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Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी अब रोहित-विराट के साथ खेलेंगे? जन्मदिन पर हट गया सबसे बड़ा रोड़ा

Vaibhav Sooryavanshi birthday: भारतीय क्रिकेट में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है वो हैं वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में इस युवा बल्लेबाज ने ऐसे कारनामे कर दिखाए, जिनसे वह सीधे टीम इंडिया के दरवाजे पर दस्तक दे रहा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब वह सीनियर टीम के लिए खेलने के योग्य हो गया है? जवाब है- हां।

दरअसल, इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू के लिए न्यूनतम उम्र 15 साल तय है, जो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के नियमों के मुताबिक, लागू होती है। वैभव 27 मार्च को 15 साल के हो गए हैं, यानी अब वे आधिकारिक रूप से भारत की सीनियर टीम के लिए खेलने के पात्र हो चुके। खास बात यह है कि उनका जन्मदिन IPL 2026 शुरू होने से पहले आया है।

वैभव ने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने IPL में शतक भी जड़ दिया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट में भी धमाकेदार प्रदर्शन किया है।

हाल ही में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में वैभव का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 7 पारियों में कुल 439 रन बनाए और 30 छक्के लगाए, जो टूर्नामेंट के इतिहास में किसी भी खिलाड़ी द्वारा सबसे ज्यादा हैं। उनकी इस शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब भी मिला।

फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी खेली, जो किसी भी ICC टूर्नामेंट (सीनियर या जूनियर) के फाइनल में सबसे बड़ा स्कोर है। इस मैच में भी उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

वैभव की बल्लेबाजी की खासियत है कि वह पूरे मैदान में शॉट खेल सकते और उनका स्ट्राइक रेट हमेशा ऊंचा रहता। वह उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने यूथ वनडे में 150+ के कई स्कोर बनाए हैं। इस लिस्ट में श्रीलंका के पुलिंदु परेरा और दक्षिण अफ्रीका के जोरिच वैन शाल्कविक जैसे नाम भी शामिल हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि उन्हें अभी दबाव में खेलने का अनुभव बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन उनकी निडरता, पावर हिटिंग और शॉट मेकिंग क्षमता उन्हें खास बनाती है। आने वाले समय में अगर उन्हें सही मौके और एक्सपोजर मिलता है, तो वे टीम इंडिया के लिए बड़े मैच विनर साबित हो सकते हैं।

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Bay of Pigs Invasion: भारत के हरियाणा राज्य से भी छोटे देश पर जब अमेरिका ने किया हमला, हार भी मिली और चुकानी पड़ी भारी कीमत

अंग्रेजी की एक बहुत ही मशहूर कहावत है विक्ट्री हैज 100 फादर्स, बट डिफिट इज एन ऑर्फन यानी सफलता का श्रेय लेने के लिए सब आगे आते हैं, लेकिन असफलता की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। ये वाक्या किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा कही गई थी। साल 1961 के बे ऑफ पिग्स में मिली नाकामी को लेकर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग किया था। 1961 में अमेरिका ने क्यूबा में फ़िदेल कास्त्रो की सरकार गिराने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन को इतिहास में “बे ऑफ़ पिग्स इनवेज़न” के नाम से जाना जाता है। अमेरिका ने कास्त्रो सरकार के विरोध में मौजूद क्यूबाई विद्रोहियों और निर्वासित लोगों को सैन्य प्रशिक्षण, हथियार और आर्थिक मदद दी। योजना यह थी कि ये विद्रोही क्यूबा में हमला करेंगे और जनता का समर्थन मिलते ही कास्त्रो की सरकार गिर जाएगी। लेकिन यह योजना पूरी तरह फेल हो गई।

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अमेरिका का बे ऑफ़ पिग्स इनवेज़न क्या है

यह कहानी 1950 के दशक के अंत में शुरू हुई जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित शासक बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया। कास्त्रो के आते ही क्यूबा में अमेरिकी कंपनियों के दबदबे वाले चीनी के खेतों, खानों और होटलों पर सरकार ने कब्ज़ा कर लिया। इससे नाराज होकर क्यूबा के कई अमीर लोग भागकर अमेरिका के फ्लोरिडा चले गए। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कास्त्रो रूस (सोवियत संघ) के करीब जा रहे थे, जो उस समय अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था। कोल्ड वॉर के उस दौर में अमेरिका को लगा कि उसके ठीक बगल में एक कम्युनिस्ट देश का होना "गले पर चाकू" रखने जैसा है। अमेरिका को डर था कि कास्त्रो का प्रभाव पूरे लातिन अमेरिका में फैल जाएगा और वहां भी कम्युनिस्ट सरकारें बन जाएंगी। इसी तनाव के बीच 1962 में 'क्यूबा मिसाइल संकट' भी हुआ। अमेरिका ने कास्त्रो को सत्ता से हटाने के लिए हर संभव कोशिश शुरू कर दी थी क्योंकि वह क्यूबा को रूस के मोहरे के रूप में देख रहा था।

आइजनहावर के प्लान पर कैसे फिरा पानी

दूसरे विश्व युद्ध के नायक रहे राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1960 में खुफिया एजेंसी सीआईए को कास्त्रो को हटाने का गुप्त मिशन सौंपा। अमेरिका खुद सीधे युद्ध नहीं करना चाहता था, इसलिए उन्होंने फ्लोरिडा में रह रहे उन क्यूबाई शरणार्थियों को भर्ती किया जो कास्त्रो के खिलाफ थे। लगभग 1,400 लड़ाकों की एक फौज तैयार की गई जिसे 'ब्रिगेड 2506' नाम दिया गया। इन्हें अमेरिका ने हथियार और नावें दीं और ग्वाटेमाला व निकारागुआ के गुप्त शिविरों में कड़ी ट्रेनिंग दी। इस हमले की योजना के दो मुख्य हिस्से थे: पहला, हवाई हमला करके कास्त्रो के लड़ाकू विमानों को जमीन पर ही नष्ट करना। दूसरा, इन बागियों को क्यूबा के समुद्र तट (बे ऑफ पिग्स) पर उतारना ताकि वहां की जनता उनके साथ मिल जाए और देश के भीतर ही विद्रोह भड़क उठे। अमेरिका चाहता था कि यह पूरी दुनिया को एक "घरेलू क्रांति" जैसा दिखे ताकि वह खुद पर लगने वाले किसी भी आरोप से इनकार कर सके। उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में कास्त्रो की सत्ता गिर जाएगी। हालांकि, क्यूबा पर आक्रमण की योजना बनने के दौरान ही अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और जॉन एफ कैनेडी को आइजनहावर के कार्यालय द्वारा तैयार की गई योजना विरासत में मिली। कैनेडी जनवरी 1961 में राष्ट्रपति बने। पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद, उन्हें सीआईए द्वारा फिदेल कास्त्रो के खिलाफ क्यूबा के निर्वासितों को प्रशिक्षित और तैनात करने के लिए चल रहे अभियान के बारे में जानकारी दी गई।

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तीन दिनों के भीतर ही इस पूरे अभियान को कुचल दिया गया

इस असफलता की एक बड़ी वजह यह भी थी कि अमेरिका की ओर से वादा की गई हवाई सहायता समय पर नहीं पहुंच सकी। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी थे और इस नाकामी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को बड़ा झटका लगा। इस घटना के बाद क्यूबा ने अपनी सुरक्षा के लिए सोवियत संघ से नज़दीकियां और बढ़ा लीं। सोवियत संघ को क्यूबा में गुप्त रूप से परमाणु मिसाइलें तैनात करने की अनुमति दे दी गई। अक्टूबर 1962 में अमेरिकी जासूसी विमानों ने इन मिसाइलों का पता लगा लिया। इसके बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव अचानक बहुत बढ़ गया और दुनिया परमाणु युद्ध के बेहद करीब पहुंच गई। करीब 13 दिनों तक चले इस संकट के बाद आखिरकार सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्यूबा से मिसाइलें हटाने पर सहमति दे दी। क्यूबा के आम लोगों ने विद्रोहियों का साथ नहीं दिया और कास्त्रो की सेना ने बेहद तेजी से जवाबी कार्रवाई की। सिर्फ तीन दिनों के भीतर ही इस पूरे अभियान को कुचल दिया गया। इसके बदले में अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी ने क्यूबा पर हमला न करने का वादा किया और साथ ही तुर्की में तैनात अमेरिकी मिसाइलें हटाने पर भी सहमति दी।

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  Sports

IPL 2026: आरसीबी की नजर खिताब बचाने पर, CSK- KKR और मुंबई भी प्रबल दावेदार

मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) 28 मार्च, शनिवार से  शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपना खिताब बचाने के लिए प्रतिबद्ध होगा जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर), चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और मुंबई इंडियंस अपनी खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की कोशिश करेंगे।

आईपीएल में अगले दो महीनों में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ कुछ युवा खिलाड़ियों पर भी नजर रहेगी जो अच्छा प्रदर्शन करके अपनी छाप छोड़ने में कोई कसर नहीं रखेंगे।आरसीबी टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच में चिन्नास्वामी स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद की मेजबानी करेगा और उसका लक्ष्य शानदार शुरुआत करना होगा। लेकिन इस मैच से पहले माहौल थोड़ा गंभीर बना हुआ है क्योंकि पिछले साल चार जून को आरसीबी के खिताब जीतने के जश्न के दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई थी।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ और आरसीबी प्रबंधन ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति को बनाए रखने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। केएससीए ने स्टेडियम में 11 सीटें स्थायी रूप से खाली छोड़ने की घोषणा की है। इस स्टेडियम को आईपीएल मैचों की मेजबानी के लिए राज्य सरकार से अनुमति मिलने से पहले कई अनिश्चित महीनों का सामना करना पड़ा था। आरसीबी के खिलाड़ी पहले मैच के दिन अभ्यास सत्र के दौरान 11 नंबर की जर्सी पहनेंगे।

जहां तक मैच का सवाल है तो आरसीबी और सनराइजर्स दोनों के पास गेंदबाजी संसाधनों की कमी है। आरसीबी को जोश हेज़लवुड और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज यश दयाल के बिना खेलना होगा। दोनों ने 2025 के विजयी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इस वर्ष वे अधिकतर मैचों में बाहर रहेंगे। हेज़लवुड ऑस्ट्रेलिया में चोट से उबरकर पूरी तरह फिट होने के लिए प्रयास कर रहे हैं और वह बाद में टीम में शामिल हो सकते हैं।

यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे यश दयाल पूरे सत्र से बाहर रहेंगे। आरसीबी को अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार, स्पिनर क्रुणाल पंड्या, सुयश शर्मा और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मंगेश यादव पर काफी हद तक निर्भर रहना होगा। सनराइजर्स के कप्तान पैट कमिंस भी शुरुआती चरण में टीम में नहीं होंगे। ईशान किशन को कार्यवाहक कप्तान बनाया गया है। लेकिन सनराइजर्स के बैकअप विकल्प ज्यादा भरोसेमंद नहीं लगते। ब्रायडन कार्स, जयदेव उनादकट, हर्षल पटेल और हर्ष दुबे को सपाट पिचों पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

दोनों टीमें अपनी गेंदबाजी की कमजोरी का बल्लेबाजी से भरपाई करना चाहेंगी। आरसीबी के पास विराट कोहली, टिम डेविड, फिल साल्ट, जैकब बेथेल, कप्तान रजत पाटीदार, रोमारियो शेफर्ड जैसे बल्लेबाज हैं जबकि सनराइजर्स के पास भी ट्रैविस हेड, अभिषेक शर्मा, किशन और हेनरिक क्लासेन के रूप में धाकड़ बल्लेबाज हैं। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के पास कुल मिलाकर 13 आईपीएल खिताब हैं। लेकिन पिछला सत्र उनके लिए अच्छा नहीं रहा था।

मुंबई की टीम पिछले सत्र में चौथे स्थान पर रहकर प्लेऑफ में पहुंची थी। पांच बार की चैंपियन यह टीम अपने इस प्रदर्शन में सुधार करने की कोशिश करेगी। केकेआर और सीएसके क्रमशः आठवें और दसवें स्थान पर रहे थे। उन्होंने अपनी टीमों में काफी बदलाव किया है। सीएसके ने राजस्थान रॉयल्स के पूर्व कप्तान संजू सैमसन को टीम में शामिल किया तथा मैट हेनरी और नूर अहमद को भी टीम में जोड़ा है। सीएसके की टीम महेंद्र सिंह धोनी से संभवत: आखिरी बार शानदार प्रदर्शन की उम्मीद करेंगी, जिन्होंने आईपीएल में अपने भविष्य को लेकर संशय बनाए रखा है।

केकेआर ने टिम सीफर्ट, फिन एलन, रचिन रविंद्र और कैमरन ग्रीन को शामिल करके अपनी बल्लेबाजी को मजबूती दी है। कप्तान अजिंक्य रहाणे शीर्ष क्रम में टीम को एकजुट रखने की भूमिका निभाएंगे और उप-कप्तान रिंकू सिंह को उस फिनिशर की भूमिका में ढलना होगा जो आंद्रे रसेल ने 2014 से लेकर पिछले साल संन्यास लेने से पहले तक निभाई थी। गेंदबाजी में उनके पास वरुण चक्रवर्ती और सुनील नारायण के रूप में दो तुरुप के पत्ते हैं, लेकिन उनका तेज गेंदबाजी विभाग कमजोर है।

राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटन्स अपने नाम पर एक और खिताब जोड़ने की कोशिश करेंगे, जबकि दिल्ली कैपिटल्स, पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपरजायंट्स अपना पहला खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरेंगे। इस आईपीएल में कोहली और रोहित पर भी नजर टिकी रहेगी। इन दोनों को कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है लेकिन वे हमेशा की तरह दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।

कोहली ने पिछले साल आरसीबी की आईपीएल में पहली खिताबी जीत के साथ अपने शानदार रिकॉर्ड में एक और ट्रॉफी जोड़ ली। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह खिलाड़ी अपने पूर्व के प्रदर्शन को दोहराने में सफल रहता या नहीं। कोहली की चुनौती खुद से भी होगी। जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे श्रृंखला के बाद उन्हें भरपूर आराम मिल चुका है।

रोहित ने भी अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। एक बल्लेबाज के रूप में उन्होंने आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया है। इस 38 वर्षीय खिलाड़ी का किसी एक सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 538 रन है। वह अपने इस रिकॉर्ड को सुधारना चाहेंगे और साथ ही मुंबई को उसका छठा खिताब दिलाने में भी अहम भूमिका निभाना चाहेंगे। पिछली प्रतियोगिताओं की तरह इस बार भी कई ऐसे खिलाड़ी अपना प्रभाव छोड़ने की कोशिश करेंगे जिन्होंने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है।

न खिलाड़ियों में दिल्ली कैपिटल्स के औकिब नबी, राजस्थान रॉयल्स के कार्तिक शर्मा, सीएसके के प्रशांत वीर आदि शामिल है। क्या वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे या फिर जाने-माने खिलाड़ियों की ही तूती बोलेगी, अगले 65 दिनों में इसका जवाब मिल जाएगा।

Fri, 27 Mar 2026 14:26:00 +0530

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