Google Outage India: भारत में गूगल यूजर्स को आ रहीं ये सारी परेशानी, Android और Chrome पर क्या पड़ा असर जानिए
Google Outage India: Google की सेवाएं मंगलवार को भारत में कई यूजर्स के लिए बाधित हो गईं, जिससे हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector के अनुसार, करीब 2,067 यूजर्स ने Google सेवाओं में दिक्कत की शिकायत दर्ज कराई।
Ayurvedic Upay for Stress: कॉर्पोरेट तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी में राहत दे सकता है पतंजलि का यह प्राचीन ज्ञान
Ayurvedic Upay for Stress: आज की कॉर्पोरेट लाइफ में लंबे समय तक लैपटॉप के सामने बैठना, लगातार मीटिंग्स करना, डेडलाइन पर काम खत्म करके देने का दबाव और बार-बार मोबाइल नोटिफिकेशन्स आना लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका रही है. कई इंपलॉय दिनभर काम करने के बाद भी खुद को ऊर्जावान महसूस नहीं करते हैं. युवाओं की आंखों में जलन, शरीर में भारीपन, बेचैनी और तनाव अब प्रोफेशनल लाइफ का आम हिस्सा बन चुका है. मगर दिलचस्प बात यह है कि इन समस्याओं का जिक्र सदियों पहले भी आयुर्वेद और योग में किया जा चुका है.
पतंजलि ने सदियों पहले बताई थीं मानसिक थकान की समस्याएं
पतंजलि ने अपने योग सूत्रों में मन और शरीर की उन अवस्थाओं का के बारे में बताया है, जो इंसान को मानसिक रूप से कमजोर और अस्थिर बनाती हैं. आचार्य बालकृष्ण ने सुस्ती, आलस्य, बेचैनी और फोकस की कमी जैसी समस्याओं को अंतराय बताया था. आज के कॉर्पोरेट कर्मचारियों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही दिखाई देती है.
आयुर्वेद के अनुसार कैसे बिगड़ता है शरीर का संतुलन
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में 3 दोष- वात, पित्त और कफ संतुलित रहने जरूरी होते हैं. लेकिन मॉडर्न ऑफिस लाइफ इन तीनों को असंतुलित कर देती है. घंटों तक एक ही जगह बैठने से कफ बढ़ता है, जिससे शरीर भारी और सुस्त महसूस करता है. लगातार स्क्रीन देखने और तनाव में काम करने से शरीर का पित्त बढ़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन और आंखों में तनाव होता है. वहीं, लगातार फोन पर नोटिफिकेशन, मल्टीटास्किंग और मानसिक दबाव से वात दोष बढ़ता है, जो बेचैनी और चिंता पैदा करते हैं.
सही दिनचर्या को आयुर्वेद मानता है सबसे बड़ा उपचार
आयुर्वेद के अनुसार ऐसी समस्याओं का समाधान सिर्फ दवा नहीं होती है बल्कि सही दिनचर्या का अपनाना होता है. हमें प्रतिदिन सुबह की शुरुआत शांत और संतुलित तरीके से करनी चाहिए. नहाने से पहले तिल के तेल से शरीर की हल्की मालिश करनी चाहिए, जिसे अभ्यंग कहा जाता है. इससे शरीर को स्थिरता और आराम मिलता है. यह नर्वस सिस्टम को शांत करने में भी मददगार होता है. इसके अलावा, पौष्टिक और गर्म नाश्ता शरीर को ऊर्जा देता है. आयुर्वेद के अनुसार खाली पेट केवल चाय या कॉफी के सहारे दिन शुरू करना शरीर की ऊर्जा को कमजोर कर सकता है. इसलिए, सुबह संतुलित भोजन करना चाहिए.
ऑफिस में आंखों और दिमाग को आराम देना क्यों जरूरी है?
ऑफिस के दौरान भी हमें अपने शरीर को आराम देना आवश्यक होता है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों और दिमाग पर दबाव बढ़ता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर कुछ मिनट में स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखने की सलाह देते हैं. साथ ही गहरी सांस लेना और कुछ मिनट प्राणायाम करने से मानसिक तनाव कम होता है. विशेष रूप से नाड़ी शोधन प्राणायाम को तनाव नियंत्रण में प्रभावी माना गया है.
काम करने के सही समय को समझना जरूरी
आयुर्वेद में दिनचर्या और समय के महत्व पर भी खासा जोर दिया जाता है. माना जाता है कि सुबह का समय मानसिक एकाग्रता के लिए सबसे अच्छा होता है, जबकि दोपहर बाद शरीर थोड़ा भारी महसूस करने लगता है. ऐसे में कठिन और महत्वपूर्ण काम दिन के शुरुआती हिस्से में कर लेने चाहिए.
देर रात स्क्रीन देखने और हैवी खाना नुकसानदेह
पतंजलि आयुर्वेद रात की आदतों को भी ओवरऑल हेल्थ से जोड़ा जाता है. देर रात भारी भोजन करना और सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से भी हमारे शरीर और ब्रेन, दोनों को प्रभावित होते हैं. आयुर्वेद हल्का भोजन और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह देता है, ताकि बेहतर नींद आ सके.
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