देश में 4.7 लाख गाड़ियां बिकीं,पिछले साल से 33% ज्यादा:मारुति-हुंडई की एक महीने में रिकॉर्ड सेल; कम ब्याज दर और टैक्स राहत से मांग बढ़ी
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपनी मंथली सेल्स रिपोर्ट जारी कर दी है। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में कारों की बिक्री जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस दौरान गाड़ियों की कुल बिक्री करीब 4.7 लाख यूनिट्स रहने का अनुमान है। पिछले साल जुलाई में यह आंकड़ा लगभग 3.5 लाख यूनिट्स था। इस तरह पूरे ओवरऑल मार्केट ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 33% की मजबूत ग्रोथ हासिल की है। मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया की ऑल-टाइम हाई बिक्री के दम पर पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री ने यह रिकॉर्ड ग्रोथ हासिल की है। कारों की बिक्री बढ़ने की वजहें मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी के अनुसार, इस ग्रोथ के पीछे 3 बड़े कारण रहे हैं... मारुति सुजुकी: रिकॉर्ड 1.96 लाख यूनिट्स की बिक्री मार्केट लीडर मारुति सुजुकी ने जुलाई महीने में देशभर में अपनी अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की है। कंपनी ने कुल 1,96,203 यूनिट्स बेचीं, जो जुलाई 2025 में बेची गई 1,37,776 यूनिट्स के मुकाबले 43.4% अधिक है। पार्थो बनर्जी ने बताया कि कंपनी को एंट्री-लेवल स्मॉल कार से लेकर SUV तक, सभी सेगमेंट्स में ऑल-राउंड ग्रोथ मिली है। इसके अलावा, अल्टरनेट फ्यूल यानी CNG मॉडल्स की डिमांड भी काफी मजबूत बनी हुई है। हुंडई: अब तक की सबसे ज्यादा मंथली सेल्स हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने भी अब तक की सबसे बेस्ट डोमेस्टिक मंथली सेल्स रिपोर्ट दर्ज की है। कंपनी ने जुलाई में 54,210 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 23.3% ज्यादा है। कंपनी के MD और CEO तरुण गर्ग ने कहा, "शुरुआत से लेकर अब तक का हमारा यह सबसे अधिक मंथली वॉल्यूम है। यह हुंडई ब्रांड पर ग्राहकों के अटूट विश्वास को दर्शाता है।" टाटा की सेल्स 58% और महिंद्रा 20% चढ़ी भारतीय कंपनियों ने भी डबल डिजिट में तगड़ी ग्रोथ की है। अन्य प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन
Vitamin Deficiency से हो सकती है Insomnia की समस्या, जानिए नींद और विटामिन्स का कनेक्शन
शरीर में पोषक तत्वों की अनदेखी नींद के चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया अध्ययनों के अनुसार, विटामिन डी, बी12, बी6 और फोलेट (विटामिन बी9) की कमी के चलते लोगों को अनिद्रा और बेचैन नींद की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मस्तिष्क में नींद को नियंत्रित करने वाले प्रमुख हार्मोन मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का निर्माण इन विटामिन्स पर निर्भर करता है।
शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि विटामिन डी का सीधा संबंध मस्तिष्क के उन हिस्सों से है जो सोने और जागने की प्रक्रिया को संचालित करते हैं। इसकी कमी होने से व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है और नींद की गुणवत्ता खराब होती है। इसके अलावा, न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम विटामिन बी12 का कम स्तर शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को बिगाड़ देता है, जिससे रात में सोने में देरी और दिन के समय अत्यधिक आलस महसूस होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन बी6 शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से व्यक्ति को बिस्तर पर लेटने के बाद भी काफी देर तक नींद नहीं आती। बुजुर्गों पर किए गए अध्ययनों में भी देखा गया है कि कम बी6 वाले लोगों में नींद से जुड़ी शिकायतें अधिक पाई गईं। इसी तरह, फोलेट यानी विटामिन बी9 मस्तिष्क की कोशिकाओं के बेहतर संचालन और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बनाए रखता है, जिसकी कमी से रातभर करवटें बदलने की नौबत आ जाती है।
इस प्रकार की पोषण संबंधी कमियों से बचाव के लिए आहार विशेषज्ञ संतुलित भोजन को प्राथमिक उपाय बताते हैं। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पाद, अंडे और मेवे शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, विटामिन डी के प्राकृतिक स्रोत के रूप में रोजाना सुबह 15 से 30 मिनट धूप में बिताना फायदेमंद माना गया है। यदि जीवनशैली और आहार में बदलाव के बावजूद नींद न आने की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टरों द्वारा ब्लड टेस्ट कराकर चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर ही सप्लीमेंट्स लेने की हिदायत दी जाती है।
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