नई दिल्ली: स्वास्थ्य भविष्य को लेकर दो दिवसीय सम्मेलन में डिजिटल हेल्थ सर्विस के विस्तार पर जोर
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। “नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का समापन शुक्रवार को तकनीकी विचार-विमर्श और निष्कर्षों की समीक्षा के साथ हुआ। सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन 17वें कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की गई। यह मिशन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के स्वतंत्र और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रणाली माना जाता है।
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने-अपने क्षेत्रों में लागू की गई सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों के उपयोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार तथा गैर-संचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन जैसे विषय शामिल थे। इन सत्रों ने राज्यों के बीच आपसी सीख और अनुभव साझा करने का एक उपयोगी मंच प्रदान किया।
इसके साथ ही, मंत्रालय की ओर से नई और चल रही स्वास्थ्य पहलों पर भी विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। इनका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद करना था।
शुक्रवार को दूसरे दिन हुए तकनीकी सत्रों में सीआरएम के दौरान 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त निष्कर्षों पर गहन चर्चा की गई। इन निष्कर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सेवा वितरण की स्थिति और शासन प्रणाली की कार्यप्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। रिपोर्ट में कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति भी देखी गई, जिसमें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का संचालन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपनाने में वृद्धि शामिल है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गैर-संचारी रोगों की पहचान और उपचार तथा टेली-परामर्श सेवाओं के उपयोग में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। हालांकि, चर्चाओं में उन क्षेत्रों जैसे मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग, आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच की भी पहचान की गई, जहां और सुधार की आवश्यकता है।
बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डाटा की गुणवत्ता सुधारने और रियल टाइम निगरानी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही रेफरल सिस्टम को बेहतर बनाने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि इन प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होगा।
समापन सत्र में अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक (एनएचएम) आराधना पटनायक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब ध्यान अल्पकालिक लक्ष्यों से आगे बढ़ाकर मध्यम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लक्ष्यों पर केंद्रित करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी योजनाओं को 2030 तक के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया और कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी लाभार्थी, विशेषकर कमजोर वर्गों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके अलावा उन्होंने बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन को भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया और इस दिशा में सुधार की जरूरत पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सीआरएम टीमों के कार्य की सराहना की और कहा कि उनके प्रयासों से स्वास्थ्य प्रणाली के सुधार में महत्वपूर्ण मदद मिली है। सम्मेलन का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि राज्यों के बीच सहयोग, नवाचार और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को आगे भी लगातार मजबूत किया जाएगा, ताकि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बन सके।
--आईएएनएस
एसएचके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
टाइप-2 डायबिटीज से संभव है बचाव, अपनाएं ये 4 आसान उपाय
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। आज के समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने टाइप 2 डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं से बचाव के लिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है।
संगठन का कहना है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इस गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि यदि लोग इन सरल उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों को रोका जा सकता है। जागरूकता और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात है शरीर का वजन संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है, इसलिए नियमित रूप से अपने वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी उतना ही अहम है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित व्यायाम शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
खानपान की भूमिका भी डायबिटीज की रोकथाम में बेहद महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों।
वहीं, अधिक चीनी और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि ये शरीर में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, तंबाकू का सेवन भी डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं के खतरे को बढ़ाता है। इसलिए लोगों को तंबाकू से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी गई है। तंबाकू छोड़ने से न केवल डायबिटीज का खतरा कम होता है, बल्कि दिल और फेफड़ों की सेहत भी बेहतर रहती है।
--आईएएनएस
एमटी/एबीएम
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