ईडी ने करोड़ों रुपए के वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ब्रिटेन बेस्ड कारोबारी को नामजद किया
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजधानी में एक विशेष न्यायालय (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के समक्ष ब्रिटेन निवासी सचिन देव दुग्गल के खिलाफ करोड़ों रुपए के वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित संलिप्तता के लिए पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है।
यह शिकायत 18 दिसंबर, 2024 को वेणुगोपाल धूत और 12 अन्य लोगों के खिलाफ दाखिल की गई मूल आरोप पत्र के सिलसिले में दायर की गई है। विशेष पीएमएलए न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान इस वर्ष 10 फरवरी को लिया था।
ईडी ने 23 जून, 2020 को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड (वीएचएचएल) ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से 2,773.60 मिलियन डॉलर की स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाया था, जिसका कथित उद्देश्य मोजाम्बिक, ब्राजील और इंडोनेशिया में विदेशी तेल और गैस संपत्तियों का विकास करना था।
जांच में कथित तौर पर वीडियोकॉन समूह के प्रमोटरों द्वारा विदेशी संस्थाओं के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से लगभग 2.03 बिलियन डॉलर की इन धनराशि का व्यवस्थित रूप से गबन करने का खुलासा हुआ।
ईडी ने कहा कि स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए के चेयरमैन और भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों निवियो टेक्नोलॉजीज और इंजीनियर.एआई के वास्तविक मालिक सचिन देव दुग्गल एक कथित योजना के प्रमुख लाभार्थी थे, जिसके तहत वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज से धन का गबन किया गया और कई विदेशी संस्थाओं के माध्यम से उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह योजना 2008 में शुरू हुई जब वीआईएल ने दुग्गल के नियंत्रण वाली निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बिना किसी औपचारिक ऋण समझौते के 17.32 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त ऋण देना शुरू किया।
आरोप है कि 24 मई, 2011 को जल्दबाजी में एक ऋण समझौता किया गया था, और अगले ही दिन, एक विदेशी वीडियोकॉन इकाई ने दुग्गल की स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए में 37.9 लाख सीएचएफ का निवेश किया, जिसे ईडी ने कंपनी के घाटे में होने के बावजूद बढ़ा-चढ़ाकर किए गए मूल्यांकन पर किया गया निवेश बताया। 2011 और 2014 के बीच, वीडियोकॉन ने कथित तौर पर पांच विदेशी इकाइयों के एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से एनहोल्डिंग्स एसए और सीधे सचिन देव दुग्गल को 37.07 लाख डॉलर (लगभग 20.12 करोड़ रुपए) हस्तांतरित किए।
निविओ टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान, कंपनी को एनहोल्डिंग्स एसए से 35 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, उसी अवधि में जब वीडियोकॉन समूह कथित तौर पर स्विस इकाई को धनराशि हस्तांतरित कर रहा था। उसी वर्ष, निविओ टेक्नोलॉजीज की स्वामित्व संरचना में परिवर्तन किया गया था।
दुग्गा की कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए, निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परम मूल कंपनी बन गई, जबकि निवियो क्लाउड कंप्यूटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को एक मध्यवर्ती होल्डिंग कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। ईडी ने आरोप लगाया कि इस पुनर्गठन के माध्यम से दुग्गल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत और विदेश में स्थित सभी संस्थाएं उनके सीधे नियंत्रण में रहें।
हालांकि, इन निधियों के अंतिम उपयोग के बारे में अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। 31 मार्च, 2013 को समाप्त हुए वर्ष के लिए एनहोल्डिंग्स एसए के वित्तीय विवरण के अनुसार, निवियो में किए गए निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया गया था।
जनवरी 2022 से पीएमएलए की धारा 50 के तहत कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद, ईडी ने कहा कि दुग्गल एजेंसी के सामने पेश होने में विफल रहे और उन्होंने केवल ईमेल के माध्यम से आंशिक और कथित तौर पर टालमटोल वाले दस्तावेज जमा किए।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
41 बायोगैस सिलेंडर भरने और स्टोरेज प्लांट्स को मिली मंजूरी, 14 को जारी किया गया लाइसेंस: केंद्र
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को बताया कि 41 बायोगैस सिलेंडर भरने और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 14 प्लांट्स को लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है।
एक आधिकारिक बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) स्टेशन के लिए कुल 467 आवेदन मिले थे, जिन्हें 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच प्राथमिकता के आधार पर निपटाया गया।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इन 467 मामलों में से 157 को अंतिम लाइसेंस मिला, जबकि 38 मामलों में नए सीएनजी/सीबीजी स्टेशनों के निर्माण के लिए पूर्व मंजूरी दी गई।
पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने मौजूदा संकट के दौरान ईंधन और गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई सुरक्षा और सहायक कदम उठाए हैं।
सुपीरियर केरोसीन ऑयल (एसकेओ) के अस्थायी भंडारण में छूट दी गई है, जिससे 2,500 लीटर तक स्टोरेज की अनुमति मिली है और एक बार के लिए 5,000 लीटर तक की छूट दी गई है, ताकि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के तहत अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति जारी रहे।
मंत्रालय ने बताया कि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 18 मार्च को अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। साथ ही, एलएनजी को क्रायोजेनिक सिलेंडर में भरने की अनुमति देने के दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे ईंधन आपूर्ति को और लचीला बनाया जा सके।
पीईएसओ ने 20 मार्च को निर्देश जारी किए कि सीएनजी स्टेशनों और डिकंप्रेशन यूनिट्स से जुड़े आवेदनों को 10 दिनों के भीतर निपटाया जाए, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो सके।
जल्द आपूर्ति की समस्या को दूर करने के लिए 14 मार्च को पोरबंदर जेट्टी पर एलपीजी उतारने की अनुमति भी दी गई।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1 अप्रैल 2026 को पीईएसओ की वेबसाइट पर पीडीएस केरोसीन और डीजल सप्लाई के लिए मंजूर कंटेनर निर्माताओं और उनकी क्षमता की सूची जारी की गई।
इसके अलावा, 1 अप्रैल को सीएनजी/सीबीजी कंप्रेसर के लिए मंजूरी की प्रक्रिया में 6 महीने की अस्थायी छूट दी गई, ताकि नए स्टेशनों को जल्दी शुरू किया जा सके।
साथ ही, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) भी औद्योगिक गतिविधियों को जारी रखने, सप्लाई चेन को स्थिर रखने और पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन देने के लिए कई कदम उठा रहा है।
इन उपायों का उद्देश्य ईंधन और जरूरी संसाधनों की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना और उद्योगों को आ रही समस्याओं को कम करना है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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