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इजरायल का दावा, 'हमले में हिज्बुल्लाह के रदवान यूनिट कमांडर समेत दो शीर्ष अफसरों की मौत'

तेल अवीव, 7 मई (आईएएनएस)। इजरायली सेना ने दावा किया है कि बेरूत पर किए गए हवाई हमले में हिज्बुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर की मौत हो गई। वहीं गाजा में की गई एक स्ट्राइक में हमास लीडर का बेटा मारा गया।

इजरायली डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने बताया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर बुधवार को किए गए हमले में हिज्बुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए। सेना ने यह भी कहा कि गुरुवार को इस हमले में नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस विभाग के प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और हिज्बुल्लाह के एयर डिफेंस ऑब्जर्वेशन ऑफिसर हुसैन हसन रोमानि भी मारे गए हैं।

इससे पहले, हिज्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली सैनिकों पर कई रॉकेट दागे थे। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

अल जजीरा के मुताबिक, इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई में हिज्बुल्लाह के 15 ठिकानों पर हमला किया है। इनमें हथियार भंडारण केंद्र भी शामिल बताए गए हैं।

ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक लेबनान पर इजरायली हमलों में कम से कम 2,715 लोगों की मौत हो चुकी है, 8,353 लोग घायल हुए हैं और 16 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। यह देश की कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है।

द टाइम्स ऑफ इजरायल ने बताया कि, गाजा सिटी पर हुए इजरायली हमले में हमास के राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख खलील अल हय्या के बेटे अज्जाम खलील अल हय्या की भी मौत हो गई।

इससे पहले हमास नेता खलील अल हय्या ने कहा था कि उनका बेटा इस हमले में घायल हुआ है। अब हमास के अधिकारी बासिम नईम ने इजरायली हमले में खलील अल-हय्या के बेटे के मारे जाने की पुष्टि कर दी है।

इजरायली हमले का शिकार हुई हय्या की ये चौथी औलाद थी। पिछले साल दोहा में हमास लीडरशिप को टारगेट करके किए गए इजरायली हमले में भी उनके एक बेटे की मौत हो गई थी। इससे पहले हय्या के दो और बेटे 2008 और 2014 में मारे गए थे।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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हर धार्मिक प्रथा को कोर्ट में चुनौती ठीक नहीं:सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट बोला- इससे सैकड़ों केस आएंगे, धर्म-समाज पर असर पड़ेगा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को संवैधानिक अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और सभ्यता पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे। यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने की, जो अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे और महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय का केस भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 साल पुरानी जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल उठाए थे। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर हर व्यक्ति धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाएगा, तो भारतीय समाज पर असर पड़ेगा, क्योंकि यहां धर्म समाज से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा, हर अधिकार पर सवाल उठेंगे-मंदिर खुलने या बंद होने तक के मामले कोर्ट में आएंगे। जस्टिस एम एम सुन्द्रेश ने कहा कि अगर ऐसे विवादों को लगातार अनुमति दी गई, तो हर व्यक्ति हर चीज पर सवाल उठाएगा। उन्होंने कहा कि इससे धर्म टूट सकते हैं और संवैधानिक अदालतों पर भी असर पड़ेगा। मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा है। समुदाय के केंद्रीय बोर्ड ने 1986 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें 1962 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 रद्द कर दिया गया था। इस कानून के तहत किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना गैरकानूनी था। 1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना, समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(बी) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है। धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं सुधारवादी दाऊदी बोहरा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट में दलील दी कि अगर कोई प्रथा सामाजिक या निजी कारणों से जुड़ी है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रथा अगर मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है, तो उसे सीमित किया जा सकता है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं-क्या यह समुदाय के भीतर होना चाहिए या राज्य या कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सभ्यता से है, और धर्म इसमें एक स्थायी तत्व है। इसे तोड़ना सही नहीं होगा। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते ------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें: सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पढ़ें पूरी खबर…

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Cheteshwar Pujara की युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को सलाह, मौका मिले तो Test Cricket जरूर खेलना

पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने कहा कि 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को अगर सही मौका मिले तो उन्हें निश्चित रूप से टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए और उन्होंने यह भी कहा कि खेल के लंबे प्रारूप के बारे में हर युवा खिलाड़ी को सोचना चाहिए। वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के मौजूदा सीजन में राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के लिए अब तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने 10 पारियों में 404 रन बनाए हैं।
 

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वैभव सूर्यवंशी लगातार अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से प्रभावित कर रहे हैं, जिसके चलते प्रशंसकों और विशेषज्ञों की ओर से उन्हें भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में जल्द से जल्द शामिल करने की मांग बढ़ रही है। हालांकि, चेतेश्वर पुजारा ने कहा कि सूर्यवंशी टी20 क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और भविष्य में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिलने की पूरी संभावना है, लेकिन अगर इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को सही मौका और क्षमता मिले, तो उन्हें निश्चित रूप से टेस्ट क्रिकेट खेलने का लक्ष्य रखना चाहिए, क्योंकि यह प्रारूप धैर्य, कौशल और खेल के प्रति सम्मान विकसित करने में मदद करता है, जो हर युवा क्रिकेटर को हासिल करना चाहिए।

जियोहॉटस्टार के 'चैंपियंस वाली कमेंट्री' के विशेषज्ञ पुजारा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वैभव एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो टी20 क्रिकेट में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें भारतीय टीम में जरूर मौका मिलेगा। वह टेस्ट क्रिकेट खेलेंगे या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। अगर उनमें क्षमता, मौका, समय है और वह अपना खेल अच्छे से खेल सकते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए, क्योंकि आपका धैर्य, आपकी क्षमता और जिस सम्मान की आप बात कर रहे हैं, वह टेस्ट क्रिकेट से ही आता है। इसलिए, हर युवा खिलाड़ी के मन में टेस्ट क्रिकेट का ख्याल जरूर होना चाहिए।
 

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पुजारा ने कहा कि हालांकि टेस्ट क्रिकेट क्रिकेट का सर्वोच्च प्रारूप है, लेकिन श्वेत गेंद के विशेषज्ञ खिलाड़ी अन्य प्रारूपों में भी सफल होने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वैभव सूर्यवंशी और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों का उपयोग उनकी क्षमताओं के अनुसार किया जाना चाहिए, और विभिन्न प्रारूपों के लिए अलग-अलग खिलाड़ी होने के विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि टेस्ट क्रिकेट क्रिकेट का सर्वोच्च प्रारूप है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि श्वेत गेंद के विशेषज्ञ खिलाड़ियों में वह क्षमता नहीं होती। अगर वैभव (सूर्यवंशी) और श्रेयस अय्यर जैसे श्वेत गेंद के विशेषज्ञ खिलाड़ी हैं, तो उन्हें उसी प्रारूप में खेलना चाहिए। विभिन्न प्रारूपों के लिए अलग-अलग खिलाड़ी होने चाहिए।
Thu, 07 May 2026 16:07:20 +0530

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