राष्ट्रीय हित को ध्यान में रख, भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान अपनाया संतुलित दृष्टिकोण
जकार्ता, 21 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की संतुलित रणनीति के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता साफ झलकती है। 28 फरवरी से ही भारतीय नेतृत्व ने बिना किसी पक्षपात या भेदभाव के क्षेत्रीय देशों और हितधारकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा है। एक हालिया रिपोर्ट भी स्पष्ट करती है कि दशकों से भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए हर जियोपॉलिटिकल संकट से निपटने के लिए एक सोची-समझी और सुसंगत रणनीति अपनाता आया है।
द जकार्ता पोस्ट की एक रिपोर्ट कहती है, “ईरान से जुड़ा मौजूदा झगड़ा भी कुछ अलग नहीं है। यह तरीका भारत के स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी के लंबे समय से चले आ रहे सिद्धांत पर आधारित है: नई दिल्ली किसी का पक्ष लेने के लिए मजबूर नहीं होती और इसके बजाय इतिहास, भूगोल और भविष्य के मौकों को ध्यान में रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा करने वाली रणनीति अपनाती है।”
इसमें बताया गया, “हालांकि भारत-इजरायल साझेदारी पिछले कुछ सालों में गहरी हुई है (जिसमें टेक्नोलॉजी फोकस मुख्य रहा है) लेकिन नई दिल्ली ने मौजूदा संकट में साफ तौर पर किसी का पक्ष नहीं लिया। फारस की खाड़ी और बड़े वेस्ट एशियाई इलाके में भारत के बड़े हितों को देखते हुए सोची समझी रणनीति अपनाई गई है। यह इलाका 10 मिलियन भारतीय प्रोफेशनल्स का घर है और एनर्जी और इन्वेस्टमेंट का एक जरूरी सोर्स है।”
अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से टेलीफोन पर बातचीत की।
नई दिल्ली ने इस महीने की शुरुआत में रायसीना डायलॉग के दौरान ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह की भी मेजबानी की थी।
रिपोर्ट में कहा गया, इन सभी मुलाकातों के दौरान, भारत का मंत्र साफ रहा है: डायलॉग और डिप्लोमेसी ही लड़ाई खत्म करने के असरदार तरीके हैं।
9 मार्च को राज्यसभा में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष ने इलाके में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है।
जयशंकर ने कहा, प्रधानमंत्री सभी गतिविधियों पर करीब से नजर रख रहे हैं। हमारा मानना है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहिए। हम चाहते हैं कि पश्चिम एशिया स्थिर रहे। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में हैं; हमें उनकी चिंता है।
नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार काफी सजग है। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि नई दिल्ली ने पहले ही खाड़ी क्षेत्र में फंसे हजारों भारतीयों की वापसी में मदद की है।
अपने भाषण में, विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी कहा कि इस झगड़े की वजह से बड़े पैमाने पर तबाही हुई और ईरानी शासन के कई बड़े नेताओं की जान गई। तनाव कम करने के लिए डायलॉग और डिप्लोमेसी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, यह भी जरूरी है कि इस इलाके के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।
--आईएएनएस
केआर/
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सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया, गैस सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी पर छापेमारी जारी
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने शनिवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर अब 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें पहले से दिए गए 20 प्रतिशत और पीएनजी विस्तार से जुड़े सुधारों के आधार पर दिए गए 10 प्रतिशत के साथ अब अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन जोड़ा गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी उन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा जहां इसकी ज्यादा जरूरत है। इनमें रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी यूनिट, सरकारी सब्सिडी वाले कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार गैर-घरेलू एलपीजी के वितरण के आदेश जारी कर दिए हैं। बाकी राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करा रही हैं। पिछले एक हफ्ते में करीब 13,479 मीट्रिक टन एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की गई है।
शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को प्राथमिकता दी गई है और कुल कमर्शियल एलपीजी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों को दिया जा रहा है।
इस बीच, सरकार ने शनिवार को बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देश भर में लगातार छापेमारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अब तक 3,500 से ज्यादा छापे मारे गए हैं और करीब 1,400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने 2,000 से ज्यादा पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसियों पर अचानक जांच भी की है, ताकि सप्लाई सुचारू बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
सरकार ने कहा कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद घरेलू एलपीजी और पीएनजी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है, साथ ही अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को भी प्राथमिकता दी गई है।
एलपीजी की मांग को संतुलित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जैसे रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन करना और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 45 दिन तक करना।
इसके अलावा, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन दिया गया है और उन्हें इसके वितरण के लिए जगह तय करने को कहा गया है।
कोयला मंत्रालय ने भी कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज को निर्देश दिए हैं कि वे राज्यों को ज्यादा कोयला उपलब्ध कराएं ताकि छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी हो सकें।
सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात के कारण एलपीजी सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है और पैनिक बुकिंग में कमी आई है। अब ज्यादातर डिलीवरी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के जरिए हो रही है।
तेल कंपनियों के अनुसार, किसी भी रिटेल आउटलेट पर ईंधन की कमी नहीं है और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
सरकार ने कहा है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे डिजिटल तरीके से बुकिंग करें, एजेंसियों पर जाने से बचें और होम डिलीवरी का उपयोग करें।
--आईएएनएस
डीबीपी
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