Responsive Scrollable Menu

'तारक मेहता' फेम राज अंदकत करेंगे टीवी पर वापसी, इस पॉपुलर एक्टर को रिप्लेस कर बनाई अपनी जगह

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah Fame Raj Anadkat: टीवी के पॉपुलर कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा को दर्शक सालों से बेहद पसंद करते आ रहे हैं. इस शो के किरदारों ने भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है. इन्हीं में से एक हैं टप्पू का किरदार निभाने वाले राज अंदकत, जो एक बार फिर सुर्खियों में हैं. तो चलिए आपको सब कुछ डिटेल में बताते हैं. 

नए शो में लीड रोल निभाएंगे राज अंदकत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज अंदकत अब अपने करियर की नई शुरुआत करने जा रहे हैं. वह जल्द ही सोनी सब के एक नए शो में लीड रोल में नजर आएंगे. इस खबर के सामने आते ही उनके फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. टप्पू के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले राज अब एक बिल्कुल नए अवतार में दर्शकों के सामने आने के लिए तैयार हैं. यह उनके करियर का एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

अविनाश मिश्रा को किया रिप्लेस

खबरों के अनुसार, इस नए प्रोजेक्ट में राज अंदकत ने अविनाश मिश्रा को रिप्लेस किया है. इस बदलाव ने इंडस्ट्री और दर्शकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, खासकर उन फैंस का जो राज को उनके शुरुआती दिनों से फॉलो करते आ रहे हैं. एक पॉपुलर कॉमेडी शो से निकलकर किसी नए प्रोजेक्ट में लीड रोल निभाना यह दर्शाता है कि राज अपने करियर में आगे बढ़ने और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के लिए तैयार हैं.

खुशी दुबे के साथ बनेगी जोड़ी

इस अपकमिंग शो को इंस्पायर फिल्म्स प्रोड्यूस कर रहा है. शो में राज अंदकत के साथ खुशी दुबे नजर आएंगी. दोनों कलाकार अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड हैं. टीवी स्क्रीन पर यह नई जोड़ी क्या कमाल दिखाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

कहानी पर अभी सस्पेंस

हालांकि, शो की कहानी को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कास्टिंग ने ही दर्शकों की उम्मीदों को काफी बढ़ा दिया है. फैंस बेसब्री से इस शो के ऑफिशियल अनाउंसमेंट और प्रोमो का इंतजार कर रहे हैं.

टप्पू से लीड हीरो तक का सफर

गौरतलब है कि राज अंदकत ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा में टप्पू का किरदार निभाकर एक मजबूत फैन बेस बनाया. समय के साथ वह खासकर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गए. अब लीड रोल में नजर आना उनके करियर के लिए एक नई उड़ान साबित हो सकता है. यह न सिर्फ उनके अभिनय के दायरे को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान बनाने का भी मौका देगा. कुल मिलाकर, राज अंदकत का यह नया प्रोजेक्ट उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है और फैंस को उनसे काफी उम्मीदें हैं.

ये भी पढ़ें: वॉकर के सहारे चलकर प्रेमानंद जी महाराज से मिलने पहुंचे अनुराग डोभाल, भयानक एक्सीडेंट के बाद की नई शुरुआत

Continue reading on the app

सीजफायर के लिए मध्यस्थता : चीन का हथियार और कर्ज या अमेरिकी कृपा और भरोसा, पाकिस्तान को क्या भाया?

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जारी जंग में एक बड़ा मोड़ तब आया जब दोनों गुटों के बीच सीजफायर की बात पर सहमति बन गई। हालांकि इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में परेशानी जारी थी, खासकर कच्चे तेल और रसोई गैस की किल्लत से दुनिया के कई देश त्राहिमाम कर रहे थे। लेकिन इस सीजफायर के दौरान अमेरिका ने जिस देश को आगे रखा, उसके बारे में तो दुनिया का कोई भी देश मानने को तैयार नहीं था कि मध्यस्थता उसने करवाई होगी।

चीन के हथियार और कर्ज पर पल रहा पाकिस्तान अब अमेरिका की कृपा और भरोसा पाने के लिए पर्दे के पीछे छुपकर चीन और अमेरिका की चापलूसी करने वाला अचानक अमेरिका के बयान के बाद शांति का मसीहा बनकर अपनी पीठ थपथपाने लगा।

दरअसल, ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका की जंग के बीच सीजफायर के ऐलान के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर का नाम लेकर पाकिस्तान को युद्धविराम का श्रेय दिया। इसे पाकिस्तान अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखने लगा, और इस खुशी का जश्न अभी परवान भी नहीं चढ़ा था कि पूरी दुनिया को पता चल गया कि चीन ने कैसे पर्दे के पीछे से पाकिस्तान के कंधे पर रखकर सीजफायर वाली बंदूक अमेरिका और ईरान के सामने तान रखी थी और दोनों को इसे मानने पर मजबूर होना पड़ा।

अब जरा पूरे प्रकरण में पीठ थपथपाते पाकिस्तान की लाचारगी देखिए। खुद अफगानिस्तान से मात खा रहा पाकिस्तान चीन के भरोसे अपने खिलाफ जारी तालिबानी आक्रमण को रोकने की जुगत लगा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जब पाकिस्तान के 12 में से ज्यादातर बड़े एयरबेस पर हमला कर काम के लायक नहीं छोड़ा, तो वह चीन और अमेरिका के पैरों में गिरकर सीजफायर के लिए भारत को तैयार कराने की बात कर रहा था। वह अब दुनिया में शांति का मसीहा बन रहा है। पाकिस्तान की यह पोल उसके ही दो ऐसे देशों ने खोल दी थी, जिनमें अमेरिका और चीन दोनों शामिल थे।

अमेरिका ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर नहीं होता तो पाकिस्तान में इतनी तबाही मचती कि वह उसको झेल नहीं पाता और पाकिस्तान के पीएम तक मारे जा सकते थे। वहीं अमेरिका के दावे के कुछ दिन बाद पाकिस्तान के दूसरे आका चीन ने भी माना की पाकिस्तान के कहने पर उसने भारत से बातचीत कर पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर कराई।

तब पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले अमेरिका के एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने एक अखबार के साथ बातचीत में इस बात का दावा किया था कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा डर उसके परमाणु कमान प्राधिकरण के सिर काटे जाने का है। नूर खान पर भारत के मिसाइल हमले को इसी तरह से देखा जा सकता है कि वह ऐसा कर सकता है।

मतलब साफ था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के साथ वहां के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। अपने परमाणु ठिकानों की सुरक्षा की चिंता के कारण ही पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़े।

वैसे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर चिंता में तो पूरी दुनिया है। क्योंकि आतंकियों को पनाह देने के इतिहास के चलते पूरी दुनिया के लिए यह चिंता का विषय है कि पाक के परमाणु हथियार किसी गलत हाथों में ना चले जाएं।

वैसे भारत और पाक के बीच सीजफायर में अमेरिका की दिलचस्पी की वजह पाक के सैन्य अड्डे, एयरबेस व परमाणु हथियार रहे हैं। अमेरिका पहले कई बार पाक के सैन्य अड्डों व एयरबेस को इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन जैसे देशों के दबाव के चलते अमेरिका को ऐसा करने देने से बचता रहा है। अमेरिका को यही सही मौका दिखा जब भारत के हाथों पाक की जबरदस्त धुनाई हो रही थी, तो वह मसीहा बनकर सामने आया और पाकिस्तान को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहा कि वह भारत से बातचीत कर उसे बचा सकता है। हालांकि चीन को पाकिस्तान की यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी थी, क्योंकि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए अपने हथियार से लेकर ड्रोन तक चीन मुहैया करा रहा था। हालांकि इसमें भी चीन का ही फायदा था, क्योंकि चीन ने भारत-पाक के बीच जारी जंग के बीच पाकिस्तान को हथियार मुहैया कराकर अपने लिए टेस्टिंग ग्राउंड तैयार किया था। और भारत की जवाबी कार्रवाई में चीन के सारे हथियार और ड्रोन टांय-टांय फुस्स साबित हुए थे।

दूसरी तरफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने हवाई हमले में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए थे। जिसको लेकर पाकिस्तान दावा करता रहा था कि वह दुनिया के सबसे भरोसेमंद और बेहतरीन लड़ाकू विमान हैं। यानी कुल मिलाकर भारत ने पाकिस्तान को पर्दे के पीछे से चीन और अमेरिका की तरफ से दी जा रही मदद की पूरी कलई खोलकर रख दी थी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने तो यहां तक कबूल कर लिया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना का शौर्य देखकर पाकिस्तान के बड़े नेताओं की भी हालत इतनी पतली हो चुकी थी कि वो खुद को बचाने के लिए बंकरों में छिपने तक की सोच रहे थे।

इस जंग में चीन के हथियारों की ऐसी भद्द पिटी कि पाकिस्तान को चीन से ज्यादा अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर भरोसा हो आया। चीन अपने जिन हथियारों को सस्ता और अचूक बताकर दुनिया भर में ढोल पीटता रहा था, वे दुनिया भर में हुए हाल के संघर्षों में बुरी तरह फेल हुए हैं। पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने चीनी रक्षा कवच का कबाड़ा बनाया, फिर वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान चीनी ढाल बेकार साबित हुई। अब ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों में बीजिंग के सिस्टम का गुब्बारा बुरी तरह फूट गया था। इससे साबित हो चुका था कि चीन, जिसे अचूक हथियार होने का दावा कर रहा है, वह घटिया इंजीनियरिंग, कमजोर सॉफ्टवेयर के दम पर बना है, जो कबाड़ से ज्यादा कुछ नहीं है। ऐसे में चीन के लिए भी इस युद्ध में शर्मिंदगी साफ झलक रही थी और उसके लिए जरूरी था कि इस युद्ध को जल्द से जल्द रोका जाए। चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है और उसे पता है कि यही हालत रही तो उसके हथियार बाजार में भरोसे के संकट से जूझते रहेंगे।

पाकिस्तान की दुविधा देखिए, पहले वहां की सरकार भारत-पाक के बीच सीजफायर के लिए ट्रंप के दावे के साथ खड़ी हुई और जब दूसरे आका ने दबाव डाला, तो पाकिस्तान की सरकार ने दावा किया कि चीन ने भी ऑपरेशन सिंदूर को रोकने में मध्यस्थता की थी। यानी भारत के खिलाफ जंग में जो देश अपनी सुरक्षा की चिंता लेकर अमेरिका और चीन के सामने घुटने टेक रहा था, वह दावा कर रहा है कि उसने ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के लिए मध्यस्थता की।

पाकिस्तान पूरी दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए इस युद्ध में मध्यस्थता कर रहा था, लेकिन सबको पता है कि ईरान के साथ पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा है। ईरान जितना अस्थिर हो रहा था पाकिस्तान की स्थिति उतनी खराब हो रही थी। एक तरफ अफगानिस्तान की सीमा पर पाकिस्तान की हालत खराब थी, दूसरी तरफ ईरान की सीमा पर पाकिस्तान की हालत पतली होती जा रही थी। मतलब पाकिस्तान की ये सक्रियता शांति स्थापित करने के लिए तो कतई नहीं थी, बल्कि ये तो डॉलर वाली एक डील थी। पाकिस्तान का लालच, सौदेबाजी और निजी हितों का मिश्रण इसकी बड़ी वजह रही।

अमेरिका की कृपा पर पलने वाली पाकिस्तानी सेना और सरकार के लिए यह सुनहरा मौका था, क्योंकि चीन तो पाकिस्तान को दिए गए कर्ज की वसूली के लिए कई महीनों से धमकी दे रहा था। ऐसे में पाकिस्तान ने अमेरिका को खुश करके अपनी झोली में कुछ भीख इकट्ठा करने के जुगाड़ कर लिए और दूसरी तरफ चीन के लिए जो पर्दे के पीछे खड़े होकर सारा खेल खेल रहा था, उसके सामने ढाल बनकर उसको भी कुछ दिनों के लिए भरोसे में ले लिया ताकि ड्रैगन उससे कर्ज की रकम की उगाही की बात भूल जाए। साथ ही आतंकी मुल्क पाकिस्तान दुनिया में अपनी छवि सुधारने की भरसक कोशिश में लगा है और उसे इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था।

यानी फर्जी दावे करने वाला पाकिस्तान रातोंरात ईरान-अमेरिका के महायुद्ध में सीजफायर कराने वाला चौधरी बनने लगा। जबकि चीन ईरान, अमेरिका युद्ध से अब प्रभावित होने लगा था। उसे मुख्य रूप से तेल आपूर्ति ईरान से ही होती है, जो बाधित हो गई थी। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक मांग में कमी के कारण चीन अब आर्थिक दबाव झेल रहा था। उसने इसके लिए पाकिस्तान को आगे किया और अपनी नाकामी छुपाने के लिए पाकिस्तान भी तैयार हो गया क्योंकि उसे लगातार ईरान से फटकार मिल रही थी।

दूसरी तरफ इस जंग के बीच चीन ने भी पाक को लेकर अपना तेवर बदल लिया था और दोस्ती के बीच लक्ष्मण रेखा खींचते हुए बिजली का बकाया बिल पाकिस्तान से मांग लिया था। जो लगभग 220 मिलियन डॉलर (लगभग 2,050 करोड़ रुपए) के करीब है। इसे न चुकाने पर चीन ने पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने और विदेशी निवेश ठप होने की सीधी धमकी भी दे डाली थी। इस सबके बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को दिए लोन का पैसा वापस मांग लिया था। यानी एक तो महंगाई से त्राहिमाम कर रहा पाकिस्तान और ऊपर से खैरात समझकर लिए कर्ज की वापसी पाकिस्तानी सरकार की रातों की नींद उड़ा चुका था। अब पाकिस्तान के पास अपने दोनों आका को खुश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

अमेरिका को भी इस युद्ध में बड़ा नुकसान हुआ और दूसरी तरफ ट्रंप का विरोध उसके देश में ही जमकर होने लगा। ऐसे में इस युद्ध से सम्मानजनक रूप से निकलने के लिए अमेरिका ने ढुलमुल पाकिस्तान को बिचौलिया बनाया। पाकिस्तान को भी पता है कि उसे अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए चीन की मदद चाहिए और अपनी दयनीय हालत सुधारने के लिए अमेरिका की, इसलिए वह दोनों खेमों में जाकर घुटनों के बल बैठ गया। इसके साथ ही पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ अपना समझौता कराने के लिए 5 देशों चीन, तुर्की, यूएई, सऊदी अरब और कतर के साथ टेबल पर है। चीन इस शांति वार्ता को लीड कर रहा है, जिसके बदले में पाकिस्तान ने उसे अपना कंधा यहां इस्तेमाल करने के लिए दिया था।

मतलब साफ है कि चीन के हथियार और कर्ज के साथ अमेरिका की कृपा और भरोसा दोनों पाकिस्तान को भा गया।

--आईएएनएस

जीकेटी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

बाबर आजम का टी20 क्रिकेट में बड़ा रिकॉर्ड, इस मामले में क्रिस गेल और कोहली को पछाड़ा

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम ने गुरुवार को टी20 क्रिेकट में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 में पेशावर जल्मी और कराची किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले में 31 वर्षीय बाबर ने 51 गेंद में ताबड़तोड़ 87 रन बनाए। इसी के साथ वे टी20 क्रिकेट में सबसे तेज 12 हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। 

बाबर ने ये कारनामा 338 पारियों में किया, जबकि इससे पहले ये रिकॉर्ड वेस्ट इंडीज के दिग्गज क्रिस गेल के नाम था। गेल ने 343 पारियों में ये मुकाम हासिल किया था। पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली 360 पारियों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर को 368 और जोस बटलर को 405 पारियां लगी थीं। 

रिकॉर्ड बनाने के दिन बाबर का बल्ला भी जमकर बोला। उन्होंने नाबाद 87 रन की पारी खेली और नंबर तीन पर आए कुसल मेंडिस के साथ 191 रनों की साझेदारी की। इस जोड़ी की बदौलत पेशावर ने 20 ओवरों में 246 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया और कराची को हराकर अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। 
Fri, 10 Apr 2026 13:27:00 +0530

  Videos
See all

Gonda News: महिला से मजाक करना पड़ गया भारी! #shorts | Viral Video | Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-10T08:24:16+00:00

Yashwant Varma Breaking News: जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी | Resignation | N18V #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-10T08:30:00+00:00

Middle East Crisis:ईरान का साथ पाकिस्तान को पड़ेगा भारी?| Trump | Iran-Israel US Conflict #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-10T08:30:15+00:00

Massive Cyber Attack on China Army LIVE: चीन की सेना पर हुआ हमला | Iran US Israel | Trump | Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-10T08:31:52+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers