चेहरे पर करती हैं शेव तो हो जाएं सतर्क, इन 10 बातों का हमेश रखें ख्याल
फेशियल हेयर क्लीन करने के लिए बहुत सी महिलाएं रेजर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन कई बार कुछ गलतियों की वजह से कट आ जाता है या फिर स्किन पर रैश हो जाते हैं। स्किन की इन प्रॉब्लम से बचने के लिए आपको यहां बताई 10 बातों का हमेशा ख्याल रखना चाहिए।
ऑनलाइन ठगी हो जाए तो घबराएं नहीं: तुरंत करें ये 5 काम, पैसे बचने की बढ़ जाती उम्मीद
Online Fraud: डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे। कई बार लोगों को तब पता चलता है कि उनके खाते से पैसे निकल चुके, जब मोबाइल पर ट्रांजैक्शन का मैसेज आता है। ऐसे समय में ज्यादातर लोग घबरा जाते और समझ नहीं पाते कि सबसे पहले क्या करना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठगी के बाद शुरुआती 10 से 15 मिनट बेहद अहम होते। अगर तुरंत सही कदम उठाए जाएं तो पैसे रिकवर होने की संभावना बढ़ सकती।
अगर आपके खाते से बिना अनुमति पैसे निकल गए तो सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। यह सरकार की आधिकारिक हेल्पलाइन है, जहां वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में बैंक और जांच एजेंसियां ट्रांजैक्शन को समय रहते फ्रीज कर सकती, लेकिन इसके लिए तुरंत सूचना देना जरूरी होता। लोग अक्सर पहले खुद समझने की कोशिश में समय गंवा देते हैं और इसी बीच पैसा अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हो जाता।
बैंक को तुरंत दें जानकारी
1930 पर शिकायत करने के बाद तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। अगर मामला यूपीआई फ्रॉड का है तो अस्थायी रूप से यूपीआई बंद कर दें। कार्ड से जुड़ी ठगी होने पर कार्ड ब्लॉक कराएं। जरूरत पड़े तो नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का एक्सेस भी बंद कर दें। इसका मकसद आगे होने वाले नुकसान को रोकना होता है। कई बार ठग एक ट्रांजैक्शन के बाद लगातार कई ट्रांजैक्शन करने की कोशिश करते हैं।
साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज करें शिकायत
इसके बाद गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत दर्ज करते समय घटना का समय, रकम और पूरी जानकारी साफ-साफ लिखें। अगर स्क्रीनशॉट या ट्रांजैक्शन डिटेल्स हों तो उन्हें भी अपलोड करें। यह शिकायत आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनती है और आगे की जांच इसी आधार पर होती है।
शिकायत नंबर संभालकर रखें
ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने के बाद एक ऐकनॉलेजमेंट नंब मिलता है। इसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। आगे शिकायत ट्रैक करने, फॉलोअप करने और पुलिस या साइबर सेल से संपर्क में यही नंबर काम आता है।
तुरंत अपडेट की उम्मीद न करें
शिकायत के बाद मामला स्थानीय साइबर सेल या पुलिस के पास पहुंचता है। वहां से बैंक और पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर ट्रांजैक्शन ट्रेस किया जाता है। इसमें समय लग सकता है। अगर लंबे समय तक कोई अपडेट नहीं मिले तो संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन जाकर फॉलोअप करना बेहतर रहता है।
जानकारों का कहना है कि साइबर फ्रॉड में सबसे बड़ा हथियार समय होता है। अगर पैसा अभी सिस्टम में कहीं रुका हुआ है तो उसे फ्रीज किया जा सकता है, लेकिन देर होने पर रिकवरी मुश्किल हो जाती है। इसलिए ऐसे मामलों में पहले कार्रवाई करें, बाद में पूरी कहानी समझें।
(प्रियंका कुमारी)
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