगठन ने लताड़ा

क्वेटा, 12 मई (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत से करारी शिकस्त खा चुके पाकिस्तान का दर्द अब भी हरा है। यही वजह है कि भारतीय सेना की जाबांजी की कहानी कहते उस अभियान के एक साल पूरे होने पर कुछ ऐसा कहा गया जो लैंगिक असमानता को लेकर उसकी सोच दर्शाता है। नतीजतन अपने ही घर में वो घिर गया है। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने कड़े शब्दों में उसकी निंदा की है।

बीएनएम अध्यक्ष नसीम बलोच ने मंगलवार को पाकिस्तानी शस्त्र सेना के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उसने ऑपरेशन सिंदूर नाम चुने जाने पर तंज कसा था। बलोच के अनुसार, जो कहा गया वो बातें पाकिस्तान में महिलाओं के प्रति एक पिछड़ी सोच और गहरे भेदभाव को दिखाती हैं।

पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (डीजी आईएसपीआर) के महासचिव की बातों का हवाला देते हुए (जो देश की आर्म्ड फोर्सेज़ की ऑफिशियल मीडिया और पब्लिक रिलेशंस विंग है) कहा कि सिंदूर महिलाओं से जुड़ा है, और एक सैन्य अभियान को मर्दों वाला नाम दिया जाना चाहिए था।

इसी पर नसीम ने कहा कि बयान से पता चलता है कि पाकिस्तानी समाज में महिलाओं की स्थिति क्या है और उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है।

बलोच कार्यकर्ता ने कहा, यह बयान सिर्फ एक शब्द के बारे में नहीं था; यह एक गहरी सोच को दर्शाता है, जहां महिलाओं से जुड़ी किसी भी चीज को कमजोर और कमतर समझा जाता है या फिर उसे तवज्जो ही नहीं दी जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं को अक्सर पुरुषों के मुकाबले समाज में कमतर आंका जाता है, इसीलिए औरत मार्च जैसे आंदोलनों और महिला अधिकारों के कैंपेन का अक्सर मजाक उड़ाया जाता है या फिर उनके खिलाफ नफरत भरी बातें कही जाती हैं।

यह कहते हुए कि बलूचिस्तान महिलाओं के प्रति ऐसे पुरुष-प्रधान नजरिए के बिल्कुल उलट है, नसीम ने कहा, बलूच महिलाओं ने ऐतिहासिक रूप से समाज में एक सम्मानित और प्रभावशाली स्थान रखा है और सदियों से लड़ाई के मैदान और विरोध का हिस्सा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा, इतिहास से लेकर आज तक, बलोच महिलाएं हिम्मत, सम्मान और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि ताकत और सम्मान जेंडर से तय नहीं होते।

इससे पहले रविवार को, मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने सिंध सरकार की आलोचना की थी। दरअसल, सरकार ने संगठन को औरत मार्च प्रोग्राम में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। इस कदम को बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ सरकारी फासीवाद करार दिया गया।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत में 14 और 15 मई को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, विदेश मंत्रालय ने दो दिवसीय समिट का शेड्यूल किया जारी

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। भारत इस साल 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन- 2026 की मेजबानी कर रहा है। शिखर सम्मेलन का आयोजन 14 और 15 मई को होगा। इससे पहले 17वें ब्रिक्स समिट का आयोजन ब्राजील ने रियो डी जेनेरियो में किया था। विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के शेड्यूल से संबंधित जानकारी साझा की है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार, 14 मई, को सुबह 10 बजे विदेश मंत्रियों का आगमन भारत मंडपम में होगा। इसके बाद 10.30 बजे पहले सेशन की शुरुआत होगी। फिर दिन के 1 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सेवा तीर्थ में सभी मंत्रियों की संयुक्त मुलाकात होगी।

इसके बाद 3 बजकर 10 मिनट पर दूसरे सेशन की शुरुआत होगी। फिर शाम 7 बजे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की तरफ से भारत मंडपम में ही डिनर का आयोजन किया जाएगा। समिट के अगले दिन 15 मई को सुबह 10 बजे तीसरे सेशन की शुरुआत होगी।

इससे पहले 13वां ब्रिक्स समिट 9 सितंबर 2021 को भारत में हुआ था। इसका थीम ब्रिक्स 15: कंटिन्यूटी, कंसोलिडेशन और कंसेंसस के लिए इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग था। नेताओं ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन को अपनाया, जिसने ब्रिक्स की 15वीं सालगिरह को मार्क किया और मल्टीलेटरल सिस्टम में सुधार, काउंटर-टेररिज्म को-ऑपरेशन, एसडीजी को पाने के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करने और लोगों के बीच लेन-देन को बढ़ाने पर जोर दिया।

भारत ने ब्रिक्स के काम करने के तरीकों को आसान बनाया, बातचीत को आसान और ज्यादा एक्सेसिबल बनाया और डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन और पहली जल मंत्रियों की बैठक जैसे नए मंत्री स्तर के ट्रैक शुरू किए।

बैठक में ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अरब अमिरात की ओर से उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व होने की उम्मीद है। ईरान की ओर से भी उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि चीन के शेरपा प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक 14 और 15 मई को आयोजित हो सकती है और इसमें वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण थीम निर्धारित की है। भारत ने आयोजन की कमान संभालने के बाद 13 जनवरी को ब्रिक्स 2026 की वेबसाइट, थीम और लोगो लॉन्च किए थे।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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