Hanuman Chalisa Lyrics: आखिर क्या है हनुमान चालीसा? हनुमान जयंती पर कितनी बार करें पाठ, पढ़ें चालीसा
Hanuman Jayanti 2026: चैत्र पूर्णिमा का दिन धार्मिक रूप से बेहद खास होता है. इस दिन भगवान राम के भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष आज यानी 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन बजरंगबली की पूजा करते हैं, उन्हें प्रसाद चढ़ाया जाता है और व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि आज के दिन अगर उनकी चालीसा का पाठ किया जाए तो जीवन में तरक्की, सफलता और सकारात्मकताा आती है. चलिए पढ़ते हैं हनुमान चालीसा.
हनुमान चालीसा क्या है?
हनुमान चालीसा एक प्रचलित बजरंगबली का भजन है. इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है. इस चालीसा भजन में 40 चौपाईयां हैं. हनुमान चालीसा की शुरुआत और अंत में 2-2 दोहे भी हैं. चालीसा में उनकी राम के प्रति सच्ची भक्ति के बारे में वर्णन किया गया है. जो साधक इसका पाठ लगातार 40 दिनों तक करता है तो उसके दुख समाप्त हो जाते हैं और उसे अष्ट सिद्धि और नव निधियों का वरदान प्राप्त होता है.
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कितनी बार करें हनुमान चालीसा का पाठ?
हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए आपको सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना है. इसके बाद स्नान आदि करके भगवान की पूजा का संकल्प लेना है. इसके बाद हनुमान जी के समक्ष बैठे, उन्हें फल, फूल और दीया जलाएं. इसके बाद श्रीराम का नाम लेते हुए हनुमान चालीसा का पाठ शुरू करें. आप हनुमान चालीसा का पाठ 1, 3, 7, 11, 100, 101 और 108 बारी कर सकते हैं.
श्री हनुमान चालीसा (Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग वन्दन॥
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा। विकट रुप धरि लंक जरावा॥
भीम रुप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुवीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिकपाल जहां ते। कवि कोबिद कहि सके कहां ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु सन्त के तुम रखवारे।असुर निकन्दन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
अजय देवगन@57; जावेद जाफरी के खाने में भांग मिलाई:नहाते वक्त ‘जख्म’ के लिए हामी भरी, जीता नेशनल अवॉर्ड, 16 फिल्मों ने ₹100 करोड़+ कमाए
साल था 1991 का और फिल्म ‘फूल और कांटे’ थी, जब एक लड़का बड़े पर्दे पर आया। दो चलती बाइकों पर खड़े होकर की गई उसकी एंट्री इतनी आइकॉनिक थी कि यह फिल्म देखने वाले लोग आज भी इसे भूल नहीं पाए हैं। शुरुआत में उसे एक्शन हीरो माना गया… लेकिन उसने खुद को सीमित नहीं रखा। ‘जख्म’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्मों में उसने शानदार एक्टिंग की, जिसे लोगों के साथ क्रिटिक्स ने भी पसंद किया। फिर ‘गोलमाल’ और ‘ऑल द बेस्ट’ जैसी फिल्मों में लोगों को हंसाया… और ‘सिंघम’ बनकर मास हीरो भी बना। उसने 35 साल के करियर में 16 से ज्यादा 100 करोड़ की कमाई वाली फिल्में दीं और कई नेशनल अवॉर्ड भी जीते। हम बात कर रहे हैं अजय देवगन की। आज वही अजय देवगन 57 साल के हो चुके हैं। उनके जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी के दिलचस्प किस्से- किस्सा 1: पिता की बंदूक चुपके से निकालकर ले गए अजय देवगन का जन्म 2 अप्रैल 1969 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम विशाल वीरेंद्र देवगन है। वे फिल्मी परिवार से आते हैं। उनके पिता वीरू देवगन हिंदी फिल्मों के मशहूर स्टंट और एक्शन डायरेक्टर थे, जबकि मां वीना फिल्म प्रोड्यूसर थीं। इसी वजह से अजय का बचपन से फिल्मों से कनेक्शन रहा। अजय बचपन में ही अपने पिता के साथ फिल्म एडिटिंग में हाथ बंटाने लगे थे। 8-9 साल की उम्र में उन्हें कैमरा और शूटिंग की समझ आने लगी थी। 12-13 साल की उम्र तक उन्होंने छोटे-छोटे फिल्म प्रोजेक्ट बनाना शुरू कर दिया था। उनके पिता ने उन्हें कैमरा दिया था, जिससे वे खुद शूटिंग करते और सेट तैयार करते थे। 15 साल की उम्र तक वे स्पेशल इफेक्ट्स भी करने लगे थे। कॉलेज के दिनों में भी वे पढ़ाई के साथ फिल्ममेकिंग सीखते रहे। इसी दौरान डायरेक्टर शेखर कपूर ने उनके काम को देखकर उन्हें असिस्टेंट बनने का मौका दिया। अजय देवगन अपने कॉलेज के दिनों में काफी मस्तीखोर थे। मिड डे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कॉलेज के दिनों में वो दो बार जेल भी जा चुके हैं। एक बार तो वे अपने पिता की बंदूक चुपके से निकालकर बाहर ले गए थे। किस्सा 2: फिल्मों में आने के लिए बदला नाम अजय देवगन का असली नाम विशाल देवगन है, लेकिन फिल्मों में आने से पहले उन्होंने नाम बदल लिया। इसके पीछे की वजह यह थी कि जब अजय फिल्मों में डेब्यू करने वाले थे, उस समय कई नए एक्टर्स विशाल नाम से लॉन्च हो रहे थे। उनमें से एक मनोज कुमार का बेटे (विशाल गोस्वामी) भी थे। इससे इंडस्ट्री में कन्फ्यूजन पैदा हो रहा था। इसी वजह से उनका नाम विशाल से अजय कर दिया गया। अजय का फिल्मी करियर भी दिलचस्प तरीके से शुरू हुआ। उनके पिता चाहते थे कि वे एक्टर बनें, लेकिन अजय की रुचि फिल्ममेकिंग में ज्यादा थी। जब उन्हें फिल्म फूल और कांटे ऑफर हुई, तो उन्होंने पहले मना कर दिया था, लेकिन पिता और फिल्म के डायरेक्टर कुकू कोहली के कहने पर उन्होंने फिल्म की। किस्सा 3: पहली फिल्म बड़ी फिल्म के सामने रिलीज अजय की पहली फिल्म फूल और कांटे की रिलीज से जुड़ा दिलचस्प किस्सा है। यह फिल्म यश चोपड़ा की लम्हे के साथ रिलीज हुई थी, जिसमें श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारे थे। उस समय लम्हे को बहुत बड़ी फिल्म माना जा रहा था। अजय ने ‘आप की अदालत’ में बताया था कि फिल्म के प्रीमियर पर अनिल कपूर उनसे मिलने आए थे। उन्होंने अजय को सलाह दी थी कि इतनी बड़ी फिल्म के सामने अपनी डेब्यू फिल्म रिलीज करना सही फैसला नहीं है। उन्होंने कहा था कि नई कास्ट, नया डायरेक्टर और नया प्रोड्यूसर होने की वजह से यह जोखिम भरा हो सकता है। अजय के मुताबिक, अनिल ने यह सलाह नेक इरादे से दी थी। वे बचपन से उन्हें जानते थे और उनकी मदद करना चाहते थे, लेकिन जब फिल्में रिलीज हुईं, तो नतीजा उल्टा निकला। लम्हे फ्लॉप हुई, जबकि फूल और कांटे सुपरहिट हुई। किस्सा 4: नहाते वक्त फिल्म जख्म के लिए हामी भरी, मिला नेशनल अवॉर्ड अजय देवगन ने द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में फिल्म जख्म को लेकर बताया था कि यह फिल्म उन्हें अनोखे तरीके से मिली, जब डायरेक्टर महेश भट्ट ने अचानक फोन कर उन्हें कहानी सुनानी शुरू कर दी। अजय ने बताया था कि उस समय वह हैदराबाद में शूटिंग कर रहे थे और होटल के कमरे में थे। उस दौर में मोबाइल नहीं होते थे, इसलिए लैंडलाइन पर कॉल आया। वह शावर ले रहे थे, तभी फोन बजा और उन्होंने कॉल उठाया। फोन पर महेश भट्ट थे। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिंदगी की आखिरी फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं और इसके बाद काम छोड़ देंगे। अजय के अनुसार, महेश भट्ट ने बिना समय गंवाए तुरंत फिल्म की कहानी सुनानी शुरू कर दी। अजय ने कहा था कि उन्होंने महेश भट्ट से कहा कि वह नहा रहे हैं और फिल्म कर रहे हैं। इसी तरह फिल्म बनी थी। इस फिल्म में अजय की एक्टिंग की काफी सराहना हुई और इसके लिए उन्हें करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड (बेस्ट एक्टर) मिला था। किस्सा 5: पहला नेशनल अवॉर्ड लेने नहीं पहुंचे थे 1998 में फिल्म जख्म के लिए अजय देवगन को जब पहला नेशनल अवॉर्ड मिला था, तब वे इसे लेने के लिए पहुंच नहीं पाए थे। उस समय वे ऊटी में शूटिंग कर रहे थे। दिल्ली जाने के लिए सिर्फ एक फ्लाइट थी, जो उसी दिन कैंसिल हो गई। इस वजह से अजय खुद सेरेमनी में नहीं पहुंच सके। उनकी मां मुंबई से दिल्ली गईं और उनकी ओर से अवॉर्ड रिसीव किया। अजय ने बताया था कि यह उनकी गलती नहीं थी, बल्कि हालात ऐसे थे। हालांकि, वे अपना दूसरा नेशनल अवॉर्ड लेने के लिए खुद पहुंचे थे। फिल्म जख्म के बाद उन्हें बेस्ट एक्टर कैटेगरी में द लीजेंड ऑफ भगत सिंह और ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर के लिए भी नेशनल अवॉर्ड मिला। किस्सा 6: जावेद जाफरी के खाने में भांग मिला दी थी अजय देवगन अपने मजाकिया अंदाज और सेट पर प्रैंक करने के लिए जाने जाते हैं। एक्टर जावेद जाफरी ने मिर्ची प्लस को दिए इंटरव्यू में अजय के प्रैंक से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया था। यह किस्सा फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ की शूटिंग का है। जावेद जाफरी ने बताया था कि महाशिवरात्रि के मौके पर अजय ने मजाक में सेट पर मौजूद खाने में भांग मिला दी थी। जावेद, जो न शराब पीते हैं और न सिगरेट, उन्होंने अनजाने में वही खाना ज्यादा खा लिया। कुछ देर बाद उन्हें अजीब महसूस होने लगा। उन्होंने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे वे ब्लैक होल में गिर रहे हों और आसपास सब कुछ हिल रहा हो। हालत इतनी खराब हो गई कि वे घबरा गए और लगा कि वे बच नहीं पाएंगे। घबराहट में जावेद अपने कमरे में चले गए। उन्होंने अपने असिस्टेंट, पत्नी और बेटे मीजान जाफरी को फोन किया। उन्हें लगा यह उनका आखिरी समय है, इसलिए वे वसीयत लिखवाने को तैयार हो गए थे। बाद में पता चला कि यह अजय देवगन का मजाक था। किस्सा 7: फिल्म पब्लिसिस्ट को ड्रग्स केस का आरोपी बना दिया अजय देवगन के प्रैंक्स से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा है। फिल्म पब्लिसिस्ट राजेंद्र राव को अजय ने प्रैंक कर नकली ड्रग्स के केस में फंसा दिया था। मिड डे को दिए इंटरव्यू में अजय ने इसे स्वीकार किया था। बता दें कि फिल्म पब्लिसिस्ट वह व्यक्ति होता है जो किसी फिल्म या कलाकार की पब्लिसिटी और प्रमोशन संभालता है। राजेंद्र राव ने लगान, स्वदेस और सरफरोश जैसी फिल्मों का प्रमोशन किया था। साल 2003-2004 में अजय देवगन दीव (दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव) में एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें अमीषा पटेल भी थीं। शूटिंग दीव फोर्ट के आसपास चल रही थी। उसी दौरान राजेंद्र राव भी मौजूद थे। वो हंसमुख और मजाकिया इंसान थे, लेकिन उस दिन उनका मूड थोड़ा खराब था क्योंकि उनका एक बैग मुंबई एयरपोर्ट पर छूट गया था। वे बार-बार बैग छूटने वाली बात कर रहे थे। अजय ने सोचा कि क्यों न इस पर एक प्रैंक किया जाए। उन्होंने दीव के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस से संपर्क किया और पूरा प्लान तैयार किया। उन्होंने चुपके से राजेंद्र राव की जेब में नमक का एक छोटा पैकेट डाल दिया, ताकि बाद में उसे ड्रग्स बताया जा सके। शूटिंग के दौरान अचानक सेट पर पुलिस की एक वैन पहुंची। साथ में सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस भी थे, जो राजेंद्र राव को ढूंढ रहे थे। राजेंद्र को लगा कि उनका बैग मिल गया है, लेकिन मामला अलग निकला। पुलिस ने बताया कि उनके बैग में भारी मात्रा में ड्रग्स मिली है और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। सबके सामने उन्हें पकड़कर ले जाया गया। माहौल एकदम सीरियस हो गया। राजेंद्र राव को थाने ले जाकर पूछताछ की गई। उनसे सवाल पूछे गए। तलाशी में उनकी जेब से नमक का पैकेट निकला। पुलिस ने उसे चखकर कहा, “यह कोकीन है।” यह सुनते ही राजेंद्र बहुत घबरा गए। शाम होते-होते हालत इतनी खराब हो गई कि पुलिस अधिकारी ने अजय देवगन को फोन करके कहा कि अब यह मजाक ज्यादा हो रहा है और इसे खत्म करना चाहिए। करीब 8 बजे शाम को सच्चाई सामने आई और राजेंद्र राव को छोड़ दिया गया। जब राजेंद्र वापस आए, तो वे बेहद नाराज थे। उन्होंने अजय को खूब डांटा और कहा कि ऐसा मजाक कभी किसी के साथ नहीं करना चाहिए। यहां तक कि उन्होंने खुद को होटल के कमरे में करीब 24 घंटे के लिए बंद कर लिया। बाद में दोनों ने साथ बैठकर ड्रिंक की और मामला शांत हुआ। किस्सा 8: शूटिंग के दौरान रसगुल्ले को शराब में भिगोकर खाते थे अजय देवगन ने शेफ संज्योत कीर को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शूटिंग या लंबी यात्राओं के दौरान उनके पास आराम से बैठकर ड्रिंक करने का समय नहीं होता था। ऐसे में उन्होंने एक अनोखा तरीका निकाल लिया, जिसे वे मजाक में ‘रसगुल्ला लिकर शॉट’ कहते थे। वे सबसे पहले रसगुल्ले को अच्छी तरह निचोड़कर उसकी सारी चाशनी निकाल देते थे। फिर उसे पानी से धोते, ताकि उसका मीठापन पूरी तरह खत्म हो जाए। इसके बाद उस सूखे रसगुल्ले को अपनी पसंदीदा शराब में डाल देते। रसगुल्ला स्पंज की तरह सारी शराब सोख लेता था। अजय ने हंसते हुए कहा था कि इस तरह उन्हें ड्रिंक और चखना दोनों एक साथ मिल जाता था। किस्सा 9: काजोल ने अजय को पहली बार देखकर खड़ूस कहा था बॉलीवुड में कई लव स्टोरीज आईं और गईं, लेकिन अजय और काजोल की कहानी आज भी एक खास जगह रखती है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती, जहां शुरुआत में दोनों एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे, फिर दोस्ती, डेटिंग और शादी तक बात पहुंची। उनकी शादी को 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं और बंधन अब भी मजबूत है। साल 1995 में फिल्म ‘हलचल’ के सेट पर दोनों की पहली मुलाकात हुई। सेट पर जब काजोल ने पहली बार अजय को देखा, तो उन्हें वह काफी अलग लगे। एक कोने में शांत बैठे, कम बोलने वाले अजय को देखकर काजोल ने सोचा था कि वह बहुत खड़ूस इंसान हैं। लेकिन धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। ‘हाय-हैलो’ से शुरू हुई ये जान-पहचान जल्द ही दोस्ती में बदल गई। काजोल को एहसास हुआ कि अजय कम बोलते जरूर हैं, लेकिन बेहद समझदार हैं। दोनों उस समय अलग-अलग रिश्तों में थे, लेकिन एक-दूसरे से अपनी बातें शेयर करते थे। यहीं से उनके रिश्ते की नींव पड़ी। समय के साथ दोस्ती प्यार में बदल गई। करीब चार साल तक दोनों ने रिश्ता प्राइवेट रखा। फिर 24 फरवरी 1999 को शादी की। इसमें सिर्फ परिवार और करीबी लोग शामिल हुए। किस्सा 10: फ्लॉप के बाद भी अजय ने नहीं छोड़ा रोहित का साथ अजय देवगन और रोहित शेट्टी बॉलीवुड की सबसे मजबूत एक्टर-डायरेक्टर जोड़ियों में से एक हैं। रोहित ने अपने करियर की शुरुआत अजय की पहली फिल्म फूल और कांटे में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की थी। तब से लेकर आज तक दोनों साथ हैं। जब रोहित शेट्टी डायरेक्टर बनना चाहते थे, तब अजय देवगन ने उन पर भरोसा दिखाया और 2003 में फिल्म जमीन से उन्हें पहला ब्रेक दिया। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली। पहली फिल्म फ्लॉप होने के बाद जब रोहित ने अपनी दूसरी फिल्म गोलमाल को लेकर अजय को फोन किया, तो उन्होंने कहा कि तेरे को जो फिल्म बनानी है बना, मैं तेरे साथ खड़ा हूं क्योंकि तेरी पहली फिल्म नहीं चली थी। इसके बाद फिल्म गोलमाल बनी और यह हिट हुई। बाद में इस जोड़ी ने गोलमाल सीरीज और सिंघम जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। इनकी फिल्मों ने मिलकर बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की कमाई की है। अजय देवगन की अपकमिंग फिल्में 2026 में अजय देवगन की कई बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं। हैप्पी बर्थडे जोशी उनकी पहली Gen-AI फिल्म है, जो सच्ची घटनाओं पर आधारित है और यह आज उनके जन्मदिन के मौके पर रिलीज हो गई है। वहीं, धमाल 4 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में आएगी, जबकि दृश्यम 3 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी। …………………… बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... कंगना रनोट@40; आदित्य पंचोली के डर से बिल्डिंग से कूदीं:चंबल में डाकुओं के गन पॉइंट पर आईं, 4 नेशनल अवॉर्ड जीतकर बनाया रिकॉर्ड साल था 2005 का जब 18-19 साल की लड़की, मुंबई में हीरोइन बनने का सपना लेकर आई थी, ऑडिशन के जरिए काम ढूंढ रही थी। एक दिन, जब वो कॉफी के एक एड के लिए गई, तब कुछ लड़कियां फिल्म गैंगस्टर के ऑडिशन के लिए महेश भट्ट के ऑफिस जा रही थीं। पूरी खबर पढ़ें....
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