कैरिबियाई दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ज्यूरिख एयरपोर्ट पर स्वागत
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी कैरिबियाई यात्रा के दौरान ज्यूरिख हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इंडिया-स्विट्जरलैंड के प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास ने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कैरिबियाई देशों की अपनी आधिकारिक यात्रा के मार्ग में ज्यूरिख हवाई अड्डे पर इंडिया-स्विट्जरलैंड के मिन (कॉम) अनूप ढींगरा ने हार्दिक स्वागत किया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो से दस मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर हैं। जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो भी कैरिबियन समुदाय के सदस्य देश हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान जयशंकर इन तीनों देशों के नेताओं से मिलेंगे और अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिनमें दोनों पक्षों की रुचि है।
मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और इन देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगी, लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना रिश्तों को आगे बढ़ाएगी और दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विकास को भी बढ़ावा देगी।
विदेश मंत्री इन देशों में व्यापार जगत के प्रमुख लोगों और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और बातचीत करेंगे।
जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे कैरिबियाई देशों का भारत से खास संबंध है, क्योंकि यहां गिरमिटिया समुदाय के लोग रहते हैं।
‘गिरमिटिया’ वे भारतीय मजदूर थे, जो 19वीं सदी के मध्य और अंत में ब्रिटिश काल के दौरान काम करने के लिए भारत से दूसरे देशों में गए थे। बाद में उनमें से कई लोग वहीं बस गए। ‘गिरमिट’ शब्द ‘एग्रीमेंट’ (समझौते) का गलत उच्चारण है, जो उनके काम के अनुबंध के लिए इस्तेमाल होता था।
पिछले महीने भी जयशंकर ने भारत में सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग के खुलने का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।
उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और सेंट किट्स और नेविस दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस में उस देश की सक्रिय भागीदारी की सराहना भी की थी।
जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस को इस साल जनवरी में कैरिकॉम की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी थी और भारत तथा कैरिकॉम देशों के बीच मजबूत रिश्तों की सराहना की थी।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गारंटी योजनाओं से कर्नाटक की वित्तीय स्थिति पर दबाव, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विजयेंद्र का आरोप
बेंगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने शनिवार को राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि इन योजनाओं के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर भी चिंता जताई।
विजयेंद्र ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अप्रैल 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि “अवैज्ञानिक वित्तीय प्रबंधन” के कारण राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा है, जबकि राज्य 0.7 प्रतिशत के राजस्व घाटे का सामना कर रहा है। उन्होंने इस स्थिति को “चिंताजनक” बताया।
एक बयान में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा कर्नाटक सरकार को दी गई चेतावनी अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है, क्योंकि राज्य का वित्तीय प्रबंधन सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा, “गारंटी योजनाओं और अन्य लोकलुभावन कार्यक्रमों के राजनीतिकरण के कारण राज्य में विकास कार्यों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए धन नहीं बचा है।”
भाजपा नेता ने दावा किया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि कर्नाटक समेत वे राज्य, जहां राजस्व घाटा है, गंभीर वित्तीय दबाव में हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर “प्रतिस्पर्धी लोकलुभावन राजनीति” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गारंटी योजनाओं के पीछे राजनीतिक लाभ की सोच रही, जिसके कारण विकास और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए धन की कमी हो गई है।
विजयेंद्र ने चेतावनी दी कि राज्य सरकार संभावित वित्तीय संकट और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता खोती जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति के लिए राज्य के खजाने को खाली करना और आने वाली पीढ़ियों को कर्ज के जाल में धकेलना उचित नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर कर्नाटक के हित में राज्य की वित्तीय स्थिरता बहाल करने पर ध्यान देने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अप्रैल 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इसमें कर्नाटक समेत नौ राज्यों के राजस्व घाटे और बढ़ते कर्ज बोझ को लेकर चिंता जताई गई है तथा भविष्य में आर्थिक संकट की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि, केंद्र ने राज्यों को भेजे अपने लिखित संदेश में सीधे तौर पर गारंटी योजनाओं को राजस्व कमी और बढ़ते कर्ज का कारण नहीं बताया, लेकिन ऐसी योजनाओं से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर कई बार आगाह किया है।
--आईएएनएस
डीएससी
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