Hanuman Jayanti 2026: कई शुभ योग में हनुमान जयंति आज, जानें पूजा का मुहूर्त और मनोकामना पूर्ति के उपाय
Hanuman Jayanti 2026: भक्तों के संकटमोचक और भगवान राम के परम भक्त बजरंग बली का आज जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। आज के इस शुभ दिन पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। आइए जानें इस दिन के शुभ मुहूर्त और मनोकामना पूर्ति के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में
Hanuman Chalisa Lyrics: आखिर क्या है हनुमान चालीसा? हनुमान जयंती पर कितनी बार करें पाठ, पढ़ें चालीसा
Hanuman Jayanti 2026: चैत्र पूर्णिमा का दिन धार्मिक रूप से बेहद खास होता है. इस दिन भगवान राम के भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष आज यानी 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन बजरंगबली की पूजा करते हैं, उन्हें प्रसाद चढ़ाया जाता है और व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि आज के दिन अगर उनकी चालीसा का पाठ किया जाए तो जीवन में तरक्की, सफलता और सकारात्मकताा आती है. चलिए पढ़ते हैं हनुमान चालीसा.
हनुमान चालीसा क्या है?
हनुमान चालीसा एक प्रचलित बजरंगबली का भजन है. इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है. इस चालीसा भजन में 40 चौपाईयां हैं. हनुमान चालीसा की शुरुआत और अंत में 2-2 दोहे भी हैं. चालीसा में उनकी राम के प्रति सच्ची भक्ति के बारे में वर्णन किया गया है. जो साधक इसका पाठ लगातार 40 दिनों तक करता है तो उसके दुख समाप्त हो जाते हैं और उसे अष्ट सिद्धि और नव निधियों का वरदान प्राप्त होता है.
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कितनी बार करें हनुमान चालीसा का पाठ?
हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए आपको सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना है. इसके बाद स्नान आदि करके भगवान की पूजा का संकल्प लेना है. इसके बाद हनुमान जी के समक्ष बैठे, उन्हें फल, फूल और दीया जलाएं. इसके बाद श्रीराम का नाम लेते हुए हनुमान चालीसा का पाठ शुरू करें. आप हनुमान चालीसा का पाठ 1, 3, 7, 11, 100, 101 और 108 बारी कर सकते हैं.
श्री हनुमान चालीसा (Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग वन्दन॥
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा। विकट रुप धरि लंक जरावा॥
भीम रुप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुवीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिकपाल जहां ते। कवि कोबिद कहि सके कहां ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु सन्त के तुम रखवारे।असुर निकन्दन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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