भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस वक्त किरगिस्तान की राजधानी बिकेक पहुंचे हुए हैं। जहां वो एससीओ की रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे। लेकिन उनके इस दौरे से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री डोंग जोन से मुलाकात की है। इस मुलाकात की जानकारी खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दी। जिस पोस्ट में उन्होंने लिखा बिस्केक में एसइओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल जोंग जून के साथ बातचीत करके मुझे खुशी हुई। इस मुलाकात में दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच आखिर क्या बातचीत हुई इस पर कोई भी आधिकारिक सूचना तो सामने नहीं आई है। हालांकि कुछ मीडिया सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में भारत और चीन के बीच संवेदनशील मुद्दा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई है।
भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर विवाद बेहद पुराना है। लेकिन पिछले कुछ सालों में एलएसी को लेकर विवाद दोनों देशों के बीच कुछ बढ़ सा गया है। जहां पर कई बार तनाव जैसी स्थिति देखने को मिली। जिसके बाद जब पिछली एसइओ की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे थे। उसके बाद दोनों देशों ने डिसंगेजमेंट का फैसला किया। लेकिन दोनों देशों की तरफ से अभी भी सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई है। इतना ही नहीं इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री एंड्राई बेलेसफ से भी मुलाकात की है। जिसके जानकारी भी उन्होंने पोस्ट करते हुए दी।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा से ही मजबूत रहा है और इस बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा हुई। अपने पोस्ट में राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात को शानदार बातचीत बताया जिससे साफ है कि भारत अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है। बिकेक में हो रही यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं है बल्कि एक ऐसे समय में हो रही बैठक है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है। खास करके वेस्ट एशिया में जहां संघर्ष जारी है और वैश्विक सुरक्षा को लेकर एक चिंता बनी हुई है। ऐसे में एसइओ जैसे बड़े मंच पर एक साथ इतने देशों का बैठना और बातचीत करना बेहद अहम हो जाता है। रक्षा मंत्री ने इस बैठक में भारत की नीति को साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और आतंकवाद और कतरवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान "पतन की स्थिति" में है, और साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान ने व्हाइट हाउस से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बारे में ज़्यादा कुछ नहीं बताया कि ईरान ने यह संदेश किस तरह भेजा था। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि तेहरान नेतृत्व संकट से जूझ रहा है। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने अभी-अभी हमें बताया है कि वे ‘पूरी तरह से ढहने की स्थिति’ में हैं। वे चाहते हैं कि हम ‘होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दें,’ जितनी जल्दी हो सके, क्योंकि वे अपनी नेतृत्व की स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर यह ताज़ा पोस्ट उन कई दावों में से एक है जो ट्रंप ने पिछले दो महीनों में होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर किए हैं, जबकि नाकाबंदी खत्म करने की कोशिशों के नतीजे बहुत कम निकले हैं। अमेरिका और इज़रायल के बीच हफ़्तों तक चली लड़ाई के बाद भी, होर्मुज जलडमरूमध्य जो वैश्विक व्यापार का एक अहम और संकरा रास्ता है। समुद्री यातायात के लिए बंद ही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से कब खुलेगा?
ईरान ने अपनी नौसेना के ज़रिए नाकेबंदी कर दी है और इस संकरे रास्ते में 6,000 बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। अमेरिका ने भी इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों पर नाकेबंदी लगाने का दावा किया है। ईरान ने एक अंतरिम समझौते का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने के बदले में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोल दिया जाएगा। हालाँकि, दोनों देशों के बीच नाकेबंदी और इस क्षेत्र में चल रहे बड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी अंतरिम समझौते पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। इस क्षेत्र में लगभग 2,000 जहाज़ फँसे हुए हैं, जो इस जलमार्ग से सुरक्षित गुज़रने का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन अगर स्ट्रेट को फिर से खोल भी दिया जाता है, तो भी समुद्री यातायात को प्रभावित करने वाली कई बाधाएँ मौजूद हैं।
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