आयुर्वेद का एंटी-एजिंग नुस्खा: 40 की उम्र में मिलेगा 20 जैसा चमकदार ग्लो
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियां आने के बाद सभी की पहली परेशानी होती है, स्किन का कैसे ख्याल रखा जाए। तेज गर्मी, पसीना और सन टैनिंग से स्किन अपना सारा ग्लो खो देती है।
स्किन को हमेशा स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए सिर्फ बाहरी देखभाल ही जरूरी नहीं है, उसके लिए आंतरिक देखभाल भी जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार त्वचा की खूबसूरती सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य, सही आहार और सही देखभाल पर निर्भर करती है।
आयुर्वेद में सुंदरता को शरीर के संतुलन से जोड़कर देखा गया है। अगर शरीर में सब कुछ सही है, तो उसका ओज चेहरे पर साफ दिखता है। बढ़ती उम्र के साथ भी चेहरे पर कई परेशानियां दिखने लगती हैं। इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाना बहुत आसान है, बस इसके लिए आपको आहार से लेकर लेपन में परिवर्तन लाना होगा। बाजार में बिकने वाले महंगे और केमिकल से भरे प्रोडक्ट की जगह घरेलू उपायों का सहारा लें। इसके लिए अपनी जीवनशैली में मसूर की दाल का फेसपैक और जायफल का फेसपैक शामिल कर सकते हैं।
अगर टैनिंग और चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो इसके लिए मसूर की दाल को हल्का भूनकर पेस्ट बना लें। पेस्ट में हल्दी, दूध और मुल्तानी मिट्टी मिलाकर चेहरे पर लगाए। सूख जाने पर चेहरे की हल्की मसाज करके पैक को धीरे-धीरे निकाले। यह चेहरे की गंदगी को गहराई से साफ करेगा और चेहरा पर ग्लो भी लाएगा। केसर और जायफल का पैक भी गर्मियों में चेहरे पर अच्छे रिजल्ट देता है।
इसके लिए केसर को दूध में भिगो दें और जायफल को पीसकर पेस्ट बना लें। जायफल में थोड़ा बेसन और केसर वाला दूध मिलाकर लगा लें। यह डार्क सर्कल और पिगमेंटेशन को ठीक करता है। हफ्ते में दो बार इसे लगा सकते हैं। जायफल को सीधे चेहरे पर लगाने से बचें, कुछ मिलाकर लगाएं। इसकी गर्म तासीर चेहरे को छील सकती है।
बाहरी सुंदरता के साथ आंतरिक सुंदरता भी जरूरी है। इसके लिए आहार में खूब सारा पानी, चुकंदर, ताजे फल, आंवला और अनार को जरूर शामिल करें। भोजन में विरुद्ध आहार से बचें, जैसे दूध के साथ नमकीन खाना, दूध के साथ दही, और मीठे फलों के साथ खट्टे फलों का सेवन करने से बचें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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खंडवा में वन विभाग रेंजर द्वारा आदिवासियों से बदसलूकी पर भड़के उमंग सिंघार, BJP को घेरा, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
खंडवा जिले के नरमलाया गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन रेंजर द्वारा आदिवासी परिवारों को कथित तौर पर धमकाने और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला अब राजनीतिक स्तर पर गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना को बीजेपी सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता करार दिया है।
उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री से तुरंत निष्पक्ष जांच करने और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश में किसी भी आदिवासी के साथ इस तरह का अन्याय एवं अभद्र व्यवहार दोबारा न हो।
ये है मामला
खंडवा जिले के माथाता विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नरमलाया गांव में वन विभाग की बताई जा रही जमीन पर करीब 20 आदिवासी परिवार दशकों से रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन पहले राजस्व विभाग के अंतर्गत थी और उनकी चार पीढ़ियां यहां 80 साल से बसी हुई हैं। 2022 में ओंकारेश्वर क्षेत्र में वन भूमि के बदले राजस्व विभाग ने नरमलाया में 9.36 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को ट्रांसफर की थी। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी वन विभाग ने इसका कब्जा नहीं लिया था। अब जब अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन के साथ वन अमले के साथ रेंजर शंकर सिंह चौहान पहुंचे तो स्थानीय आदिवासियों ने विरोध जताया। इसी दौरान रेंजर ने गुस्से में कहा “ज्यादा फालतू बात मत करना…मैं यहीं तुम्हारी कब्र बना दूंगा तुम्हारे गांव वाली सब देखते रह जाएंगे”। यह पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें रेंजर की तीखी और धमकी भरी भाषा साफ सुनाई दे रही है।
उमंग सिंघार ने की जांच की मांग
इस मामले में उमंग सिंघार ने सरकार और प्रशासन को घेरा है। उन्होंने कहा कि “आदिवासी परिवारों को डराने-धमकाने और ‘कब्र बना दूंगा’ जैसी शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल भाजपा के तथाकथित सुशासन और आदिवासी प्रेम की असलियत सामने लाता है। यह कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में अधिकारियों द्वारा गरीब और आदिवासी समाज को दबाने की सोच को दर्शाता है।” नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी हमारे प्रदेश की अस्मिता हैं। उनके सम्मान और अधिकारों से कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदिवासियों को डराने या कुचलने की हर कोशिश का सशक्त जवाब दिया जाएगा। इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से कड़े शब्दों में मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषी अधिकारी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में प्रदेश के किसी भी आदिवासी के साथ इस तरह का अन्याय या अभद्र व्यवहार न हो।
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