कैसे होती है फिल्मों के लिए कास्टिंग, मुकेश छाबड़ा ने बताई पर्दे के पीछे की असली कहानी
Mukesh Chhabra Speak about Casting Process: फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर का रोल बेहद अहम होता है और इस फिल्ड में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का नाम सबसे ऊपर आता है. हाल ही में रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की धुरंधर (Dhurandhar) और 'धुरंधर: द रिवेंज' (Dhurandhar: The Revenge) फिल्म रिलीज हुई थी इन दोनों मूवी की कास्टिंग भी मुकेश ने ही की थी. इन दोनों ही फिल्मों की कास्टिंग ने लोगों का ध्यान खींचा. इससे पहले भी मुकेश बजरंगी भाईजान (Bajrangi Bhaijaan), दंगल (Dangal), जवान (Jawan) और डंकी (Dunki) जैसी कई बड़ी फिल्मों के लिए कास्टिंग कर चुके हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में कास्टिंग असल में कैसे होती है और इसके पीछे क्या सच्चाई है. आइए जानते हैं-
कास्टिंग सिर्फ चेहरे से नहीं होती
मुकेश छाबड़ा (Mukesh Chhabra) ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, 'कास्टिंग सिर्फ अच्छे दिखने वाले लोगों को चुनना नहीं है. कास्टिंग का मतलब है सही किरदार के लिए सही इंसान ढूंढना. हर फिल्म की अपनी दुनिया होती है और उसी के हिसाब से कलाकार चुने जाते हैं. अगर किरदार छोटा भी हो, तब भी उसे निभाने वाला कलाकार मजबूत होना चाहिए, तभी फिल्म असरदार बनती है.'
ऑडिशन ही असली परीक्षा
मुकेश छाबड़ा के मुताबिक, किसी भी एक्टर के लिए ऑडिशन सबसे अहम स्टेप होता है. उन्होंने कहा, 'ऑडिशन में ही पता चल जाता है कि एक्टर उस रोल के लिए सही है या नहीं. कई बार बड़े स्टार्स को भी टेस्ट देना पड़ता है, खासकर जब रोल चुनौतीपूर्ण हो. नए कलाकारों के लिए तो यह और भी जरूरी होता है, क्योंकि खुद को साबित करने का यही मौका होता है.'
स्टार नहीं, किरदार बड़ा होता है
इंटरव्यू के दौरान कास्टिंग डायरेक्टर ने एक दिलचस्प बात बताई कि हर बार फिल्म के लिए स्टार जरूरी नहीं होता. उन्होंने कहा, 'कई बार हम स्टार नहीं, किरदार के हिसाब से एक्टर चुनते हैं.' यही वजह है कि उनकी कई फिल्मों में नए चेहरे देखने को मिलते हैं, जो बाद में बड़े स्टार बन जाते हैं.
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रिजेक्शन भी प्रोसेस का हिस्सा है
मुकेश छाबड़ा ने यह भी बताया कि कास्टिंग के दौरान बहुत से कलाकार रिजेक्ट होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'रिजेक्शन का मतलब यह नहीं कि आप खराब एक्टर हैं, बस आप उस रोल के लिए फिट नहीं थे.' रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, बल्कि लगातार मेहनत करते रहना चाहिए.
डायरेक्टर और कास्टिंग डायरेक्टर का टीमवर्क
उन्होने आगे बताया कि कास्टिंग डायरेक्टर अकेले फैसला नहीं करता, यह पूरी तरह टीमवर्क होता है, जिसमें डायरेक्टर की सोच सबसे अहम होती है. कास्टिंग डायरेक्टर कई ऑप्शन देता है और फिर डायरेक्टर तय करता है कि कौन सा एक्टर रोल के लिए सबसे बेहतर है.
‘धुरंधर’ की कास्टिंग पर क्या बोला?
मुकेश छाबड़ा ने बताया कि धुरंधर जैसी फिल्मों में कास्टिंग सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें किरदारों की वैरायटी होती है. ऐसी फिल्मों में हर रोल का महत्व होता है, इसलिए हर कलाकार को बहुत सोच-समझकर चुना जाता है. हालांकि, इंडस्ट्री को लगातार नए चेहरों की जरूरत होती है. नए कलाकारों को मौका नहीं मिलेगा, तो इंडस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी. इसलिए हम हमेशा नए टैलेंट की खोज में रहते हैं और उन्हें सही प्लेटफॉर्म देने की कोशिश करते हैं.
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दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बना भारत, शहर के मामले में दिल्ली चौथे नंबर पर
वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के ताजा आंकड़े सामने आ गए हैं और ये भारत के लिए काफी डराने वाले हैं. स्विस कंपनी IQAir की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बन गया है. अगर दुनिया के सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड देशों की बात करें, तो पड़ोसी देश पाकिस्तान इस लिस्ट में पहले नंबर पर है. पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो का नंबर आता है. भारत पिछले साल यानी 2024 में इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर था, जिसमें अब मामूली सुधार तो हुआ है लेकिन प्रदूषण का स्तर अब भी खतरे के निशान से बहुत ऊपर बना हुआ है.
लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा उत्तर प्रदेश के लोनी शहर को लेकर हुआ है. लोनी को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है. यहां का औसत PM2.5 स्तर 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया है, जो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की 5 µg/m³ की तय गाइडलाइन से 22 गुना ज्यादा है. वहीं देश की राजधानी नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में चौथे स्थान पर है. हैरानी की बात यह है कि दुनिया के टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में 5 शहर भारत के ही हैं. इनमें यूपी के गाजियाबाद और लोनी के अलावा असम का बर्नीहाट, नई दिल्ली और पश्चिम बंगाल का उला शहर शामिल हैं.
वैश्विक स्तर पर बढ़ा प्रदूषण का ग्राफ
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 54 देशों में PM2.5 के स्तर में बढ़ोतरी हुई है, जबकि 75 देशों में इसमें कमी देखी गई है. दुनिया के केवल 14 परसेंट शहर ही ऐसे हैं जो WHO के कड़े मानकों पर खरे उतर पाए हैं. साल 2025 में क्लाइमेट चेंज की वजह से जंगलों में लगी आग ने वैश्विक प्रदूषण को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है. यूरोप और कनाडा में बड़े पैमाने पर बायोमास उत्सर्जन हुआ, जिससे करीब 1,380 मेगाटन कार्बन वातावरण में घुला. अमेरिका और यूरोप में भी इसका असर दिखा है, जहां अमेरिका में PM2.5 का स्तर बढ़कर 7.3 µg/m³ तक पहुंच गया है.
मॉनिटरिंग सिस्टम हुआ कमजोर
हवा की क्वालिटी जांचने वाले सिस्टम को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है. मार्च 2025 में अमेरिकी ग्लोबल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के बंद होने से कई देशों के पास डेटा की कमी हो गई है. CREA की एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के 44 देशों में प्रदूषण की मॉनिटरिंग का सिस्टम बहुत कमजोर हुआ है. आलम यह है कि 6 देश तो ऐसे हैं जहां हवा की क्वालिटी मापने का कोई जरिया ही नहीं बचा है. भारत के संदर्भ में देखें तो 2024 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी और दुनिया के 20 सबसे गंदे शहरों में से 13 भारत के ही थे. हालांकि इस बार संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन हवा की क्वालिटी में सुधार अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
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