Kishtwar के चाशोटी में बादल फटने के हादसे के बाद बड़ा बदलाव, मचैल माता यात्रा के लिए कड़े नियम लागू
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ के पड्डर के चाशोटी में हुई बादल फटने की घटना के बाद जम्मू कश्मीर सरकार ने मचैल माता यात्रा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े बदलाव किए हैं. पिछले साल 14 अगस्त को पड्डर के चाशोटी में हुई बादल फटने की घटना की तस्वीरों ने पूरी दुनिया ही झकझोर कर रख दिया था...इस घटना में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे....उस समय यात्रा की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर कई बड़े सवाल उठे थे.....जिसके बाद प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा की समीक्षा करके कई कदम उठाए गए थे...किश्तवाड़ के पड्डर में 14 अप्रैल से ये यात्रा एक बार फिर शुरू हो गई है लेकिन इस बार यात्रा के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है.
14 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा
किश्तवाड़ के पड्डर में मचैल माता यात्रा शुरू हो गई है....अब तक इस यात्रा में करीब 4500 श्रद्धालु माता मचैल के दर्शन कर चुके हैं.यात्रा शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं ऐसे में हर दिन 70 से 80 यात्री यात्रा के लिए जा रहे हैं...वैसे इस यात्रा की छड़ी 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलती है....लेकिन यात्रा की शुरुआत बैसाखी से ही शुरू हो जाती है...चाशोटी की घटना के पहले यात्री छड़ी से पहले बेरोकटोक यात्रा किया करते थे...लेकिन घटना के बाद अब यात्रा पर आने वाले सभी यात्रियों के लिए नियमों को मानना अनिवार्य कर दिया गया है.....
यात्रा के लिए RFID कार्ड अनिवार्य
जम्मू कश्मीर पुलिस के सीनियर अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक चाशोटी में हुई बादल फटने की घटना के बाद यात्रा को कंट्रोल में रखने के लिए RFID कार्ड अनिवार्य बनाया गया है.....श्रद्धालु मचैल माता यात्रा को लेकर बनाई गई वेबसाइट के जरिए अपनी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं...जिसके बाद किश्तवाड़ के गौरी शंकर मंदिर या फिर SDM ऑफिस गुलाबगढ़ में रजिस्ट्रेशन दिखाकर वो अपना RFID कार्ड ले सकते हैं.....पुलिस अधिकारी के मुताबिक RFID कार्ड की चेकिंग करने के लिए पहला नाका गुलाबगढ़ में ही लगाया गया है जहां RFID कार्ड को स्कैन किया जाता है...इसी तरह के दो और नाके यात्रा के रास्ते में भी बनाए गए हैं.....जहां RFID कार्ड की स्कैनिंग की जा रही है....
वुल्नरेबल प्वाइंट्स की पहचान
मचैल माता यात्रा के दुर्गम रास्ता होने के चलते 35 वुल्नरेबल प्वाइंट्स की प्रशासन द्वारा निशानदेही की गई है....रोड, लैंडस्लाइड, क्लाउड बर्स्ट वाली जगहों पर CCTV कैमरा इंस्टॉल किए गए हैं....गुलाबगढ़ SDM ऑफिस में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है...जहां से पूरी यात्रा की मॉनिटरिंग की जा रही है....रात के समय यात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है....यात्रा का टाइमिंग सुबह 6 बजे से रात के 6 बजे तक रखा गया है.....
6000 यात्री कोटा
यात्रा के लिए यात्री कोटा को 6000 प्रतिदिन कर दिया गया है....किश्तवाड़ और गुलाबगढ़ में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने और RFID कार्ड दिए जाने की भी सुविधा रखी गई है....गुलाबगढ़ से मचैल माता मंदिर के बीच रोड का काम भी लगभग पूरा हो चुका है.....इस बीच प्रशासन द्वारा मौसम खराब होते ही यात्रा को बंद करने के भी निर्देश हैं....साफ है कि चाशोटी में हुए हादसे के बाद जम्मू कश्मीर सरकार और प्रशासन ने न केवल मचैल माता यात्रा की समीक्षा की है बल्कि इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में होने वाली दूसरी सभी यात्राओं की भी समीक्षा की गई है ताकि भविष्य में चाशोटी जैसी किसी भी घटना से बचा जा सके......
(रिपोर्ट: शाहनवाज खान)
पहलगाम की आतंकी घटना पूरी मानवता पर हमला थी : यूके सांसद बॉब ब्लैकमैन
लंदन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। यूके के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने बुधवार को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि जो आतंकवाद लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाता है, वह पूरी मानवता पर हमला है।
भारत ने बुधवार को उस भयावह पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी मनाया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 मासूम पर्यटकों की उनके धर्म की पहचान करने के बाद गोली मार दी थी। यह हाल के वर्षों की सबसे क्रूर नागरिकों पर हुए हमलों में से एक था।
ब्लैकमैन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “पहलगाम नरसंहार को एक साल हो गया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। पीड़ितों को उनके धर्म के आधार पर पहचाना गया और मार दिया गया। जो आतंकवाद लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाता है, वह पूरी मानवता पर हमला है।”
भारत में ब्रिटिश उच्चायोग ने भी कहा कि यूके हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है और पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देता है।
ब्रिटिश उच्चायोग ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “आज हम पहलगाम में हुए उस भयावह आतंकी हमले को एक साल होने पर याद कर रहे हैं। हम पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हैं और उन सभी लोगों के साथ हमारी संवेदनाएं हैं, जो इससे प्रभावित हुए। यूके हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है। हम शांति और सुरक्षा के लिए साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
यह हमला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ था, जिसमें 26 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक हिस्सा माना जाता है।
आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर और ‘कलमा’ पढ़वाकर गैर-मुस्लिमों की पहचान की और उन्हें निशाना बनाया। मारे गए लोगों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय पोनी (घोड़ा) चलाने वाला व्यक्ति शामिल था, जिसने पर्यटकों को बचाने की कोशिश की थी।
कई पीड़ित हाल ही में शादीशुदा थे और कुछ को उनके परिवार वालों के सामने ही बेहद करीब से गोली मार दी गई।
इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंक के बड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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