पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेजी से गर्म हो चुका है। वहीं राज्य के सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य में दो चरणों में मतदान होगा। पहला फेज 23 अप्रैल को और दूसरे फेज का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होगा। वहीं नतीजों की घोषणा 04 मई 2026 को होगी।
अगर पिछले विधानसभा चुनाव 2021 की बात की जाए, तो इस दौरान ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस यानी की टीएमसी ने शानदार जीत की थी। पार्टी ने 294 सीटों में से 213 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन वहीं पर भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल कर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। ऐसे में इस बार साल 2026 के चुनावों में दोनों ही राजनीतिक दल अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। वहीं राज्य में कई ऐसे मुद्दें हैं, जिनको लेकर विपक्षी दल सत्तारूढ़ पार्टी को घेर रहा है।
रोजगार और आर्थिक विकास
बता दें कि पश्चिम बंगाल के चुनावी मुद्दों में सबसे प्रमुख सवाल आर्थिक विकास और रोजगार का है। विपक्ष द्वारा यह लगातार आरोप लगाया जा रहा है कि राज्य में उद्योंगों की कमी की वजह से युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के मौके नहीं बन पा रहे हैं। तो वहीं कई बार यह भी कहा जाता है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी कंपनियां निवेश के लिए हिचकती हैं।
दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार का यह दावा है कि पिछले कुछ सालों में सड़क, परिवहन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं के जरिए राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। सत्तारूढ़ सरकार का कहना है कि नए निवेश और योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित वरिष्ठ पाकिस्तानी नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा और इन संपर्कों का फायदा उठाकर जम्मू और कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत की। मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग वाली अपील के तहत दायर विस्तृत प्रतिउत्तर हलफनामे में, एनआईए ने कहा कि कई भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ संपर्क के मलिक के दावे उन पर लगे आतंकवाद के आरोपों से अप्रासंगिक हैं और उन्हें उनके अपराधों की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करते हैं।
सुनवाई के दौरान, विशेष लोक अभियोजक अक्षय मलिक ने न्यायमूर्ति नवीन चावला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को प्रतिउत्तर हलफनामे के दाखिल होने की सूचना दी। न्यायालय ने इसे दर्ज किया और निर्देश दिया कि इसकी एक प्रति मलिक को दी जाए, जो जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होनी है। एनआईए ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मलिक द्वारा राजनीतिक नेताओं, नौकरशाहों और सार्वजनिक हस्तियों का बार-बार ज़िक्र करना केवल जनता की सहानुभूति बटोरने के उद्देश्य से किया गया है और आपराधिक कार्यवाही में इसका कोई महत्व नहीं है।
एजेंसी ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि प्रमुख हस्तियों का हवाला देना या सरकारी मिलीभगत का आरोप लगाना उनके खिलाफ साबित हुए अपराधों की गंभीरता को कम करता है ।पूर्व प्रधानमंत्रियों वीपी सिंह, चंद्र शेखर, पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकारों के साथ मलिक के कार्यकारी संबंधों के दावे को विशेष रूप से संबोधित करते हुए, एनआईए ने तर्क दिया कि ऐसे दावों का वर्तमान मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और ये नरमी बरतने या आपराधिक दायित्व से बचने का आधार नहीं हो सकते हैं।
अपनी जांच का विस्तृत विवरण देते हुए, एनआईए ने दोहराया कि अलगाववादी नेताओं और हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़ी एक व्यापक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस साजिश का उद्देश्य भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना था और इसमें हवाला समेत अवैध माध्यमों से धन जुटाकर जम्मू और कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना शामिल था।
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