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कुवैत में सड़क हादसे में जम्मू-कश्मीर के पांच मजदूरों की मौत

जम्मू, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। कुवैत में एक सड़क दुर्घटना में जम्मू-कश्मीर के पांच मजदूरों की मौत हो गई है, और गुरुवार को उनके परिवारों ने उनके शवों को वापस लाने की मांग की।

इन पांच लोगों में से एक राजौरी के थानामंडी का और चार पुंछ के सुरनकोट के रहने वाले थे। मारे गए मजदूरों के परिवारों ने अधिकारियों से उनके शवों को वापस लाने की अपील की है।

पीड़ित, जो सभी कुवैत में मजदूरी करने वाले बताए जा रहे हैं, अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी कमाने के लिए इस खाड़ी देश में गए थे, तभी यह दुर्घटना हो गई। इस घटना से उनके मूल इलाकों में, खासकर थानामंडी और सुरनकोट में शोक की लहर दौड़ गई है, जहां रिश्तेदार और स्थानीय लोग मृतकों के खोने का मातम मना रहे हैं।

पीड़ितों के परिवार वालों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द शवों को वापस लाने में मदद करें, ताकि उनके गृह नगरों में उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।

रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत के एक हाईवे पर दो वाहनों की टक्कर हो जाने से ये पांचों लोग मारे गए। अधिकारियों द्वारा संबंधित एजेंसियों और राजनयिक माध्यमों से समन्वय स्थापित किए जाने के बाद, सभी मृतकों की पहचान की औपचारिक पुष्टि होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोग अक्सर रोजगार की तलाश में, खासकर मजदूरी वाले क्षेत्रों में, खाड़ी देशों (जिनमें कुवैत भी शामिल है) की ओर पलायन करते हैं, ताकि वे अपने घर पर मौजूद परिवारों का भरण-पोषण कर सकें।

हजारों छात्र आमतौर पर सस्ती शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों के चलते ईरान जाते हैं; इनमें से कई छात्रों की पढ़ाई और रोजी-रोटी अब बाधित हो रही है, जिसका असर कश्मीरी हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।

हाल ही में, क्षेत्रीय संघर्षों के चलते लगभग 1,200 कश्मीरी छात्रों को ईरान से सुरक्षित निकाला गया था; इनमें से अधिकांश छात्र चिकित्सा (एमबीबीएस) की पढ़ाई कर रहे थे और अप्रैल 2026 की शुरुआत तक अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित अपने घर लौट आए थे।

इनमें से अधिकांश कश्मीरी छात्र कोम और इस्फहान जैसे शहरों में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे थे।

अप्रैल 2026 की शुरुआत में क्षेत्रीय अस्थिरता और संघर्ष-विराम लागू होने के बाद, लगभग 1,100 छात्र अपने घर लौट आए, जबकि शेष छात्र अजरबैजान सीमा के रास्ते वहां से निकले।

कश्मीरी छात्रों के बीच ईरान एक लोकप्रिय विकल्प है, क्योंकि वहां ट्यूशन फीस कम है, पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी है, और वहां के साथ उनके गहरे सांस्कृतिक व धार्मिक संबंध हैं, विशेषकर शिया समुदाय से आने वाले छात्रों के लिए।

--आईएएनएस

एससीएच

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं', लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर ईरानी राष्ट्रपति की चेतावनी

नई द‍िल्‍ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। लेबनान में बढ़ते सैन्य हमले और संघर्ष-विराम के उल्लंघन को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर है। इजरायल के हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि ये कार्रवाइयां जारी रहीं तो हमारी उंगल‍ियां अभी भी ट्रिगर पर ही हैं।

ईरान ने लेबनान के खिलाफ बार-बार की आक्रामकता को संघर्ष-विराम समझौते का घोर उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है क‍ि इन आक्रमक कार्रवाइयों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा। ईरान अपने लेबनानी भाइयों और बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा। यह धोखे तथा संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, लेबनान में इजरायल का फिर से घुसपैठ करना, शुरुआती संघर्ष-विराम समझौते का खुला उल्लंघन है। यह धोखेबाजी और भविष्य के संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा। हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं। ईरान अपने लेबनानी भाई-बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा।

वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इजरायल के हमले की कड़ी आलोचना की है। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में सीजफायर हुआ है। सीजफायर के बाद ही इजरायल ने लेबनान पर हमला कर दिया।

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से बात की और इन जानलेवा हमलों के सामने फ्रांस की पूरी एकजुटता दिखाई। इजरायल ने कहा कि इन हमलों में ईरान के समर्थन वाले मिलिटेंट समूह हिज्बुल्लाह के 100 से ज्यादा कमांड सेंटर और मिलिट्री साइट्स को टारगेट किया गया।

लेबनानी पीएम और राष्ट्रपति से बातचीत के बाद फ्रांस के प्रेसिडेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ये हमले अभी हुए सीजफायर के बने रहने के लिए सीधा खतरा हैं। लेबनान को इस सीजफायर के तहत पूरी तरह शामिल किया जाना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने वाली समझौता वार्ता के ल‍िए अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस इस्‍लामाबाद जाने की तैयारी में हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति के बाद दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत हो रही है।

इस बीच ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।

इस स्‍थ‍ित‍ि में अभी यह कहना मुश्‍क‍िल है क‍ि ईरान की तरफ से समझौता वार्ता के ल‍िए पाक‍िस्‍तान कौन जाएगा।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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