कौन थे Raja Ravi Varma? जिनकी पेंटिंग्स से सजी ड्रेस पहने Met Gala 2026 में पहुंचे करण जौहर
Met Gala 2026 Karan Johar Look: दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट्स में से एक मेट गाला 2026 की शुरुआत हो चुकी है. 4 मई की शाम मेट्रोपॉलिन म्यूजियम ऑफ आर्ट में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में भारतीय सितारे भी एक से बढ़कर एक लुक अपनाकर पहुंचे. जिनमें से फिल्म डायरेक्टर करण जौहर के लुक ने पूरी लाइमलाइट लूट ली. करण का ये मेट गाला डेब्यू था और वो राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स से सजी ड्रेस पहने पहुंचे. तो चलिए जानते हैं, उनके इस पूरे लुक के बारे में-
करण जौहर का मेट गाला लुक
करण जौहर जब मेट गाला के रेड कार्पेट पर आए, तो हर कोई बस उन्हें देखता ही रह गया. उनका लुक भारतीय पेंटिंग्स और कहानियों से जुड़ा था. ऐसा लग रहा था जैसे कोई पेंटिंग खुद चलकर दुनिया के सामने आ गई हो. इस ड्रेस को मनीष मल्होत्रा (Manish Malhotra) ने डिजाइन किया था, जिसमें एक बहुत ही बड़ा और ड्रामैटिक केप था. इस केप पर राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) की मशहूर पेंटिंग्स के सीन बने हुए थे.काले और गोल्डेन रंग की इस ड्रेस में करण एकदम शाही लग रहे थे.
कौन थे राजा रवि वर्मा?
राजा रवि वर्मा 19वीं सदी (1848–1906) के एक बहुत बड़े कलाकार थे. उन्होंने रामायण और महाभारत के सीन, देवी-देवताओं और राजघरानों की शानदार पेंटिंग्स बनाई थीं. उनकी सबसे बड़ी खूबी ये थी कि उन्होंने यूरोप की पेंटिंग तकनीक को भारतीय विषयों पर इस्तेमाल किया था. उनकी इसी अनोखी कला को करण जौहर ने मेट गाला पर फिर से जिंदा किया. डायरेक्टर के ड्रेस में रवि वर्मा की मशहूर पेंटिंग्स जैसे हंस दमयंती, कदंबरी, अर्जुन और सुभद्रा के एसेंस को जोड़ा गया था.
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करण ने मनीष मल्होत्रा का जताया आभार
मेट गाला में अपने डेब्यू की तस्वीरें करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर शेयर की. उन्होंने लिखा- 'राजा रवि वर्मा की कला से प्रेरित मेरा लुक. राजा रवि वर्मा से अपने लुक की इंस्पिरेशन ली क्योंकि उनकी कला ने वो किया है जो मैं सिनेमा में हमेशा करने की कोशिश करता हूं. वे फीलिंग्स को पेंट करते थे. ऐसा करने में मेरे सबसे पुराने पार्टनर इन क्राइम मनीष मल्होत्रा से बेहतर कोई और चॉइस नहीं हो सकती थी. हमारे इंडियन कल्चर को ग्लोबल लेवल पर कोट्यूर (हाई-एंड फैशन) के साथ लेकर जाना खुद में एक कला है. आपने मुझे अपनी कला के लिए एक 'कैनवस' जैसा महसूस कराया, बहुत शुक्रिया.'
ग्लोबल मंच पर दिखाई भारतीय संस्कृति
करण जौहर ने एक दूसरे पोस्ट में बताया कि उन्होंने भारतीय संस्कृति को ग्लोबल मंच पर दिखाया. डायरेक्टर ने लिखा- 'सिनेमा और कॉस्ट्यूम से प्यार करने और बड़े सपने देखने से, 'द मेट गाला' की सीढ़ियों पर खड़े होने तक,जिंदगी सच में एक सर्कल की तरह है, जो आपको कई बार सरप्राइज करती है. मेरे लिए ये पल सिर्फ फैशन के बारे में नहीं था. ये स्टोरीटेलिंग जैसा था. राजा रवि वर्मा की विरासत को आगे बढ़ाने और उसे फिर से जीवंत करने के बारे में था. भारत और हमारी संस्कृति, हमारी कला और हमारी कहानी कहने के अंदाज को ग्लोबल मंच पर दिखाने के बारे में था.'
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डच क्रूज शिप पर हंटावायरस के दूसरे मामले की पुष्टि, कुल संक्रमित लोगों की संख्या दो हुई
हेग, 5 मई (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पुष्टि की है कि अटलांटिक महासागर में एक जहाज पर हंटावायरस संक्रमण का दूसरा मामला मिला है। इसके साथ ही जहाज पर कुल संक्रमित लोगों की संख्या दो हो गई है। यह जानकारी डच क्रूज़ शिप ऑपरेटर ओशनवाइड एक्सपीडिशंस ने एक बयान में दी।
कंपनी के अनुसार, नया मामला एक डच महिला यात्री का है, जिसकी 27 अप्रैल को मौत हो गई। इससे पहले एक डच दंपत्ति और एक जर्मन नागरिक की भी मौत हो चुकी है। इसके अलावा जहाज के दो क्रू सदस्य बीमार हैं। करीब 150 लोग अभी भी जहाज पर मौजूद हैं। एक और संक्रमित यात्री, जो ब्रिटेन का नागरिक है, जहाज छोड़कर दक्षिण अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में आईसीयू में इलाज करा रहा है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने बताया कि जहाज पर दो क्रू सदस्य अभी भी सांस से जुड़ी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें एक की हालत हल्की और दूसरे की ज्यादा गंभीर है। दोनों को तुरंत इलाज की जरूरत है। ये दोनों क्रू सदस्य ब्रिटेन और नीदरलैंड के नागरिक हैं। अभी तक किसी और में लक्षण नहीं मिले हैं।
हंटावायरस ऐसे वायरसों का समूह है, जो आमतौर पर चूहों जैसे रोडेन्ट्स में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित चूहों या उनके पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से फैलता है। इंसान से इंसान में इसका फैलना बहुत कम होता है।
यह वायरस तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार को छूता है या उनसे दूषित सतह के संपर्क में आता है। अक्सर यह तब होता है जब लोग ऐसे स्थानों की सफाई करते हैं, जहां चूहों का ज्यादा प्रकोप होता है। गांवों, जंगलों, खेतों और फार्म जैसे इलाकों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि वहां चूहों की संख्या अधिक होती है।
हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से होने वाली बीमारी (एचपीएस) में शुरुआत में सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके साथ ही उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और पेट दर्द जैसी पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। बाद में अचानक सांस लेने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।
इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 4 हफ्ते बाद दिखते हैं। हालांकि कुछ मामलों में यह लक्षण एक हफ्ते के भीतर भी आ सकते हैं, जबकि कभी-कभी 8 हफ्ते बाद तक भी सामने आ सकते हैं।
--आईएएनएस
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