UPI Payment Without Internet: नेट गया तो क्या हुआ! बिना इंटरनेट भी ऐसे करें UPI पेमेंट, जानें आसान तरीका
UPI Payment Without Internet: आज के डिजिटल जमाने में हम कैश रखना भूल सकते हैं, लेकिन मोबाइल फोन कभी नहीं भूलते. चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह 'स्कैन एंड पे' आम हो चुका है. लेकिन असली परेशानी तब होती है जब आप पेमेंट करने जाएं और तभी आपका इंटरनेट काम करना बंद कर दे या फोन में नेटवर्क ही ना हो. ऐसे समय में काफी लोग परेशान हो जाते हैं. लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब UPI पेमेंट के लिए हमेशा इंटरनेट की जरूरत नहीं होती. आप बिना डेटा और बिना वाई-फाई के भी आसानी से पैसे भेज सकते हैं. यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां नेटवर्क की समस्या रहती है.
क्या है यह ऑफलाइन UPI सुविधा?
यह सुविधा साल 2022 में शुरू की गई थी, ताकि डिजिटल पेमेंट को देश के हर कोने तक पहुंचाया जा सके. इसे USSD तकनीक के जरिए काम करने के लिए बनाया गया है. USSD का मतलब है कि आप बिना इंटरनेट के सीधे मोबाइल नेटवर्क के जरिए बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसी ऐप पर निर्भर नहीं है और इसे किसी भी फोन, चाहे स्मार्टफोन हो या कीपैड फोन, इनमें इस्तेमाल किया जा सकता है.
साधारण फोन से भी हो सकता है पेमेंट
बात अगर इस सुविधा की करें तो इंटरनेट की इसमें जरूरत नहीं पड़ती है. बिना डेटा के भी पेमेंट कर सकते हैं. इसके अलावा हर फोन में काम करता है. स्मार्टफोन और साधारण फोन दोनों में ये सुविधा उपलब्ध है. कम नेटवर्क वाले इलाकों में भी ये फीचर उपयोगी है. गांव या पहाड़ी क्षेत्रों में भी काम करता है. इसके साथ ही कोई ऐप भी डाउनलोड नहीं करना पड़ता, बस सीधे डायल पैड के इस्तेमाल से ही काम हो जाता है.
बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट कैसे करें?
ऑफलाइन UPI पेमेंट करना बहुत आसान है. इसके लिए आपको सिर्फ अपने फोन का डायल पैड इस्तेमाल करना होगा.
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स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
1. कोड डायल करें:
अपने मोबाइल से 99# डायल करें
2. ऑप्शन चुनें:
स्क्रीन पर कई विकल्प आएंगे, इनमें से “पैसे भेजें” (Send Money) चुनें
3. डिटेल्स डालें:
अब आप मोबाइल नंबर, UPI ID या बैंक अकाउंट के जरिए पैसे भेज सकते हैं
4. नाम कंफर्म करें:
सामने वाले व्यक्ति का नाम स्क्रीन पर दिखेगा, उसे ध्यान से चेक करें
5. राशि दर्ज करें:
जितने पैसे भेजने हैं, वह राशि डालें
6. UPI पिन डालें:
अपना UPI पिन डालें और ट्रांजैक्शन पूरा करें
बस कुछ ही सेकंड में आपका पेमेंट हो जाएगा.
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जरूरी बातों का रखें ध्यान
- आपका मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए
- सही जानकारी डालना बहुत जरूरी है
- UPI पिन किसी के साथ शेयर न करें
- यह सुविधा आमतौर पर छोटे ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा उपयोगी होती है
अब अगर कभी आपका इंटरनेट बंद हो जाए या नेटवर्क कमजोर हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है. 99# सेवा की मदद से आप आसानी से UPI पेमेंट कर सकते हैं. यह सुविधा डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो इंटरनेट की समस्या से जूझते हैं.
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ट्रैफिक जाम से हो रहा भारी आर्थिक नुकसान, ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ की मांग: राघव चड्ढा
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को देश के बड़े महानगरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए ‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ बनाने की मांग की।
संसद के उच्च सदन में शहरी चुनौतियों पर बोलते हुए चड्ढा ने कहा कि ट्रैफिक जाम ने मेट्रो शहरों को “विशाल पार्किंग लॉट” में बदल दिया है, जहां लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के बजाय सड़कों पर ही घंटों फंसे रहते हैं।
उन्होंने दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों के प्रमुख जाम वाले इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में रिंग रोड, आश्रम चौक, धौला कुआं और एनएच-8 दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग पर भारी जाम की स्थिति रहती है। वहीं कोलकाता में ए.जे.सी. बोस रोड और चौरंगी रोड, बेंगलुरु में सिल्क बोर्ड जंक्शन और आउटर रिंग रोड, जबकि मुंबई में अंधेरी, बांद्रा और फोर्ट क्षेत्र लगातार जाम से जूझ रहे हैं।
चड्ढा ने कहा, “जब आप इन जगहों पर फंसते हैं तो ऐसा लगता है कि सड़क पर नहीं, बल्कि किसी लंबी पार्किंग में खड़े हैं। लोग अब ट्रैफिक में फंसकर अपनी कार से ही वर्चुअल मीटिंग्स करने को मजबूर हो रहे हैं।”
उन्होंने ट्रैफिक जाम को सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट बताते हुए कहा कि बेंगलुरु में एक व्यक्ति साल में औसतन 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है। इसके बाद पुणे में 152 घंटे, मुंबई में 126 घंटे, कोलकाता में करीब 110 घंटे, दिल्ली में लगभग 104 घंटे और चेन्नई में करीब 100 घंटे समय बर्बाद होता है।
उन्होंने कहा, “औसतन एक व्यक्ति साल में 100 से 168 घंटे ट्रैफिक में फंसा रहता है। यह सिर्फ समय नहीं, बल्कि देश की उत्पादकता का नुकसान है।”
चड्ढा ने चेतावनी दी कि हर साल करीब 2.5 करोड़ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन से स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि इनमें ज्यादातर निजी वाहन हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की कि इस समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई जाए, जिसमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू करना और वैज्ञानिक पार्किंग नीति तैयार करना शामिल हो।
अंत में उन्होंने कहा, “अगर हमारे शहर ट्रैफिक जाम में ही फंसे रहेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार नहीं पकड़ पाएगी।”
--आईएएनएस
डीएससी
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