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जांच एजेंसियों के निशाने पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शाहजाद भट्टी, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने का आरोप

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में रहने वाले गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नाम पिछले कुछ महीनों में भारत में आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और जासूसी से जुड़े कई मामलों में बार-बार सामने आया है। खबरों के मुताबिक, अलग-अलग एजेंसियों ने उसके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा केस दर्ज किए हैं।

लाहौर का रहने वाला भट्टी पिछले कई वर्षों से दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पाकिस्तान, यूएई और मध्य पूर्व के दूसरे देशों के बीच लगातार यात्रा करता रहा है। उसके खिलाफ आतंकियों की भर्ती और लोगों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के कई मामले दर्ज होने के बाद भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाकर अदालत में पेश करने की कोशिशों को तेज कर रही हैं।

एक भारतीय सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि भट्टी ने कानूनी और अलग-अलग देशों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी कुछ कमजोरियों का फायदा उठाकर खुद को भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर रखा हुआ है।

अधिकारी ने कहा क‍ि वह भारतीय नागरिक नहीं है, बल्कि पाकिस्तान का रहने वाला है। इसके अलावा वह कभी भारत आया भी नहीं, इसलिए उसका प्रत्यर्पण यानी भारत लाना और मुश्किल हो गया है।

एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि हालांकि यह प्रक्रिया मुश्किल जरूर होगी, लेकिन नामुमकिन नहीं है। एजेंसियां उन देशों के साथ मिलकर काम करेंगी, जहां भट्टी के होने की आशंका है, ताकि उसे भारत लाकर मुकदमा चलाया जा सके।

अधिकारियों ने पुराने आतंकवाद से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे प्रत्यर्पण पहले भी हो चुके हैं। 26/11 मुंबई हमलों के एक अहम आरोपी को अमेरिका की अदालतों में सभी कानूनी रास्ते खत्म होने के बाद भारत लाया गया था।

डेविड हेडली के मामले में प्रत्यर्पण नहीं हो पाया था, क्योंकि उसने अमेरिकी अधिकारियों के साथ एक समझौता किया था। उस समझौते के तहत उसे अमेरिका में रहने की अनुमति मिली और उसे भारत नहीं भेजा जा सकता था। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसियों को उससे पूछताछ की इजाजत दी गई थी और बाद में उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में भी हिस्सा लिया।

अधिकारियों के मुताबिक, भट्टी एक बड़ा और अहम ऑपरेटिव है, जिसे पाकिस्तान की खुफ‍िया एजेंसी यानी आईएसआई का संरक्षण मिलने की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि अगर भारत की कोशिशें तेज हुईं तो वह वापस पाकिस्तान लौट सकता है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता भट्टी के भर्ती नेटवर्क को तोड़ना है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह नेटवर्क ज्यादातर सोशल मीडिया के जरिए चलाया जा रहा था। भट्टी और उसके पाकिस्तान में मौजूद साथी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगों को ढूंढते और भर्ती करते थे।

जांचकर्ताओं के अनुसार, अलग-अलग राज्यों के युवाओं को पैसे, ताकत और पहचान का लालच देकर निशाना बनाया जाता था। उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे “हीरो” बन जाएंगे। अधिकारी ने बताया क‍ि भर्ती के दौरान पैसों और ताकत का लालच भी दिया जाता था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि भट्टी का यह नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में हमलों को अंजाम देने की तैयारी के लिए बनाया गया था। शुरुआत में एजेंसियों को शक था कि यह भर्ती अभियान मुख्य रूप से पंजाब में हमले करवाने के मकसद से चलाया जा रहा था।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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खुद को ज‍िम्‍मेदार बताने वाले रखें अपनी प्रत‍िष्‍ठा का ख्‍याल, पाक‍िस्‍तान को चीन के समर्थन पर भारत का तीखा जवाब

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन के समर्थन पर विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा क‍ि जो देश खुद को जिम्मेदार वैश्विक ताकत मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को बचाने का समर्थन करने से उनकी छवि और प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को चीन के समर्थन से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से ज्ञात बातों की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर असल में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई एक सटीक, सीमित और संतुलित कार्रवाई थी, जिसका मकसद पाकिस्तान से और उसके समर्थन से चल रहे आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।”

उन्होंने कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने की कोशिशों का समर्थन करने से उनकी साख और प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ता है।

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के स्वदेशी हथियार सिस्टम का सामना पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे चीन के हथियारों और प्लेटफॉर्म से हुआ।

अमेरिका के मशहूर शहरी युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट इंडियाज ऑपरेशन सिंदूर: ए बैटलफील्ड वर्डिक्ट ऑन चाइनीज वेपन्स-एंड इंडियाज विक्ट्री में लिखा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह तकनीक, रणनीति और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन भी था।

स्पेंसर ने लिखा, “भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में आत्मनिर्भरता कैसी दिखती है, और यह साबित किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुश्किल हालात में भी सफल है।”

मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज के चेयर और अर्बन वॉरफेयर प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर स्पेंसर ने कहा कि पाकिस्तान की प्रॉक्सी डिपेंडेंसी भारत की स्वतंत्र ताकत के सामने टिक नहीं पाई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान कब्‍जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था।

उन्होंने लिखा, “भारत ने एक स्वतंत्र ताकत की तरह लड़ाई लड़ी, ऐसे सटीक हथियारों के साथ जिन्हें उसने खुद डिजाइन किया, बनाया और इस्तेमाल किया। वहीं पाकिस्तान चीन के हथियारों पर निर्भर रहा, जो निर्यात के लिए बनाए गए थे, उत्कृष्टता के लिए नहीं। जब असली चुनौती आई तो ये सिस्टम कमजोर साबित हुए, जिससे पाकिस्तान की रक्षा रणनीति की सच्चाई सामने आ गई।”

पिछले हफ्ते भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाई। यह सैन्य कार्रवाई मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से पाकिस्तान और पाकिस्तान कब्‍जे वाले कश्मीर में मौजूद बड़े आतंकी ठिकानों और आतंकियों के खिलाफ की गई थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी।

वर्षगांठ के मौके पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति की तरह इस्तेमाल करता रहा है। भारत ने दोहराया कि उसे अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है और वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने के लिए लगातार काम करता रहेगा।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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