कुछ घंटों में ही टूटने वाला है संघर्ष विराम? इजरायल उठाने वाला है ये कदम
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हाल ही में घोषित 14 दिनों का सीजफायर अभी पूरी तरह लागू भी नहीं हो पाया था कि हालात एक बार फिर बिगड़ते नजर आने लगे हैं. कुछ ही घंटों में तनाव फिर से बढ़ गया है, जिससे मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दरअसल सीजफायर के कुछ घंटों के अंदर ही इजरायल आग बबूला हो उठा है यही नहीं इजरायल ने ईरान पर हमले की धमकी तक दे डाली है. जानते हैं क्या है पूरा मामला.
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि दक्षिणी लेबनान में गोलीबारी जल्द नहीं रुकी, तो उसकी वायु सेना और मिसाइल यूनिट्स इजरायल की राजधानी तेल अवीव को निशाना बनाएंगी. यह बयान स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि संघर्ष किसी भी वक्त फिर भड़क सकता है. दरअसल ईरान का कहना है कि इजराल अब भी रुक रुक कर फायरिंग कर रहा है. यही वजह है कि ईरान ने कड़ी चेतावनी है दी है जिस पर पलटवार करते हुए इजरायल ने भी बड़े हमले की धमकी दे डाली है.
सीजफायर की शर्तें और रणनीतिक महत्व
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित इस 14 दिन के संघर्ष-विराम का मकसद क्षेत्र में तनाव कम करना और रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz को फिर से खोलना है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया है, लेकिन उसने यह स्पष्ट किया है कि यह तभी संभव है जब उस पर होने वाले सभी हमले पूरी तरह बंद किए जाएं.
इजरायल का रुख, हिज्बुल्ला पर कार्रवाई जारी
दूसरी ओर बेंजामिन नेत्यनाहू ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सीजफायर लेबनान में लागू नहीं होगा. इजरायल का कहना है कि लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ उसका सैन्य अभियान जारी रहेगा. इजरायली सेना का मानना है कि हिज्बुल्ला ईरान के समर्थन से क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है. यही रुख मौजूदा तनाव को और जटिल बना रहा है.
ईरान की शर्त, हिज्बुल्ला पर हमले भी रुकें
ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि इजरायल हिज्बुल्ला के खिलाफ हमले जारी रखता है, तो वह भी अपनी सैन्य प्रतिक्रिया रोकने को तैयार नहीं होगा. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि शांति तभी संभव है जब सभी मोर्चों पर हिंसा थमे.
क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक असर
मध्य-पूर्व में यह तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुला रहना अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेहद जरूरी है.
शांति की राह मुश्किल
हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सीजफायर के बावजूद शांति अभी दूर है. अलग-अलग पक्षों की शर्तें और रणनीतिक हित इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं. आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह संघर्ष थमेगा या फिर एक बड़े युद्ध का रूप लेगा. फिलहाल, दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व की हर गतिविधि पर टिकी हुई हैं.
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एचडीएफसी बैंक में कामकाज से जुड़ी कोई समस्या नहीं, बैंकिंग सेक्टर स्थिर: आरबीआई गवर्नर
मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक को एचडीएफसी बैंक में कामकाज से जुड़ी कोई समस्या नहीं मिली है।
हाल ही में एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष अतानु चक्रवर्ती ने कुछ घटनाओं और तौर-तरीकों से सहमत न होने के कारण इस्तीफा दे दिया था।
मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) के फैसलों के ऐलान के बाद आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि नियामक पर्यवेक्षण में बैंक के कामकाज में कोई समस्या नहीं मिली है।
उन्होंने कहा,“मौजूदा बैंकिंग कानून स्पष्ट और प्रभावी हैं, और फिलहाल इनमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक स्थिति की समीक्षा करेगा।”
मल्होत्रा ने यह भी आश्वासन दिया कि बैंकिंग क्षेत्र में कोई व्यापक चिंता की बात नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “प्रणाली सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है, और ऐसी व्यक्तिगत घटनाएं बैंकों के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती हैं।”
मल्होत्रा ने बताया,“एचडीएफसी बैंक में मुनाफा या वित्तीय मजबूती से संबंधित कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है।”
उनकी ये टिप्पणियां एचडीएफसी बैंक में हाल ही में हुए घटनाक्रम के बाद आई हैं, जहां अध्यक्ष ने मूल्यों और नैतिकता पर मतभेदों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया था।
इस घटनाक्रम ने देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता में शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक बैंक बोर्ड्स के लिए दिशानिर्देशों को अपडेट करने की योजना बना रहा है।
इसका उद्देश्य बोर्ड्स को दैनिक परिचालन में उलझने के बजाय प्रमुख नीतिगत निर्णयों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है।
उन्होंने बताया कि बैंकों के अनुरोधों के बाद इन नियमों की समीक्षा शुरू की गई थी।
प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य प्रबंधन को नियमित परिचालन मामलों को संभालने की अनुमति देकर बोर्ड सदस्यों के समय का बेहतर उपयोग करना है, जबकि बोर्ड बड़े रणनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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