उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना को लेकर MP सरकार को घेरा, कहा ” आदिवासियों का चिता आंदोलन बीजेपी की संवेदनहीनता का प्रमाण”
उमंग सिंघार ने छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे ‘चिता आंदोलन’ को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों का सांकेतिक चिताओं पर लेटना भाजपा सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ दर्दभरी पुकार है लेकिन सरकार उनकी आवाज़ सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई और दमन का रास्ता अपना रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, उसी शासन में महिलाएं अपने बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासी परिवारों को विस्थापित कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्मिता की लड़ाई में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और यह संघर्ष “सड़क से सदन तक” जारी रहेगा।
स्थानीय निवासियों का आंदोलन जारी
छतरपुर और पन्ना जिलों की सीमा पर स्थित धोड़न डैम (दौधन) क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ शनिवार से चल रहा ‘चिता आंदोलन’ सोमवार को और तेज़ हो गया। रविवार को भी सैकड़ों ग्रामीणों ने सांकेतिक चिताओं पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ चिताओं पर लेटी नजर आईं। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन, जंगल और आजीविका बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में उनके नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई और विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास तथा वैकल्पिक भूमि देने की मांग शामिल है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने इस आंदोलन में महिलाओं और बच्चों के सांकेतिक चिताओं पर लेटने की घटना को भाजपा सरकार की “संवेदनहीनता” करार देते हुए बीजेपी पर आदिवासी समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में महिलाओं और बच्चों का चिताओं पर लेटना सरकार के खिलाफ एक दर्दभरी पुकार है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी परिवार अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय दमन का रवैया अपना रही है। कांग्रेस नेता ने कहा है कि उनकी पार्टी आदिवासी समाज की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और यह न्याय की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।
योगी कैबिनेट में पूजा पाल को जगह नहीं मिलने पर सपा नेता ने कसा तंज, कहा – ‘विश्वासघात का फल अवश्य मिलता है’
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। दरअसल रविवार (10 मई) को यूपी का मंत्रिमंडल विस्तार संपन्न हुआ, जिसमें छह नए चेहरों सहित कुल आठ मंत्रियों ने शपथ ली। वहीं इस विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल को लेकर थी, जिन्हें योगी कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। अब इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव के करीबी और सपा नेता आईपी सिंह ने पूजा पाल पर जोरदार तंज कसा है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा हो रही है।
दरअसल योगी कैबिनेट विस्तार से पहले लगातार यह चर्चा चल रही थी कि कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल को इस मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, उन्हें योगी सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इस पर अब सपा नेता आईपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। आईपी सिंह ने पूजा पाल पर व्यक्तिगत हमला करते हुए लिखा, “मंत्री तो छोड़ो अब तुम बीजेपी कोटे से कभी विधायक नहीं बन पाओगी।” उन्होंने आगे कहा कि, “जो इंसान इस दुनिया में नहीं है उसके नाम पर राजनीति करते हुए उसे भी धोखा दिया दूसरा घर बसाकर। विश्वासघात का फल अवश्य मिलता है। अब बीजेपी का मंत्रीमंडल विस्तार 20 बरस बाद होगा।”
जानिए कौन हैं पूजा पाल?
बता दें कि पूजा पाल कौशांबी की चायल सीट से विधायक हैं और उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी, जिसके बाद वह विधानसभा पहुंचीं। हालांकि, बाद में उनके राजनीतिक निर्णयों ने उन्हें सपा से दूर कर दिया। राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में मतदान करने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सार्वजनिक तौर पर तारीफ करने जैसे आरोपों के बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का हवाला देते हुए साल 2025 में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस निष्कासन के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि पूजा पाल भाजपा का दामन थाम सकती हैं और उन्हें योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
साल 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियां
योगी सरकार के इस मंत्रिमंडल विस्तार को साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट ढूंढने और अपने जातीय समीकरणों को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से इस विस्तार को अंजाम दिया है। नए मंत्रियों में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व शामिल है। ब्राह्मण समुदाय से मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जबकि भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा, सोमेंद्र तोमर, अजीत सिंह पाल और कैलाश राजपूत जैसे नेता अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दलित समुदाय से कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। यह विस्तार भाजपा की समावेशी राजनीति और आगामी चुनावों में विभिन्न जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में पूजा पाल को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने और उस पर सपा नेता आईपी सिंह का यह तीखा बयान, उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे रहा है। आईपी सिंह के ‘विश्वासघात का फल’ वाले बयान से यह स्पष्ट है कि सपा अभी भी पूजा पाल के पार्टी छोड़ने और भाजपा के प्रति उनके झुकाव को लेकर अपनी नाराजगी बरकरार रखे हुए है।
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