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Yasin Malik के Pakistan कनेक्शन पर NIA का बड़ा खुलासा, PM-राष्ट्रपति से थे सीधे संपर्क!

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित वरिष्ठ पाकिस्तानी नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा और इन संपर्कों का फायदा उठाकर जम्मू और कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत की। मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग वाली अपील के तहत दायर विस्तृत प्रतिउत्तर हलफनामे में, एनआईए ने कहा कि कई भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ संपर्क के मलिक के दावे उन पर लगे आतंकवाद के आरोपों से अप्रासंगिक हैं और उन्हें उनके अपराधों की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करते हैं।
 

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सुनवाई के दौरान, विशेष लोक अभियोजक अक्षय मलिक ने न्यायमूर्ति नवीन चावला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को प्रतिउत्तर हलफनामे के दाखिल होने की सूचना दी। न्यायालय ने इसे दर्ज किया और निर्देश दिया कि इसकी एक प्रति मलिक को दी जाए, जो जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होनी है। एनआईए ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मलिक द्वारा राजनीतिक नेताओं, नौकरशाहों और सार्वजनिक हस्तियों का बार-बार ज़िक्र करना केवल जनता की सहानुभूति बटोरने के उद्देश्य से किया गया है और आपराधिक कार्यवाही में इसका कोई महत्व नहीं है। 

एजेंसी ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि प्रमुख हस्तियों का हवाला देना या सरकारी मिलीभगत का आरोप लगाना उनके खिलाफ साबित हुए अपराधों की गंभीरता को कम करता है ।पूर्व प्रधानमंत्रियों वीपी सिंह, चंद्र शेखर, पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकारों के साथ मलिक के कार्यकारी संबंधों के दावे को विशेष रूप से संबोधित करते हुए, एनआईए ने तर्क दिया कि ऐसे दावों का वर्तमान मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और ये नरमी बरतने या आपराधिक दायित्व से बचने का आधार नहीं हो सकते हैं।
 

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अपनी जांच का विस्तृत विवरण देते हुए, एनआईए ने दोहराया कि अलगाववादी नेताओं और हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़ी एक व्यापक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस साजिश का उद्देश्य भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना था और इसमें हवाला समेत अवैध माध्यमों से धन जुटाकर जम्मू और कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना शामिल था।

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West Bengal चुनाव से पहले Mamata Banerjee को झटका, Supreme Court बोला- 'CM ने System खतरे में डाला'

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण से एक दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक चल रही जाँच में उनके दखल से लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ खतरे में पड़ गई हैं। अदालत की यह टिप्पणी बुधवार को सुनवाई के दौरान आई। बेंच ने कहा कि यह केंद्र बनाम राज्य का विवाद नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक मुख्यमंत्री जाँच के एक अहम चरण में दखल दे रही हैं। 

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कोर्ट के अनुसार, ऐसा बर्ताव सीधे तौर पर लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। यह एक ऐसा मामला है, जिसमें एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री भी है, जांच के बीच में दखल दे रहा है और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है। जजों ने आगे कहा कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि इस देश में ऐसा दिन भी आएगा, जब कोई मुख्यमंत्री जांच के बीच में दखल देगा।" एक और कड़ी टिप्पणी करते हुए बेंच ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे सिस्टम को खतरे में डाल दिया है।

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ED ने TMC नेताओं पर शिकंजा कसा

एक और घटनाक्रम में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी ने पार्टी के उम्मीदवारों सुजीत बोस और रथिन घोष को चौथा समन जारी किया है और उन्हें 24 अप्रैल को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है। सुजीत बोस 2026 के चुनावों में बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि रथिन घोष मध्यमग्राम से मैदान में हैं।

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  Sports

PSL में हार के बाद कोच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दे दी गाली, पाकिस्तान सुपर लीग की हो रही फजीहत

पाकिस्तान सुपर लीग में खिलाड़ियों का गुस्सा कई बार सामने आया है। फिर चाहे शाहीन शाह अफरीदी हों  या फिर मोहम्मद रिजवान। लेकिन अब टीम के एक कोच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुस्सा जाहिर किया है और पत्रकार के सवाल में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो इस समय वायरल हो रहा है। 

मामला है गुरुवार को इस्लामाबाद यूनाइटेड और रावलपिंडी के बीच मैच का। इस मुकाबले में इस्लामाबाद को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार औऱ उससे भी ज्यादा टीम के प्रदर्शन को लेकर कोच ल्यूक रौंची खुश नहीं थे और उनकी नाराजगी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उतरी। 

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब रौंची पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे तब उन्होंने भाषा की सारी मर्यादा लांघ दी। रौंची एक पत्रकार के सवाल का जवाब दे रहे थे। तभी एक दूसरे पत्रकार ने अपना सवाल दाग दिया। इसे देख रौंची गुस्सा हो गए हैं और उन्होंने पास में खड़े टीम के मीडिया मैनेजर से कहा कि, वह सवाल पूछ सकते हैं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इंग्लिश में रौंची ने फर्क ना पड़ने के संबंध में जिन शब्दों का उपयोग किया वो अभ्रद माने जाते हैं। 

उनके इस बयान से पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीब सा माहौल पैदा हो गया। मीडिया मैनेजर ने फिर बात को संभाला। पत्रकार का बीच सवाल पूछना गलत हो सकता है लेकिन जवाब में मर्यादाहीन भाषा का इस्तेमाल करना भी गलत है। इसे शांति से कुछ और शब्दों के इस्तेमाल के साथ खत्म किया जा सकता था। 
Fri, 24 Apr 2026 16:59:01 +0530

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