गारंटी योजनाओं से कर्नाटक की वित्तीय स्थिति पर दबाव, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विजयेंद्र का आरोप
बेंगलुरु, 2 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने शनिवार को राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि इन योजनाओं के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर भी चिंता जताई।
विजयेंद्र ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अप्रैल 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि “अवैज्ञानिक वित्तीय प्रबंधन” के कारण राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा है, जबकि राज्य 0.7 प्रतिशत के राजस्व घाटे का सामना कर रहा है। उन्होंने इस स्थिति को “चिंताजनक” बताया।
एक बयान में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा कर्नाटक सरकार को दी गई चेतावनी अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है, क्योंकि राज्य का वित्तीय प्रबंधन सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा, “गारंटी योजनाओं और अन्य लोकलुभावन कार्यक्रमों के राजनीतिकरण के कारण राज्य में विकास कार्यों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए धन नहीं बचा है।”
भाजपा नेता ने दावा किया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि कर्नाटक समेत वे राज्य, जहां राजस्व घाटा है, गंभीर वित्तीय दबाव में हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर “प्रतिस्पर्धी लोकलुभावन राजनीति” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गारंटी योजनाओं के पीछे राजनीतिक लाभ की सोच रही, जिसके कारण विकास और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए धन की कमी हो गई है।
विजयेंद्र ने चेतावनी दी कि राज्य सरकार संभावित वित्तीय संकट और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता खोती जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति के लिए राज्य के खजाने को खाली करना और आने वाली पीढ़ियों को कर्ज के जाल में धकेलना उचित नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर कर्नाटक के हित में राज्य की वित्तीय स्थिरता बहाल करने पर ध्यान देने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अप्रैल 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इसमें कर्नाटक समेत नौ राज्यों के राजस्व घाटे और बढ़ते कर्ज बोझ को लेकर चिंता जताई गई है तथा भविष्य में आर्थिक संकट की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि, केंद्र ने राज्यों को भेजे अपने लिखित संदेश में सीधे तौर पर गारंटी योजनाओं को राजस्व कमी और बढ़ते कर्ज का कारण नहीं बताया, लेकिन ऐसी योजनाओं से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर कई बार आगाह किया है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान: मानवाधिकार वकीलों की अपील सुनवाई में देरी पर अधिकार संगठन चिंतित
इस्लामाबाद, 2 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी-पाकिस्तान) ने शनिवार को सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से मानवाधिकार वकील ईमान ज़ैनब मजारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा के कानूनी अधिकारों की तत्काल रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। परिषद ने चेतावनी दी कि उनकी अपीलों की सुनवाई में लंबी देरी निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कानून के शासन को कमजोर कर सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईमान और उनके पति हादी ने गुरुवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सजा के खिलाफ अपीलों की जल्द सुनवाई की मांग की है। यह मामला सोशल मीडिया पोस्ट्स से जुड़े प्रकरण में प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (पीईसीए) के तहत दर्ज हुआ था।
अधिकार संगठन ने दोनों वकीलों को न्याय मिलने में हो रही असाधारण देरी पर चिंता जताई। परिषद ने कहा कि दोनों ने पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए मजबूती से आवाज उठाई है।
एचआरसी-पाकिस्तान ने कहा, “यह खेदजनक है कि सजा सुनाए जाने के 100 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सुनवाई के लिए कोई पीठ गठित नहीं की गई है और न ही उनकी अपीलों पर कोई प्रगति हुई है। पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 10-ए के तहत प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देना राज्य की मूल जिम्मेदारी है।”
संगठन ने कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा व्यवहार न केवल कानून के शासन पर सवाल उठाता है, बल्कि मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों का मनोबल तोड़ने जैसा है।
न्याय में देरी को न्याय से वंचित करने के समान बताते हुए परिषद ने पाकिस्तान की उच्च न्यायपालिका से मामले का तत्काल संज्ञान लेने, नियमित पीठ गठित करने और न्याय की सभी शर्तें पूरी करते हुए कानूनी राहत देने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में ईमान और हादी ने 17 फरवरी को इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति मांगी है। फरवरी में आईएचसी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील स्वीकार कर ली थी और सजा निलंबन याचिका पर नोटिस जारी किया था, लेकिन सजा पर रोक नहीं लगाई थी।
नई याचिका में दोनों वकीलों ने अपीलों की सुनवाई 4 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में तय करने का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि अपील स्वीकार की जाए और आईएचसी में लंबित आपराधिक अपील के अंतिम निस्तारण तक विवादित फैसले के तहत दी गई सजा पर रोक लगाई जाए।
जनवरी में इस्लामाबाद की एक सत्र अदालत ने सोशल मीडिया पोस्ट्स से जुड़े मामले में ईमान और उनके पति हादी को कुल 17 वर्ष की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 3.6 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
दोनों मानवाधिकार वकीलों की गिरफ्तारी और सजा की दुनिया भर में व्यापक आलोचना हुई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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