Responsive Scrollable Menu

Bay of Pigs Invasion: भारत के हरियाणा राज्य से भी छोटे देश पर जब अमेरिका ने किया हमला, हार भी मिली और चुकानी पड़ी भारी कीमत

अंग्रेजी की एक बहुत ही मशहूर कहावत है विक्ट्री हैज 100 फादर्स, बट डिफिट इज एन ऑर्फन यानी सफलता का श्रेय लेने के लिए सब आगे आते हैं, लेकिन असफलता की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। ये वाक्या किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा कही गई थी। साल 1961 के बे ऑफ पिग्स में मिली नाकामी को लेकर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग किया था। 1961 में अमेरिका ने क्यूबा में फ़िदेल कास्त्रो की सरकार गिराने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन को इतिहास में “बे ऑफ़ पिग्स इनवेज़न” के नाम से जाना जाता है। अमेरिका ने कास्त्रो सरकार के विरोध में मौजूद क्यूबाई विद्रोहियों और निर्वासित लोगों को सैन्य प्रशिक्षण, हथियार और आर्थिक मदद दी। योजना यह थी कि ये विद्रोही क्यूबा में हमला करेंगे और जनता का समर्थन मिलते ही कास्त्रो की सरकार गिर जाएगी। लेकिन यह योजना पूरी तरह फेल हो गई।

इसे भी पढ़ें: US-Israel Iran War Day 28 Updates: ईरान युद्ध पर आज सुरक्षा परिषद की अहम बैठक, हाईफा पोर्ट के पास ड्रोन अटैक

अमेरिका का बे ऑफ़ पिग्स इनवेज़न क्या है

यह कहानी 1950 के दशक के अंत में शुरू हुई जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित शासक बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया। कास्त्रो के आते ही क्यूबा में अमेरिकी कंपनियों के दबदबे वाले चीनी के खेतों, खानों और होटलों पर सरकार ने कब्ज़ा कर लिया। इससे नाराज होकर क्यूबा के कई अमीर लोग भागकर अमेरिका के फ्लोरिडा चले गए। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कास्त्रो रूस (सोवियत संघ) के करीब जा रहे थे, जो उस समय अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था। कोल्ड वॉर के उस दौर में अमेरिका को लगा कि उसके ठीक बगल में एक कम्युनिस्ट देश का होना "गले पर चाकू" रखने जैसा है। अमेरिका को डर था कि कास्त्रो का प्रभाव पूरे लातिन अमेरिका में फैल जाएगा और वहां भी कम्युनिस्ट सरकारें बन जाएंगी। इसी तनाव के बीच 1962 में 'क्यूबा मिसाइल संकट' भी हुआ। अमेरिका ने कास्त्रो को सत्ता से हटाने के लिए हर संभव कोशिश शुरू कर दी थी क्योंकि वह क्यूबा को रूस के मोहरे के रूप में देख रहा था।

आइजनहावर के प्लान पर कैसे फिरा पानी

दूसरे विश्व युद्ध के नायक रहे राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1960 में खुफिया एजेंसी सीआईए को कास्त्रो को हटाने का गुप्त मिशन सौंपा। अमेरिका खुद सीधे युद्ध नहीं करना चाहता था, इसलिए उन्होंने फ्लोरिडा में रह रहे उन क्यूबाई शरणार्थियों को भर्ती किया जो कास्त्रो के खिलाफ थे। लगभग 1,400 लड़ाकों की एक फौज तैयार की गई जिसे 'ब्रिगेड 2506' नाम दिया गया। इन्हें अमेरिका ने हथियार और नावें दीं और ग्वाटेमाला व निकारागुआ के गुप्त शिविरों में कड़ी ट्रेनिंग दी। इस हमले की योजना के दो मुख्य हिस्से थे: पहला, हवाई हमला करके कास्त्रो के लड़ाकू विमानों को जमीन पर ही नष्ट करना। दूसरा, इन बागियों को क्यूबा के समुद्र तट (बे ऑफ पिग्स) पर उतारना ताकि वहां की जनता उनके साथ मिल जाए और देश के भीतर ही विद्रोह भड़क उठे। अमेरिका चाहता था कि यह पूरी दुनिया को एक "घरेलू क्रांति" जैसा दिखे ताकि वह खुद पर लगने वाले किसी भी आरोप से इनकार कर सके। उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में कास्त्रो की सत्ता गिर जाएगी। हालांकि, क्यूबा पर आक्रमण की योजना बनने के दौरान ही अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और जॉन एफ कैनेडी को आइजनहावर के कार्यालय द्वारा तैयार की गई योजना विरासत में मिली। कैनेडी जनवरी 1961 में राष्ट्रपति बने। पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद, उन्हें सीआईए द्वारा फिदेल कास्त्रो के खिलाफ क्यूबा के निर्वासितों को प्रशिक्षित और तैनात करने के लिए चल रहे अभियान के बारे में जानकारी दी गई।

इसे भी पढ़ें: ईरानी विदेश मंत्री अराघची और स्पीकर ग़ालिबफ़ को मारने वाला था इजरायल, पाकिस्तान को लगी इसकी खबर और फिर...

तीन दिनों के भीतर ही इस पूरे अभियान को कुचल दिया गया

इस असफलता की एक बड़ी वजह यह भी थी कि अमेरिका की ओर से वादा की गई हवाई सहायता समय पर नहीं पहुंच सकी। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी थे और इस नाकामी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को बड़ा झटका लगा। इस घटना के बाद क्यूबा ने अपनी सुरक्षा के लिए सोवियत संघ से नज़दीकियां और बढ़ा लीं। सोवियत संघ को क्यूबा में गुप्त रूप से परमाणु मिसाइलें तैनात करने की अनुमति दे दी गई। अक्टूबर 1962 में अमेरिकी जासूसी विमानों ने इन मिसाइलों का पता लगा लिया। इसके बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव अचानक बहुत बढ़ गया और दुनिया परमाणु युद्ध के बेहद करीब पहुंच गई। करीब 13 दिनों तक चले इस संकट के बाद आखिरकार सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्यूबा से मिसाइलें हटाने पर सहमति दे दी। क्यूबा के आम लोगों ने विद्रोहियों का साथ नहीं दिया और कास्त्रो की सेना ने बेहद तेजी से जवाबी कार्रवाई की। सिर्फ तीन दिनों के भीतर ही इस पूरे अभियान को कुचल दिया गया। इसके बदले में अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी ने क्यूबा पर हमला न करने का वादा किया और साथ ही तुर्की में तैनात अमेरिकी मिसाइलें हटाने पर भी सहमति दी।

Continue reading on the app

PSL के पहले दिन ही बवाल: सफेद गेंद बीच मैच में हुई गुलाबी, लाबुशेन बोले- ऐसा पहले नहीं देखा

PSL Pink Ball controversy: पाकिस्तान सुपर लीग 2026 की शुरुआत एक बड़े विवाद के साथ हुई। 26 मार्च को गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए ओपनिंग मैच में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने खिलाड़ियों से लेकर फैंस तक सभी को चौंका दिया। मैच के दौरान सफेद गेंद का रंग बदलकर पहले गुलाबी और फिर गहरा लाल हो गया, जिससे खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए।

यह मुकाबला लाहौर कलंदर्स और हैदराबाद किंग्समैन के बीच खेला गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन जैसे-जैसे पहली पारी आगे बढ़ी, गेंद का रंग बदलता हुआ नजर आया। टीवी कैमरों में साफ दिखा कि गेंद धीरे-धीरे गुलाबी होती जा रही है और बाद में लाल हो गई।

पीएसएल में हुआ बड़ा विवाद
बताया जा रहा है कि यह समस्या खिलाड़ियों की जर्सी से निकले रंग की वजह से हुई। लिमिटेड ओवर क्रिकेट में खिलाड़ी गेंद को चमकाने के लिए अक्सर उसे अपनी जर्सी पर रगड़ते हैं, लेकिन इस मैच में हैदराबाद टीम की मैरून जर्सी का रंग गेंद पर चढ़ गया।

बीच मैच में सफेद गेंद हुई गुलाबी
हैदराबाद किंग्समेन के कप्तान मार्नस लाबुशेन भी इस घटना से हैरान रह गए। उन्होंने मैच के दौरान ही अंपायर से इसकी शिकायत की। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में लाबुशेन ने कहा, 'मैंने दूसरे ओवर के बाद ही अंपायर से कहा कि ये क्या हो रहा है, गेंद लाल हो रही। शायद कपड़ों का रंग लग रहा। मैंने अपने करियर में ऐसा कभी नहीं देखा।'

उन्होंने आगे कहा कि बैट या पैड से थोड़ा रंग लगना सामान्य है, लेकिन जर्सी से रंग आना बेहद असामान्य है और उम्मीद है कि अगले मैचों में इसे ठीक कर लिया जाएगा।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और हैदराबाद टीम को आलोचना का सामना करना पड़ा। एक इंटरनेशनल लीग में इस तरह की चूक ने पाकिस्तान सुपर लीग की प्रोफेशनल छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि इस विवाद के बीच मैच में लाहौर कलंदर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम ने 20 ओवर में 199/4 का मजबूत स्कोर बनाया। फखर जमान ने 53 रन की पारी खेली, जबकि हसीबुल्लाह खान ने नाबाद 40 रन बनाकर टीम को 190 के पार पहुंचाया।

जवाब में हैदराबाद किंग्समेन की टीम पूरी तरह लड़खड़ा गई और 20 ओवर में 130 रन पर ऑलआउट हो गई। उबैद शाह, सिकंदर रजा और हारिस रऊफ ने दो-दो विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया। लाहौर ने यह मुकाबला 69 रन से जीत लिया।

गौरतलब है कि इस बार PSL पहले से ही मुश्किल हालात में खेला जा रहा है। वेस्ट एशिया संकट के कारण मैच बिना दर्शकों के हो रहे हैं और टूर्नामेंट सिर्फ लाहौर और कराची तक सीमित है। इसके अलावा कई विदेशी खिलाड़ी भी लीग से हट चुके हैं या आईपीएल का रुख कर चुके हैं।

Continue reading on the app

  Sports

IPL 2026: धोनी के बाद CSK का दूसरा स्टार भी चोटिल, इतने मैच के लिए हुआ बाहर, 6 मैच में ठोके थे 17 छक्के

IPL 2026 में पहली बार मैदान में कदम रखने से पहले ही CSK को खिलाड़ियों की चोट ने परेशान किया हुआ है. तेज गेंदबाज नाथन एलिस पहले ही पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो चुके थे, जबकि धोनी भी अगले कुछ दिनों तक मैदान पर नहीं उतर पाएंगे. Sun, 29 Mar 2026 18:57:00 +0530

  Videos
See all

US-Israel Iran War LIVE Updates: अमेरिका-ईरान जंग में कैसे हैं हालात?, जानिए सब कुछ | Aaj Tak #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-29T13:39:07+00:00

Akhilesh On Atique Ahmad: माफिया अतिक का BJP से कनेक्शन? अखिलेश का चौंकाने वाला खुलासा ! #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-29T13:43:10+00:00

LIVE: ग्लोबल उड़ान, नोएडा की ‘नई पहचान’! Noida International Airport & Development Update | Top News #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-29T13:41:44+00:00

News Ki Pathshala: ईरान में इन 4 जगहों से घुस सकता है अमेरिका! | Sushant Sinha | Iran Israel War #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-29T13:36:35+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers