टाइप-2 डायबिटीज से संभव है बचाव, अपनाएं ये 4 आसान उपाय
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। आज के समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने टाइप 2 डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं से बचाव के लिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है।
संगठन का कहना है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इस गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि यदि लोग इन सरल उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों को रोका जा सकता है। जागरूकता और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात है शरीर का वजन संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है, इसलिए नियमित रूप से अपने वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी उतना ही अहम है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित व्यायाम शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
खानपान की भूमिका भी डायबिटीज की रोकथाम में बेहद महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों।
वहीं, अधिक चीनी और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि ये शरीर में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, तंबाकू का सेवन भी डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं के खतरे को बढ़ाता है। इसलिए लोगों को तंबाकू से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी गई है। तंबाकू छोड़ने से न केवल डायबिटीज का खतरा कम होता है, बल्कि दिल और फेफड़ों की सेहत भी बेहतर रहती है।
--आईएएनएस
एमटी/एबीएम
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बारामती पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान, परिवार और चुनाव को लेकर कह दी बड़ी बात
महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ तब आया जब सुप्रिया सुले ने बारामती सीट को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगी. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में पारिवारिक और राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं.
बारामती: पवार परिवार का राजनीतिक गढ़
बारामती लंबे समय से पवार परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार रहा है. इस सीट पर कई बार परिवार के सदस्यों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला है, जिससे राजनीति और रिश्तों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है. ऐसे में सुप्रिया सुले का यह बयान काफी मायने रखता है.
अजित पवार गुट की प्रतिक्रिया
इस बयान पर सुनेत्रा पवार से प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली. वहीं, अदिति तटकरे ने सुप्रिया सुले के रुख का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि राजनीति और परिवार को अलग-अलग रखना चाहिए और परिवार की एकता सबसे महत्वपूर्ण है. उनके इस बयान को सियासी सौहार्द का संकेत माना जा रहा है.
परिवार के भीतर चुनावी मुकाबले का इतिहास
बारामती में हाल के वर्षों में परिवार के भीतर ही चुनावी टकराव देखने को मिला है. अजित पवार ने विधानसभा चुनाव में अपने ही रिश्तेदार युगेंद्र पवार को हराया था. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले का मुकाबला सुनेत्रा पवार से हुआ था, जिसमें उन्होंने बड़ी जीत हासिल की थी.
इन घटनाओं ने यह साफ किया कि बारामती की राजनीति में पारिवारिक रिश्ते भी चुनावी प्रतिस्पर्धा से अछूते नहीं रहे हैं.
क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
सुप्रिया सुले का यह बयान आने वाले चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि वह परिवार में राजनीतिक टकराव से बचना चाहती हैं और एक संतुलित राजनीति की ओर बढ़ रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि मतदाताओं के बीच भी सकारात्मक संदेश देगा.
सुप्रिया सुले का यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया संदेश देता है, जहां परिवार और राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखती है. बारामती जैसे अहम क्षेत्र में यह फैसला भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
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