अफगानिस्तान: कुनार यूनिवर्सिटी पर पाकिस्तानी हमले में 30 लोग घायल, उच्च शिक्षा मंत्रालय ने की निंदा
काबुल, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने कुनार प्रांत में सैयद जमालुद्दीन अफगान यूनिवर्सिटी पर पाकिस्तानी मिसाइल हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस हमले में करीब 30 छात्र और प्रोफेसर घायल हो गए, जबकि यूनिवर्सिटी परिसर को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
हमले के बाद सोमवार को जारी एक बयान में, मंत्रालय ने इसे “कायरतापूर्ण, बेरहम और सभी इस्लामिक और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के खिलाफ” बताया।
इस हमले को शिक्षा और अफगानिस्तान की बुनियादी नींव पर हमला बताते हुए, मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से इस “बेरहम कार्रवाई” के सामने खामोश न रहने की अपील की।
बयान में आगे कहा गया कि अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री शेख नेदा मोहम्मद नदीम ने अधिकारियों से घायलों का तुरंत इलाज और देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया।
मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि वह देश के शैक्षिक केंद्रों, खासकर विश्वविद्यालयों और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल करेगा।
इस बीच, एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने कुनार की राजधानी असदाबाद में पाकिस्तानी सैन्य हमलों में आम लोगों को पहुंचे नुकसान की खबरों पर गहरी चिंता जताई है।
स्थानीय सोर्स का हवाला देते हुए, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने कहा कि सोमवार दोपहर को हुए हमलों में रिहायशी इलाकों के साथ-साथ सैयद जमालुद्दीन अफगान यूनिवर्सिटी भी शामिल थी। इन हमलों में काफी संख्या में आम लोगों की मौत हुई और करीब 48 लोग घायल हुए।
ह्यूमन राइट्स संस्था ने कहा कि स्थानीय मेडिकल केंद्रों से मिली रिपोर्ट से पता चला है कि कई घायलों को यहां लाया गया और कुछ शव भी पहुंचाए गए।
आईएचआरएफ ने एक छात्र के हवाले से बताया कि हमले के वक्त क्लास चल रही थी। उसने कहा कि ऐसी बातें सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।
ह्यूमन राइट्स संस्था ने कहा, यह घटना कुनार प्रांत में सीमा पार हिंसा के एक परेशान करने वाले पैटर्न को दिखाती है, जहां पिछले हमलों में कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों की मौत हुई है और जरूरी सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है।
इसमें आगे कहा गया, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत, किसी भी लड़ाई में शामिल सभी पार्टियों की यह जिम्मेदारी है कि वे हर समय आम लोगों और लड़ाकों के बीच और आम लोगों के सुविधा केंद्रों और मिलिट्री टारगेट के बीच फर्क करें। आम लोगों या आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर—जिसमें शैक्षिक संस्थान भी शामिल हैं—पर हमले पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।
आईएचआरएफ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मूल्यों के तहत इस घटना की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
--आईएएनएस
केआर/
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‘तुम सब मरोगे’… उज्जैन यूनिवर्सिटी में धमकी से हड़कंप, दीवार पर लिखा मैसेज और संदिग्ध सामान मिला!
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की कृषि अध्ययनशाला में सामने आई यह घटना सिर्फ शरारत नहीं लगती, बल्कि यह डर फैलाने की एक सोची-समझी कोशिश नजर आ रही है। इस धमकी भरे संदेश के साथ मिली संदिग्ध सामग्री ने छात्रों और स्टाफ को गहरे डर में डाल दिया है।
धमकी भरा संदेश कैसे मिला
सोमवार सुबह जब चौकीदार नियमित काम के लिए पहुंचा, तब उसने मुख्य द्वार के पास कुछ असामान्य चीजें देखीं। वहां एक मटकी, लाल कपड़ा और कुंकू रखा हुआ था, जो किसी तंत्र क्रिया जैसा लग रहा था।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि दीवार पर लाल रंग से “तुम सब मरोगे” लिखा हुआ था। यह धमकी भरा संदेश साफ तौर पर डर पैदा करने के लिए लिखा गया था। कृषि अध्ययनशाला में इस धमकी भरे संदेश के सामने आते ही पूरे परिसर में हड़कंप मच गया।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, तुरंत हटाया गया सामान
जैसे ही घटना की जानकारी मिली, विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। दीवार पर लिखे धमकी भरे संदेश को तुरंत मिटा दिया गया और पुताई करवा दी गई। वहीं, मटकी और अन्य संदिग्ध सामान को भी हटा दिया गया। हालांकि, इस पूरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों और स्टाफ में डर का माहौल
इस घटना के बाद कृषि अध्ययनशाला में पढ़ने वाले करीब 1100 छात्रों और स्टाफ के बीच डर का माहौल बन गया है। कई छात्रों ने कहा कि इस तरह का धमकी भरा संदेश देखकर वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। कुछ छात्रों ने तो कक्षाओं में आने को लेकर भी चिंता जताई है। कृषि अध्ययनशाला में अचानक बने इस डर के माहौल ने पढ़ाई के माहौल को भी प्रभावित किया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि आखिर यह हरकत किसने की। विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान में सुरक्षा की इस कमी ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कृषि अध्ययनशाला में हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
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