Uncovered with Manoj Gairola: क्या है ईरान का नया हथियार? Iran की इस रणनीति से बढ़ा तनाव
Uncovered with Manoj Gairola: बुधवार यानी 22 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. एक ओर अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को बातचीत के लिए भेजने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने नए “रणनीतिक हथियार” की चेतावनी दे रहा है. अब तक ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे बड़ा दबाव का साधन रहा है, जिसके जरिए वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ा. लेकिन अब ईरान लाल सागर के जरिए दुनिया की करीब 32% तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की योजना बना रहा है. इसमें यमन के हूती लड़ाकों की भूमिका अहम मानी जा रही है, जिन्होंने पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों में अमेरिका और इजरायल को चुनौती दी है. यह स्थिति वैश्विक स्तर पर नई चिंता पैदा कर रही है.
ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर ईयू का कड़ा रुख, प्रतिबंध बढ़ाने के संकेत दिए
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने विदेश मामलों की परिषद की बैठक में ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने ईयू की ओर से प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने और परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ ईरान के मिसाइल कार्यक्रम व क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को समर्थन जैसे मुद्दों को भी किसी भी स्थायी समाधान में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर अस्थिरता की आलोचना करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया और इसे सभी के लिए खुला व मुक्त बनाए रखने पर जोर दिया।
यूरोपीय आयोग के उपाध्यक्ष काजा कैलास ने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, होर्मुज स्ट्रेट खुला है या बंद, इस पर रोज-रोज अपना रुख बदलना एक गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरना हमेशा मुफ़्त रहना चाहिए। ईयू ने एक राजनीतिक समझौता किया है, जिसके तहत हम अपने प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाएंगे और उन लोगों को भी निशाना बनाएंगे जो नौवहन की स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं।
काजा ने पोस्ट में आगे कहा, हममें से कोई भी ईरान को परमाणु हथियारों से लैस नहीं देखना चाहता। हम अपने क्षेत्रीय साझेदारों से इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी स्थायी समाधान में परमाणु मुद्दे के अलावा अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिनमें ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और आतंकवादी समूहों को उसका लगातार मिल रहा समर्थन शामिल है।
वहीं, ईरान-अमेरिका अस्थायी संघर्ष विराम की मियाद खत्म होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर धमकी दी है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा- ईरान ने कई बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान तब सामने आया है जब अस्थायी संघर्ष विराम की समय सीमा खत्म होने को है और इस्लामाबाद टॉक्स के दूसरे दौर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। 8 अप्रैल (भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे) को संघर्ष विराम का ऐलान किया गया था।
दोनों ओर विश्वास और भरोसे की कमी स्पष्ट दिख रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन हों, स्पीकर एमबी गालिबाफ हों या फिर विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सभी एक सुर में यूएस की मंशा पर संशय कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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