दक्षिण कोरिया- यूएस के शीर्ष रक्षा अधिकारियों की बैठक, 'युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल’ ट्रांसफर और होर्मुज पर होगी बात
वाशिंगटन, 11 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारी सोमवार को वाशिंगटन में महत्वपूर्ण वार्ता करने वाले हैं। इस बैठक में अमेरिका से दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीसीओएन) सौंपने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और दक्षिण कोरिया की परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हासिल करने की योजना पर चर्चा होगी।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता पिछले वर्ष हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठकों और दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुए समझौतों के आधार पर ओपीसीओएन हस्तांतरण और परमाणु पनडुब्बियों से जुड़े अगले कदमों पर विचार करेंगे।
दक्षिण कोरिया ने हाल ही में जांच के आधार पर स्पष्ट किया कि 4 मई को होर्मुज में दक्षिण कोरिया संचालित मालवाहक जहाज में हुए धमाके और आग की वजह दो अज्ञात फ्लाइंग ऑब्जेक्ट से हमला था। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार इस मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है।
दक्षिण कोरिया की सरकार 2030 में समाप्त होने वाले राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के कार्यकाल से पहले ओपीसीओएन वापस लेने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ही 2028 तक यह हस्तांतरण पूरा करना चाहती है।
हालांकि, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद के संकेत भी मिले हैं। अमेरिका फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रनसन ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस में कहा था कि दोनों देश 2029 की पहली तिमाही तक ओपीसीओएन हस्तांतरण की आवश्यक शर्तें पूरी करने का लक्ष्य रख रहे हैं।
दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान अपने सैन्य बलों का ऑपरेशनल कंट्रोल अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमांड को सौंप दिया था। 1994 में उसने शांतिकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल वापस ले लिया, लेकिन युद्धकालीन नियंत्रण अब भी अमेरिका के पास है।
तीन चरणों वाली रूपरेखा के तहत ओपीसीओएन हस्तांतरण के लिए आवश्यक शर्तों में दक्षिण कोरिया के पास संयुक्त (कोरिया-अमेरिका) बलों का नेतृत्व करने की क्षमता, उसकी मिसाइल और वायु रक्षा क्षमता के साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण का अनुकूल होना शामिल है।
पिछले वर्ष हुई वार्षिक सिक्योरिटी कंसल्टेटिव मीटिंग में दोनों देशों ने ओपीसीओएन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए रोडमैप तैयार करने और तीन चरणों वाले कार्यक्रम के दूसरे हिस्से के प्रमाणीकरण पर सहमति जताई थी।
बैठक में होर्मुज में हुए जहाज हमले पर भी चर्चा की संभावना है। इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया मध्य पूर्व में तनाव कम करने के प्रयासों में अपनी भूमिका पर पुनर्विचार कर सकता है।
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने के लिए नौसैनिक सहायता देने का अनुरोध किया है। दक्षिण कोरिया फिलहाल “मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट” (एमएफसी) नामक अंतरराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन में शामिल होने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
रविवार को सोल ने कहा कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए “हर संभव कदम” उठाएगा और एमएफसी में शामिल होने के प्रस्ताव की “गहन समीक्षा” कर रहा है।
इसके अलावा, बैठक में दक्षिण कोरिया की परमाणु-संचालित पनडुब्बियां बनाने की योजना पर भी चर्चा होगी। पिछले वर्ष अक्टूबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ शिखर वार्ता में इस दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति दी थी, लेकिन अब तक ज्यादा प्रगति नहीं हुई है।
वाशिंगटन रवाना होने से पहले रक्षा मंत्री आह्न ने कहा कि उन्हें रणनीतिक पनडुब्बियों को लेकर बातचीत में प्रगति की उम्मीद है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परमाणु-संचालित पनडुब्बियों पर पहली औपचारिक बैठक इस वर्ष की पहली छमाही समाप्त होने से पहले हो सकती है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मोबाइल डेटा जैसी क्रांति लाएगा एआई, ऊर्जा खपत में होगी बड़ी वृद्धि : गौतम अदाणी
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि एआई मोबाइल डेटा विस्फोट जैसी क्रांति लाएगा और इससे ऊर्जा की खपत में तेज वृद्धि होगी।
राष्ट्रीय राजधानी में सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि एक दशक पहले, कुछ ही लोगों ने भारत में मोबाइल डेटा के विस्फोट के पैमाने की कल्पना की थी, लेकिन जैसे ही स्मार्टफोन किफायती हुए, नेटवर्क का विस्तार हुआ, डेटा की कीमतें गिरीं और खपत में जबरदस्त उछाल आया।
अदाणी समूह के चेयरमैन ने कहा,“एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी इसी तरह की वृद्धि लाएगा, लेकिन यह वृद्धि कहीं अधिक ऊर्जा खपत करने वाली होगी। डेटा सेंटर की क्षमता, जिसके 2030 तक 5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, 2047 तक लगभग 75 गीगावाट तक बढ़ सकती है, इसीलिए भारत को अभी से तैयारी करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत आम परिवारों, फैलते शहरों, सक्रिय कारखानों, इलेक्ट्रिक वाहनों और विस्तार की प्रतीक्षा कर रहे लाखों छोटे व्यवसायों के लिए विकास कर रहा है।
अदाणी समूह के प्रमुख ने कहा, “भारत में एक बड़ा फायदा यह है कि हम जो कुछ भी बनाएंगे, उसकी मांग पहले से ही मौजूद होगी। हमारे सामने चुनौती है ऐसी क्षमता का निर्माण करना जो मांग के साथ तालमेल बिठा सके।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने एनर्जी सेक्टर में असाधारण प्रगति की है और मार्च 2026 में स्थापित ऊर्जा क्षमता 500 गीगावाट से अधिक हो गई है। बीते 10 वर्षों में स्थापित क्षमता में 53 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई है।
गौतम अदाणी ने आगे कहा कि भारत अपनी इस क्षमता को 4 गुना तक बढ़ाने के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले दो दशक यानी 2047 तक यह 2,000 गीगावाट तक पहुंच जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी जीडीपी की वृद्धि दिशा देश की ग्रोथ स्टोरी को स्पष्ट रूप से दिखाती है। देश को दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 67 वर्ष का समय लगा, लेकिन अगले दो ट्रिलियन डॉलर अगले 12 वर्षों में ही जोड़े गए।
गौतम अदाणी के मुताबिक,भारत तेजी से विकास कर रहा है। हर सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डा, कारखाना, ऊर्जा संसाधन और डेटा सेंटर विकास के अगले स्तर को बढ़ा रहा है। इस रफ्तार से, भारत हर दशक में अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक नई यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बराबर वृद्धि करेगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















