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ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला टाला, ‘बहुत सकारात्मक’ बातचीत का दिया हवाला (लीड-1)

न्यूयॉर्क, 23 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से चली बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है।

ईरान ने ट्रंप के इस बयान पर कुछ नहीं कहा है हालांकि तेहरान पहले कह रहा था कि वो संघर्ष विराम के लिए तैयार नहीं है।

रविवार को ट्रंप की एक पोस्ट ने हंगामा मचा दिया था। ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी ईरान को दी थी। कहा था कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान के बड़े बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने भी दावा किया कि वो अमेरिकी सहायता से चलने वाले किसी भी संयंत्र को नहीं छोड़ेगा।

नए संकट की आहट सुनाई दी और दुनिया का शेयर बाजार धड़ाम से गिरा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार तड़के ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका की ईरान के साथ सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, चर्चाओं का ये दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा। दोनों देशों के बीच गहन और विस्तृत चर्चाओं के सकारात्मक रवैए को देखते हुए, मैंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।

हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वाशिंगटन किसके साथ क्या बात कर रहा है।

सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद ट्रंप ने कहा था कि वो नहीं जानते कि किसके हाथ में ईरान की कमान है?

अयातुल्ला के बेटे जिन्हें देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है वो अभी तक किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होते नहीं देखे गए हैं।

शुरुआत में ट्रंप ने इसे एक तेज और निर्णायक कार्रवाई बताते हुए ईरान के नेतृत्व, मिसाइल क्षमता और परमाणु ढांचे को खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब यह संघर्ष लंबा खिंचता दिख रहा है। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर हमले हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के अधिकतर हिस्से में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है।

अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों का दबाव भी है। वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रख ट्रंप अब इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि वह “मध्य पूर्व में हमारे बड़े सैन्य प्रयासों को धीरे-धीरे खत्म करने” की तैयारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) की शर्त का उल्लेख नहीं किया, जो पहले उनके रुख का अहम हिस्सा था।

हालांकि इजरायल ने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि वह ट्रंप के किसी भी शांति प्रयास का समर्थन करेगा। इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि युद्ध अभी मध्य चरण में है, लेकिन दिशा स्पष्ट है और वे अपने भविष्य और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।

इस बीच एक गंभीर घटनाक्रम में ईरान की मिसाइलों ने इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम सुरक्षा प्रणाली को भेदते हुए डिमोना जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाया, जहां परमाणु संंयंत्र मौजूद हैं।

ट्रंप ने सोमवार को यह भी कहा कि ईरान के बिजली तंत्र पर प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया गया है, क्योंकि बातचीत का माहौल “गंभीर, विस्तृत और रचनात्मक” है और यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह इस संघर्ष के कुछ भू-राजनीतिक पहलुओं, खासकर खाड़ी देशों पर ईरान की प्रतिक्रिया, का पूरी तरह अनुमान नहीं लगा पाए थे।

करीब 40 किलोमीटर चौड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है और यहां के तनाव ने तेल की कीमतों में तेज उछाल ला दिया है, जिसका असर दूर अमेरिका तक पेट्रोल की कीमतों पर देखा जा रहा है। इसी दबाव में ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के दौरान ही ईरानी तेल खरीद पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने जैसा असाधारण कदम भी उठाया, ताकि कीमतों को काबू में रखा जा सके।

ट्रंप ने अन्य देशों पर भी दबाव डाला है कि जो इस जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं, वे इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें। उन्होंने कहा कि अंततः होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और सुरक्षा उन देशों को करनी होगी जो इसका उपयोग करते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भारत और चीन जैसे कुछ देशों के लिए जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, जबकि अन्य के लिए पाबंदी की चेतावनी दी।

इस बीच नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि उनका संगठन और दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जापान जैसे देश इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पी. कुमारन और प्राक सोखोन की मुलाकात, भारत और कंबोडिया के बीच सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

नोम पेन्ह, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (ईस्ट), पी. कुमारन, ने सोमवार को कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री, प्राक सोखोन, से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट कर कहा, “सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री और विदेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री प्राक सोखोन से मुलाकात की। चर्चा भारत और कंबोडिया के बीच बहुआयामी सहयोग को और मजबूत करने पर केंद्रित रही।”

उन्होंने कंबोडिया की संस्कृति और ललित कला मंत्री फोएर्नग साकोना से भी मुलाकात की, जिसमें विरासत संरक्षण परियोजनाओं और सांस्कृतिक सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

कुमारन ने रविवार को कंबोडिया के सिएम रीप में स्थित ता प्रोहम मंदिर और अंकोर वाट मंदिर का दौरा किया।

जायसवाल ने कहा, “सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने सिएम रीप, कंबोडिया में ता प्रोहम मंदिर का दौरा किया, जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्यों का नेतृत्व कर रहा है। इसके दो चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, जबकि तीसरा चरण वर्तमान में जारी है।”

अंकोर वाट मंदिर कंबोडिया का विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन मंदिर परिसर है और यह भारत-कंबोडिया की साझा सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है।

रणधीर जायसवाल ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने सिएम रीप में स्थित अंकोर वाट मंदिर का दौरा किया, जो विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन मंदिर परिसर है और भारत-कंबोडिया की साझा सभ्यतागत विरासत का एक शानदार प्रतीक है। 1986 से 1993 के बीच भारत इस मंदिर के पुनर्स्थापन में सहायता देने वाला पहला देश था।”

कुमारन ने शनिवार को सिएम रीप में मेकांग-गंगा सहयोग एशियाई पारंपरिक वस्त्र संग्रहालय का भी दौरा किया।

जायसवाल ने कहा, “यह देश का अपनी तरह का पहला संग्रहालय है, जो मेकांग-गंगा क्षेत्र की समृद्ध वस्त्र परंपराओं को प्रदर्शित करता है और साझा सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है।”

पिछले सप्ताह कुमारन ने कंबोडिया के विदेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के राज्य सचिव खी सोवनरतना के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की और व्यापार और निवेश, विरासत संरक्षण तथा विकास साझेदारी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

बैठक के बाद जायसवाल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट क‍िया, “सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने कंबोडियाई प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व राज्य सचिव खी सोवनरतना कर रहे थे। उन्होंने कंबोडिया के लिए भारत की क्षमता निर्माण पहलों की समीक्षा की, जिसमें विदेश मंत्रालय के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (एसएसआईएफएस) में कंबोडियाई राजनयिकों का प्रशिक्षण शामिल है। उन्होंने व्यापार और निवेश, विरासत संरक्षण और विकास साझेदारी में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।”

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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