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घुटनों में दर्द, अकड़न और कमजोरी को दूर करने में कारगर 'नी मूवमेंट', आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। आजकल घुटनों का दर्द, कूल्हों में अकड़न और शरीर के निचले हिस्से की कमजोरी आम समस्या बन गई है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ या कम शारीरिक गतिविधि के कारण ये परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय, इन समस्याओं को दूर करने में कारगर नी मूवमेंट नामक आसान व्यायाम के अभ्यास की सलाह देता है।

विश्व योग दिवस में कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार योगासन व उसके फायदों से अवगत करा रहा है। इसी कड़ी में मंत्रालय घुटनों की मूवमेंट के बारे में जानकारी देते हुए इसके रोजाना अभ्यास की सलाह देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से न केवल दर्द में राहत मिलती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। यह व्यायाम खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें लंबे समय तक बैठे रहने या कम चलने-फिरने की आदत है। शुरुआत में धीरे-धीरे करें और अगर तेज दर्द हो तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

यह अभ्यास जोड़ों को मजबूत बनाता है और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाता है। घुटनों की सरल गति के व्यायाम करने से जोड़ों की मजबूती और गतिशीलता बढ़ती है। साथ ही, घुटनों और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई बढ़ती है, लचीलापन आता है और दर्द व अकड़न कम होती है। इसके नियमित अभ्यास से चलने, बैठने, खड़े होने और सीढ़ियां चढ़ने जैसी सामान्य गतिविधियां बिना परेशानी के की जा सकती हैं।

नी मूवमेंट के अभ्यास से जोड़ों की कमजोरी दूर व कूल्हों और घुटनों की अकड़न कम होती है। शरीर के निचले हिस्से में स्थिरता और संतुलन बढ़ाता और मुद्रा सुधारकर समन्वय बेहतर करता है। चोट या खिंचाव का जोखिम घटाता है। गति की सीमा बढ़ाता है और लंबे समय तक स्थायी राहत देता है।

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, घुटनों में दर्द और अस्थिरता अक्सर जोड़ों के कम उपयोग या कमजोरी के संकेत होते हैं। नी मूवमेंट जैसे आसान अभ्यास इन समस्याओं का प्राकृतिक समाधान है। यह व्यायाम बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से किया जा सकता है। उचित तरीके से करने पर धीरे-धीरे जोड़ों की गति बढ़ती है और शरीर मजबूत होता है।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सैन्य कार्रवाई राजनीतिक संकट का समाधान नहीं है: अराघची ने अमेरिका और यूएई को दी चेतावनी

तेहरान, 5 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों के ट्रांजिट के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम की शुरुआत की। अमेरिका के इस मिशन को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट फ्रीडम ही प्रोजेक्ट डेडलॉक है। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी देते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई किसी भी राजनीतिक संकट का हल नहीं है।

अमेरिका और यूएई को चेतावनी देते हुए अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, होर्मुज की घटनाओं से यह साफ हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। पाकिस्तान की अच्छी कोशिश से बातचीत आगे बढ़ रही है। इसलिए अमेरिका को इस बात से सावधान रहना चाहिए कि उसके दुश्मन उसे फिर से दलदल में न घसीट लें। संयुक्त अरब अमीरात को भी ऐसा ही करना चाहिए। प्रोजेक्ट फ्रीडम ही प्रोजेक्ट डेडलॉक है।

इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बताने से मना कर दिया कि यूएस और ईरान के बीच हुआ सीजफायर जारी रहेगा या नहीं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यूग हेविट ने जब पूछा कि क्या ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है और क्या सोमवार रात से हमले फिर से शुरू हो सकते हैं, तो ट्रंप ने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता।”

फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरानी सेना को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने स्ट्रेट या फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की तो वे धरती से मिट जाएंगे। बाद में इंटरव्यू में उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ युद्ध, मिलिट्री तौर पर, असल में खत्म हो चुका है।

वहीं डेनमार्क की शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनी मेर्सक ने सोमवार को कंफर्म किया कि उसका एक जहाज अमेरिकी मिलिट्री प्रोटेक्शन के साथ होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा और उसके सभी क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। लॉजिस्टिक्स कंपनी मेर्सक के एक बयान के मुताबिक, फरवरी में जब युद्ध शुरू हुआ, तब अलायंस फेयरफैक्स नाम का यह जहाज फारस की खाड़ी में था और जाने में असमर्थ था।

मेर्सक ने कहा कि अमेरिकी सेना ने हाल ही में उनसे संपर्क किया था। इसकी वजह से जहाज को अमेरिकी सेना की सुरक्षा में खाड़ी से बाहर निकलने का मौका मिला। मेर्सक के बयान के आखिर में कहा गया, “मेर्सक इस ऑपरेशन को मुमकिन बनाने में अमेरिकी सेना के प्रोफेशनलिज्म और असरदार सहयोग के लिए उनका शुक्रिया अदा करता है और कंपनी अलायंस फेयरफैक्स के अपनी नॉर्मल कमर्शियल सर्विस पर लौटने का इंतजार कर रही है।”

--आईएएनएस

केके/एएस

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