भारतीय पत्रकारों ने साइबर अपराध का पर्दाफाश करने के लिए प्रतिष्ठित अमेरिकी पुरस्कार जीता
न्यूयॉर्क, 5 मई (आईएएनएस)। दो भारतीय पत्रकारों ने भारत में साइबर अपराध को उजागर करने वाली एक खोजी रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है।
आनंद आरके और सुपना शर्मा को नैटली ओबिको पियर्सन के साथ सोमवार को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री’ श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई उनकी रिपोर्ट के लिए मिला।
एक और भारतीय पत्रकार देवज्योत घोषाल इसी श्रेणी में फाइनलिस्ट रहे। उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध और मानव तस्करी का खुलासा किया था। इस काम में अपराधी भारत समेत कई देशों के लोगों को फंसाकर कैंपों में कैद कर लेते हैं और उनसे दूसरे देशों के लोगों के साथ धोखाधड़ी करवाते हैं। वे बैंकॉक में रहते हैं।
हनोई में रहने वाले रिपोर्टर अनिरुद्ध घोषाल ने ‘इंटरनेशनल रिपोर्टिंग’ श्रेणी में पुरस्कार जीता। उन्होंने अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों की जांच की थी। ये उपकरण पहले सिलिकॉन वैली में बनाए गए थे और बाद में चीन में और विकसित किए गए।
इस रिपोर्ट सीरीज में यह भी बताया गया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमेरिका के सबसे बड़े पत्रकारिता पुरस्कार, पुलित्जर पुरस्कारों का संचालन यहां कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया जाता है।
ब्लूमबर्ग की यह सचित्र रिपोर्ट लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन की दिल दहला देने वाली कहानी है। साइबर अपराधियों ने खुद को अधिकारी बताकर उन्हें छह दिनों तक ‘नजरबंद’ जैसा रखा और उनके बैंक खातों से 2.8 करोड़ रुपये ठग लिए।
पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा में कहा गया कि इस रिपोर्ट ने निगरानी और डिजिटल ठगी जैसी बढ़ती वैश्विक समस्याओं को उजागर किया।
आनंद मुंबई के एक इलस्ट्रेटर और विज़ुअल आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं। वहीं, सुपना शर्मा भारत में एक फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं।
--आईएएनएस
एसएचके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
घुटनों में दर्द, अकड़न और कमजोरी को दूर करने में कारगर 'नी मूवमेंट', आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। आजकल घुटनों का दर्द, कूल्हों में अकड़न और शरीर के निचले हिस्से की कमजोरी आम समस्या बन गई है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ या कम शारीरिक गतिविधि के कारण ये परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय, इन समस्याओं को दूर करने में कारगर नी मूवमेंट नामक आसान व्यायाम के अभ्यास की सलाह देता है।
विश्व योग दिवस में कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार योगासन व उसके फायदों से अवगत करा रहा है। इसी कड़ी में मंत्रालय घुटनों की मूवमेंट के बारे में जानकारी देते हुए इसके रोजाना अभ्यास की सलाह देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से न केवल दर्द में राहत मिलती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। यह व्यायाम खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें लंबे समय तक बैठे रहने या कम चलने-फिरने की आदत है। शुरुआत में धीरे-धीरे करें और अगर तेज दर्द हो तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
यह अभ्यास जोड़ों को मजबूत बनाता है और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाता है। घुटनों की सरल गति के व्यायाम करने से जोड़ों की मजबूती और गतिशीलता बढ़ती है। साथ ही, घुटनों और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई बढ़ती है, लचीलापन आता है और दर्द व अकड़न कम होती है। इसके नियमित अभ्यास से चलने, बैठने, खड़े होने और सीढ़ियां चढ़ने जैसी सामान्य गतिविधियां बिना परेशानी के की जा सकती हैं।
नी मूवमेंट के अभ्यास से जोड़ों की कमजोरी दूर व कूल्हों और घुटनों की अकड़न कम होती है। शरीर के निचले हिस्से में स्थिरता और संतुलन बढ़ाता और मुद्रा सुधारकर समन्वय बेहतर करता है। चोट या खिंचाव का जोखिम घटाता है। गति की सीमा बढ़ाता है और लंबे समय तक स्थायी राहत देता है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, घुटनों में दर्द और अस्थिरता अक्सर जोड़ों के कम उपयोग या कमजोरी के संकेत होते हैं। नी मूवमेंट जैसे आसान अभ्यास इन समस्याओं का प्राकृतिक समाधान है। यह व्यायाम बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से किया जा सकता है। उचित तरीके से करने पर धीरे-धीरे जोड़ों की गति बढ़ती है और शरीर मजबूत होता है।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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