ईरान जंग में अपने घर में ही 'हार' गए ट्रंप, गिर गई लोकप्रियता, सर्वे ने उड़ाए होश!
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ईरान संघर्ष का प्रभाव
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ईंधन की कीमतें भी दबाव बढ़ा रही हैं
अभी रुकने वाला नहीं है युद्ध? ट्रंप ने ईरान के सामने रख दी शर्तों की इतनी लंबी लिस्ट
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के 26वें दिन एक बार फिर युद्ध विराम को लेकर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से कि 5 दिन तक यूएस कोई हमला नहीं करेगा और ईरान से बातचीत करेगा से उम्मीद जगने लगी थी कि शायद जल्द युद्ध खत्म हो जाए. लेकिन इस बीच ट्रंप ने ईरान को एक व्यापक 15 सूत्री शांति प्रस्ताव भेजा है. माना जा रहा है कि ये शर्तें अगर ईरान मान लेगा तो युद्ध विराम हो जाएगा लेकिन अगर ये 15 शर्तों में से एक भी पूरी नहीं हुई तो युद्ध जारी रहने के आसार हैं.
हालांकि इस योजना का उद्देश्य युद्ध को जल्द समाप्त करना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना बताया जा रहा है. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है.
पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक कोशिश
बताया जा रहा है कि इस शांति प्रस्ताव को पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है. शहबाज शरीफ ने इस वार्ता की मेजबानी की पेशकश की है, जिसे ट्रंप ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया. बताया जा रहा है कि बैक-चैनल बातचीत में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जार्ड कुशनर की भूमिका अहम हो सकती है.
क्या हैं 15 सूत्री योजना की मुख्य शर्तें
ट्रंप के प्रस्ताव में कई सख्त और व्यापक शर्तें शामिल हैं:
- एक महीने का तत्काल सीजफायर
- ईरान द्वारा परमाणु हथियार न बनाने की लिखित गारंटी
- सभी परमाणु सुविधाओं को निष्क्रिय या नष्ट करना
- संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक देश से बाहर भेजना
- ईरान में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना
- बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम समाप्त करना
- हिजबुल्लाह और हमास जैसे प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना
- Strait of Hormuz को सुरक्षित और खुला रखना
- अमेरिकी और इजरायली जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में समझौते का पालन
इसके अलावा, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में आंशिक राहत और भविष्य में आर्थिक सहयोग की संभावना भी जताई गई है.
ईरान का सख्त रुख
हालांकि ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है. बल्कि तेहरान ने एक बार फिर अपनी शर्तें दोहराई हैं और कहा है कि...
- अमेरिका को अपने सभी गल्फ बेस बंद करने होंगे
- सभी प्रतिबंध हटाए जाएं
- युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए
- Hezbollah पर हमले बंद हों
- होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास रहे
- इसके अलावा ईरान ने यह भी कहा कि वह 'तीसरी बार धोखा नहीं खाएगा.'
जमीनी हालात, संघर्ष जारी
शांति प्रस्ताव के बीच भी जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. हिजबुल्लाह ने हाइफा और नाहारिया पर 30 से अधिक रॉकेट दागे, ईरान ने इजरायल की एयरोस्पेस फैक्टरियों पर ड्रोन हमले किए, इजरायल ने ईरानी ठिकानों, जैसे शिराज एयरपोर्ट, पर हमले जारी रखे हैं. बहरीन में अमेरिकी बेस पर धमाके हुए और अमेरिका ने क्षेत्र में 3000 से ज्यादा अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं. यानी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. इससे साफ है कि कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद युद्ध की तीव्रता कम नहीं हुई है.
भारत की चिंता और वैश्विक असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, हालांकि शांति योजना की खबर से थोड़ी राहत मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप से बातचीत कर क्षेत्र में शांति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने की अपील की है. भारत के लिए यह मार्ग ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है.
शांति या टकराव?
ट्रंप की 15 सूत्री योजना एक बड़ा कूटनीतिक प्रयास जरूर है, लेकिन ईरान के सख्त रुख और जमीनी स्तर पर जारी हमलों को देखते हुए इसका सफल होना आसान नहीं दिखता. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह पहल युद्ध को खत्म कर पाएगी या फिर मध्य पूर्व में संघर्ष और गहरा होगा.
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