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Brushing Tips: क्या दिन में 2 बार ब्रश करना ही ओरल हेल्थ के लिए काफी है? जानें सही ट्रिक

Brushing Tips: अक्सर लोगों का मानना होता हैं कि दिन में दो बार ब्रश करना ही अच्छी ओरल हाइजीन के लिए काफी है. मगर डेंटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली समस्या ब्रश करने की तकनीक में छिपा होता है. अगर आप सही तरीके से ब्रश नहीं करेंगे तो दांत पूरी तरह साफ नहीं होते और इसका लंबे समय बाद आपको नुकसान झेलना पड़ता है. ब्रशिंग एक डेली हैबिट है, जो हर उम्र के लोगों को अपनानी चाहिए. ऐसे में आपको बताते हैं ब्रश करने के सही तरीके के बारे में.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एशियन हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और हेड डेंटल सर्विसेज, डॉ. हामिद रैहान बताते हैं कि लोग सोचते हैं कि दिन में 2 बार ब्रश करना ही काफी है, लेकिन असली समस्या यह है कि हम ब्रश कैसे करते हैं. जब लोग बहुत जोर से या बहुत तेज-तेज ब्रश करते हैं, उनके एनामेल को नुकसान पहुंचता है और मसूड़े भी सेंसिटिव हो जाते हैं. इससे दांत ठीक से साफ नहीं हो पाते हैं.

जोर से और तेजी से ब्रश करना क्यों गलत?

दरअसल, कई लोग यह सोचकर तेज और दबाव डालकर ब्रश करते हैं कि इससे दांत ज्यादा जल्दी साफ होंगे, लेकिन ऐसा करने से दांतों की ऊपरी परत यानी एनामेल कमजोर हो जाते हैं. इसके अलावा, मसूड़ों में दर्द, सूजन और ब्लीडिंग की समस्या भी हो सकती है.

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इन हिस्सों को साफ करना भूल जाते हैं लोग

एक्सपर्ट के अनुसार, अधिकतर लोग रोज ब्रश करते हैं मगर ब्रश करते समय कुछ अहम हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे गम लाइन यानी मसूड़ों के पास का हिस्सा,  पीछे के दांत और जीभ. यहीं मुंह की ऐसी जगहें हैं जहां हानिकारक बैक्टीरिया सबसे ज्यादा पनपते हैं. इन हिस्सों की सफाई न करने से मुंह की बदबू, कैविटी और मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

सही तरीके से ब्रश कैसे करें?

डेंटल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्रश करने के लिए कम से कम 2 मिनट का समय जरूर निकालना चाहिए. ब्रश को हल्के हाथों से गोलाकार में चलाना चाहिए और हमेशा सॉफ्ट ब्रिसल्स वाला टूथ ब्रश यूज करना चाहिए. इससे दांत बेहतर तरीके से साफ होते हैं और नुकसान कम होता है.

समय पर टूथब्रश बदलना भी जरूरी

एक और आम गलती है, जो लोग सबसे ज्यादा करते हैं. लंबे समय तक एक ही टूथब्रश का इस्तेमाल करना. पुराना और घिसा हुआ ब्रश दांतों की सही सफाई नहीं कर पाता. इसलिए, हर 3 महीने में या ब्रश खराब होने पर उसे बदल देना चाहिए.

ब्रश के बाद कुल्ला करना सही है?

ज्यादातर लोग ब्रश करने के बाद तुरंत मुंह धो लेते हैं, लेकिन इससे टूथपेस्ट में मौजूद फ्लोराइड का असर कम हो जाता है. आपको ब्रश करने के बाद मुंह को ज्यादा पानी से नहीं धोना चाहिए. इसलिए, ब्रश करने के बाद हल्का-सा पेस्ट थूकना बेहतर माना जाता है, ताकि फ्लोराइड कुछ समय तक दांतों पर रहें और काम कर सके. इसके बाद कुल्ला कर सकते हैं.

ओरल हेल्थ के लिए सही तरीका अपनान जरूरी

दांतों की सफाई सिर्फ बार-बार ब्रश करने से नहीं होती है बल्कि सही तरीके से और नियमित रूप से ब्रश करने से होती है. अगर लोग अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो वे कैविटी, मसूड़ों की बीमारी और मुंह की बदबू से बच सकते हैं. दांतों की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम सिर्फ ब्रश करने की संख्या पर नहीं बल्कि उसके सही तरीके पर ज्यादा ध्यान दें. सही तकनीक अपनाकर और नियमित देखभाल से दांत लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं. साथ ही मीठा कम खाना चाहिए या खाने के बाद कुल्ला जरूर करना चाहिए.

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आईआईटी मद्रास छात्रों के आइडिया को बाजार तक पहुंचाने में निभा रहा बड़ी भूमिका : जयंत चौधरी

नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने मंगलवार को कहा कि आईआईटी मद्रास छात्रों को आइडिया को बाजार तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इनके द्वारा समर्थन और फंडिंग प्राप्त स्टार्टअप इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) लाने में सफल हुए हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आईआईटी मद्रास के एक कार्यक्रम में चौधरी ने कहा कि बिल्डिंग्स फॉर भारत थीम पर उद्योग जगत के दानदाता और एजुकेशन सिस्टम से जुड़े लोग आईआईटी में समाज की भलाई के लिए विकसित हो रही टेक्नोलॉजी को दुनिया तक पहुंचाने के लिए एकत्रित हुए हैं। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भारत इनोवेट्स 2026 भी एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके तहत आने वाले दिन में फ्रांस में एक बड़ा आयोजन होने वाला है।

उन्होंने आगे कहा कि आज यहां सर्कुलर इकोनॉमी और हेल्थ सेक्टर से जुड़े हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन हुआ है। यहां एग्जिबिशन में आप ब्रेन मैपिंग से लेकर मॉलिक्यूलर टेस्टिंग, मैपिंग से लेकर स्पोर्ट्स साइंस तक के एप्लीकेशन हैं।

साथ ही उन्होंने इनोवेशन को बढ़ाने के लिए आईआईटी मद्रास का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था ने छात्रों को आइडिया को बाजार तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है और फंडिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अन्य चीजों में संस्था द्वारा छात्रों को लगातार मदद की जा रही है। इस कारण आईआईटी मद्रास के सपोर्ट वाले कई स्टार्टअप आईपीओ भी लाने में सफल हुए हैं।

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अनुसंधान केवल पीएचडी शोध प्रबंधों और अकादमिक प्रकाशनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे ऐसे ठोस नवाचार होने चाहिए जिनसे समाज को लाभ हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न पहलों के माध्यम से उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को सहयोग देने के लिए अनुसंधान और विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।

भारत इनोवेट्स 2026, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) कार्यालय के रणनीतिक मार्गदर्शन और सुझावों के साथ शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों/उच्च शिक्षा संस्थानों में विकसित हो रही अनुसंधान एवं विकास समर्थित टेक्नोलॉजी इनोवेशन क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है।

फ्रांस में आयोजित होने वाली इस पहल का लक्ष्य विकास के विभिन्न चरणों में लगभग 100 आशाजनक और अभूतपूर्व टेक्नोलॉजी इनोवेशंस को उद्योग जगत के लोगों, निवेशकों, नीति निर्माताओं, संभावित सहयोगियों और प्रौद्योगिकी भागीदारों सहित वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करना है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Krunal Pandya का बड़ा बयान, बोले- IPL अब बल्लेबाजों का गेम, गेंदबाजों को बदलना होगा अपना स्टाइल

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के हरफनमौला कृणाल पंड्या ने कहा कि आईपीएल में बल्लेबाजों के आक्रामक प्रदर्शन के बीच प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिये गेंदबाजों को अपने हुनर में विविधता लानी होगी। पंड्या ने जियोस्टार से कहा ,‘‘ पिछले दस साल से अगर आईपीएल आपने करीब से देखा हो तो समझ में आयेगा कि लीग किस तरह बल्लेबाजों के आक्रामक प्रदर्शन की बानगी बन चुकी है। बल्लेबाजों की बड़े शॉट खेलने की क्षमता भी बदल गई है। नयी पीढी के बल्लेबाज आसानी से चौके छक्के लगा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ एक गेंदबाज के तौर पर मेरा मानना है कि गेंदबाजी में विविधता लानी जरूरी है। बल्लेबाजों से एक कदम आगे रहने की जरूरत है। ऐसे में बाउंसर्स और यॉर्कर अहम हो जाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि हेनरिच क्लासेन और श्रेयस अय्यर जैसे शानदार बल्लेबाजों को गेंदबाजी करना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन हालात को भांपकर उसके अनुकूल ढलने से उन्हें काफी मदद मिली है।

उन्होंने कहा ,‘‘ मैं हालात के अनुरूप गेंदबाजी करता हूं। कई बार आक्रामक गेंदबाजी की जरूरत होती है तो कई बार रन रोकने होते हैं। मेरा फलसफा सर्वश्रेष्ठ गेंद फेंकने का होता है। कई बार क्रीज पर कोई खतरनाक बल्लेबाज है और आपको विकेट चाहिये तो जोखिम लेना होता है। सब कुछ मैच हालात पर निर्भर करता है।

Thu, 07 May 2026 15:05:48 +0530

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