VIDEO: दहेज की ऐसी नुमाइश देखी हैं कहीं? दूल्हे को BMW, बिचौलिए को Scorpio और...
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सोने की खरीद पर पीएम मोदी की 'No' : समझें क्यों सरकार नहीं चाहती कि इस वक्त आप सोना खरीदें, ये हैं 3 बड़ी वजहें
मध्य पूर्व मे जारी युद्ध की आहट ने दुनिया भर के बाजारों को डरा दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर भाग रहे हैं, जिससे इसकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई हैं। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है, पर इसका गहरा असर पड़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सख्त लेकिन जरूरी आर्थिक फॉर्मूला दिया है। सरकार का संकेत साफ है कि वर्तमान अनिश्चितता के दौर में सोने की भारी खरीद देश की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरी हो सकती है।
'गोल्ड स्ट्राइक' के पीछे की 3 बड़ी वजहें
1. आयात बिल और राजकोषीय घाटा
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है। जब सोने के दाम बढ़ते हैं, तो भारत का 'इम्पोर्ट बिल' भी बढ़ जाता है। इसके भुगतान के लिए भारी मात्रा में डॉलर बाहर भेजने पड़ते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है और राजकोषीय घाटा बढ़ता है। सरकार चाहती है कि विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कच्चे तेल जैसे आवश्यक संसाधनों के लिए सुरक्षित रहे।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
युद्ध की स्थिति में तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा है। अगर कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं। सरकार की प्राथमिकता इस वक्त ऊर्जा सुरक्षा है। सोने में पैसा फंसने के बजाय सरकार चाहती है कि बाजार में नकदी बनी रहे ताकि अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
3. डॉलर की मजबूती और गिरता रुपया
वैश्विक संकट के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत हो जाता है। जब भारतीय नागरिक बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो वे अप्रत्यक्ष रूप से डॉलर की मांग बढ़ाते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है। रुपये की कमजोरी का मतलब है—सब कुछ महंगा होना। इसलिए, पीएम मोदी का फॉर्मूला इस वक्त सोने की मांग को कम कर रुपये को स्थिर रखने पर केंद्रित है।
डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का विकल्प
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया है कि अगर निवेश करना ही है, तो लोग 'फिजिकल गोल्ड' के बजाय 'डिजिटल गोल्ड' या 'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड' (SGB) का चुनाव करें। इससे घर में सोना रखने का जोखिम कम होता है और अर्थव्यवस्था पर आयात का बोझ भी नहीं पड़ता। सरकार का मानना है कि सोने की 'डेड एसेट' के बजाय प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट देश के काम आएगा।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सोने की कीमतें 'हाइप' पर हैं। युद्ध के बादल छंटते ही कीमतों में सुधार आ सकता है। ऐसे में ऊंचे दामों पर सोना खरीदना नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। पीएम मोदी की 'No' इसी ओर इशारा करती है कि जनता अपनी गाढ़ी कमाई को सोच-समझकर निवेश करे और बाजार के 'पैनिक' का हिस्सा न बने।
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