नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए राज्यों में कार्रवाई जारी है और अब तक करीब 642 एफआईआर दर्ज की गई हैं और करीब 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
एनफोर्समेंट एक्शन के तहत, पिछले 24 घंटों में करीब 3,400 रेड की गईं और करीब 1 हजार सिलेंडर जब्त किए गए।
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में बड़ी कार्रवाई की खबरें आईं। वेस्ट एशिया में हाल के डेवलपमेंट पर इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफिंग के मुताबिक, पीएसयू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सोमवार को रिटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर 1,500 से ज्यादा सरप्राइज इंस्पेक्शन किए।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि देश भर में सभी रिटेल आउटलेट नॉर्मल तरीके से चल रहे हैं। मिनिस्ट्री के अनुसार, कुछ अफवाहों की वजह से कुछ इलाकों में पैनिक बाइंग की खबरें आईं, जिससे रिटेल आउटलेट्स पर बहुत ज्यादा बिक्री हुई और भीड़ लग गई। सरकार ने लोगों को अफवाहों पर यकीन न करने की सलाह दी है और दोहराया है कि देश भर में पेट्रोल और डीजल का काफी स्टॉक मौजूद है।
इसके अलावा, प्रायोरिटी सेक्टर को प्रोटेक्टेड सप्लाई मिल रही है, जिसमें घरेलू पीएनजी और सीएनजी ट्रांसपोर्ट के लिए 100 परसेंट सप्लाई शामिल है, जबकि ग्रिड से जुड़े इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कंज्यूमर्स को उनकी एवरेज खपत का लगभग 80 परसेंट सप्लाई बनाए रखा जा रहा है।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) एंटिटीज को होटल, रेस्टोरेंट और कैंटीन जैसी कमर्शियल जगहों के लिए पीएनजी कनेक्शन को प्रायोरिटी देने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि कल (सोमवार) टॉप 110 ज्योग्राफिकल एरिया में 7,500 से ज्यादा घरेलू और कमर्शियल पीएनजी कनेक्शन जारी या एक्टिवेट किए गए।
इस बीच, 24 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों ने सरकार की गाइडलाइंस के हिसाब से नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी देने के ऑर्डर जारी किए हैं। बाकी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए, पीएसयू ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर जारी कर रही हैं।
मंत्रालय ने बताया कि 14 मार्च से राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल एंटिटीज ने कुल लगभग 18,784 एमटी एलपीजी उठाई है। राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को 48,000 केएल केरोसीन का एक्स्ट्रा अलॉटमेंट दिया गया है, जिनसे डिस्ट्रिक्ट लेवल पर डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट पहचानने की रिक्वेस्ट की गई है।
--आईएएनएस
पीएसके
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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों का नहीं बल्कि दावों और सच्चाई की जंग बन चुका है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बहुत बड़ा दावा किया है और यह दावा यह था कि ईरान अब कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। लेकिन कहानी में ट्विस्ट बचा था। ईरान ने इस दावे को सीधे-सीधे झूठ बता दिया। दरअसल बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बहुत ही प्रोडक्टिव बातचीत हुई है और ईरान ने न्यूक्लियर हथियार ना बनाने पर सहमति भी दे दी है और इसी गुडविल जेस्चर के तहत अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिनों के लिए रोक दिए गए और साथ ही स्टेट ऑफ हॉर्मोस को खोलने की जो सीमा थी उसे भी समय सीमा को बढ़ा दिया गया। लेकिन बता दें कि तेहरान का जो जवाब सामने आया वह बिल्कुल ही उलट है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह एकदम साफ कहा है कि अमेरिका के साथ कोई भी बातचीत नहीं हो रही है।
आज तड़के ईरान द्वारा किए गए ताजा मिसाइल हमलों ने एक बार फिर से दुनिया को दहला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के माध्यम से दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अत्यंत उत्पादक बातचीत हुई है। यानी कि प्रोग्रेसिव बातचीत हुई है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहे हैं और इसी कारण उन्होंने ईरानी पावर प्लांटों पर होने वाले हमलों को अस्थाई रूप से रोकने का आदेश दिया है। ट्रंप ने हुरमज जलडमरू मध्य को खोलने के लिए की गई अपनी समय सीमा को भी 5 दिन के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इन्हें मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताया है। ईरान का मानना है कि जब तक इसराइल अपनी आक्रामकता नहीं रोकता तब तक किसी भी तरह की सीधी वार्ता का सवाल ही नहीं उठता।
ट्रंप का यह जो दावा है वह बिल्कुल फर्जी और गुमराह करने वाला है। और ईरान का यह भी कहना है कि जब तक इजराइल हमले नहीं रोकता तब तक किसी भी बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता है। अब समझिए कि इस पूरे विवाद का मुद्दा आखिरकार क्या है? दरअसल ईरान का यह कहना है कि जो उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम है वो सिर्फ बिजली उत्पादन और मेडिकल उपयोग के लिए ही है। लेकिन अमेरिका और इजराइल ने यह आरोप लगाया है कि ईरान 90% तक यूरेनियम समृद्ध कर चुका है और वो कभी भी परमाणु बम बना सकता है और यहीं से इस पूरे तनाव की इस संघर्ष की जड़ जुड़ी हुई है। यह विवाद बता दें कि नया नहीं है। 2015 में जॉइंट कॉम्प्रहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन के तहत एक समझौता हुआ था। ईरान सीमित न्यूक्लियर गतिविधि करेगा और बदले में उस पर लगे जो भी प्रतिबंध है वह हटाए जाएंगे। लेकिन 2018 में ट्रंप ने इस डील से अमेरिका को बाहर कर लिया और उसके बाद यहीं से तनाव फिर से बढ़ गया। इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ रहा है। क्योंकि बता दें कि दुनिया की 20% तेल सप्लाई इसी स्टेट ऑफ हॉर्मोस से गुजरती है। ट्रंप के बयान के बाद तेल की कीमतों में मामूली गिरावट जरूर आई। लेकिन जब ईरान ने इंकार कर दिया तो उसके बाद फिर से यह बढ़ गई और भारत जैसे देशों के लिए महंगाई और ईंधन कीमतों का खतरा भी बढ़ गया है।
ट्रंप ने ईरान के बारे में में ऐसी बातें क्यों कही तो एक्सपर्ट्स यह मानते हैं और एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे तीन बड़े कारण जो है वह सामने आए हैं। पहला है कूटनीतिक दबाव। ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करना। दूसरा सैन्य रणनीति समय हासिल करना और आर्थिक संकेत भी दिया गया है कि तेल और बाजार को स्थिर करना जो अब सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
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