डाटा साइंसटिस्ट डॉ. तारकनाथ वोड्डी ने दी सलाह, भारत में इंडस्ट्री-आधारित एआई पर फोकस जरूरी
वॉशिंगटन, 19 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. तारकनाथ वोड्डी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल में भारत एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है और कोर एआई बनाने में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है। उन्होंने इस सेक्टर में देश की बढ़ती ताकत और अभी तक इस्तेमाल नहीं हुए पोटेंशियल की ओर इशारा किया।
वोड्डी ने आईएएनएस को एक इंटरव्यू में बताया, “साफ-साफ कहूं तो एआई एप्लीकेशन के इस्तेमाल के मामले में भारत अब सबसे ऊपर आता है, जबकि एआई क्रिएटर के रूप में यह दुनिया में तीसरे स्थान पर है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि तीसरे स्थान पर भी यह काफी पीछे है।”
न्यूक्लियर इंजीनियर से डाटा साइंसटिस्ट बने और एनिका डेटा साइंस सॉल्यूशंस के फाउंडर वोड्डी ने कहा कि भारत के लिए अभी का मौका अमेरिका और चीन के साथ बेसिक मॉडल्स में सीधे मुकाबला करने में नहीं, बल्कि व्यवहारिक, उद्योग-आधारित एप्लीकेशन बनाने में है।
उन्होंने कहा, “देश को अभी ऐसे एप्लीकेशन बनाते रहना चाहिए, जिनका उद्योग में सीधा इस्तेमाल हो।” उन्होंने एंटरप्राइज सिस्टम, सप्लाई चेन और औद्योगिक अनुकूलन जैसे इस्तेमाल पर जोर दिया।
पिछले महीने एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के बाद भारत से लौटे वोड्डी ने एआई में भारत के नेतृत्व की जमकर सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विषय पर अपनी पकड़ के लिए दुनियाभर में सबसे अलग हैं।
एआई इम्पैक्ट समिट की चर्चाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कई अहम उपलब्धियों के साथ यह पहल अलग नजर आती है। उनके मुताबिक, ऐसे बहुत कम नेता होते हैं जो भविष्य की दिशा को उतनी स्पष्टता से समझते और व्यक्त करते हैं। यह दृष्टिकोण वैश्विक तकनीकी नेताओं की उम्मीदों से भी आगे रहा।
वोड्डी ने जोर देकर कहा कि बड़े स्तर की पहलों को सफल बनाने के लिए उद्योग और सरकार के बीच मजबूत तालमेल बेहद जरूरी होता है। इसी तालमेल ने काम को संभव बनाया और भारत के एआई विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, जो एक नेतृत्व-प्रेरित प्रयास को दर्शाता है।
न्यूक्लियर इंजीनियरिंग, एआई और बड़े डेटा सिस्टम में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
वोड्डी ने कहा कि सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि इंडस्ट्री किस समस्या को हल करना चाहती है और बिना स्पष्ट उपयोग-क्षेत्र (यूज-केस) तय किए बुनियादी ढांचे में समय से पहले निवेश करने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की डाटा सेंटर कैपेसिटी लिमिटेड होने के बावजूद अभी भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, भारत के पास डाटा सेंटर की क्षमता एक गीगावाट से भी कम है, लेकिन बावजूद उसका 80 फीसदी से भी कम इस्तेमाल हो रहा है और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने के लिए काफी एप्लिकेशन नहीं हैं।
वोड्डी ने कहा कि भारत को स्वास्थ्य, शिक्षा और लीगल सिस्टम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनमें कमियां दिख रही हैं। उन्होंने कहा, जहां भी कमियां हैं और लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किलें आ रही हैं, वही क्षेत्र आगे बढ़ेगा।
रेगुलेशन के मुद्दे पर उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही, जिसमें न तो अत्यधिक नियंत्रण हो और न ही पूरी तरह ढील दी जाए। उन्होंने डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार एआई ढांचे की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा कोई भी क्षेत्र या व्यवसाय नहीं हो सकता जिसे उसकी नवाचार प्रकृति के कारण सभी नियमों से पूरी तरह मुक्त छोड़ दिया जाए।
उन्होंने सरकार और इंडस्ट्री के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, सरकार को इंडस्ट्री से बात करनी चाहिए और कहना चाहिए कि ये देश की समस्याएं हैं। एक बार साफ समाधान मिल जाने पर समर्थन मिलना चाहिए।
वैज्ञानिक डॉ. तारकनाथ वोड्डी ने कहा कि भारत की ताकत उसके टैलेंट पूल और बढ़ते इनोवेशन कल्चर में है। उन्होंने कहा, “यही सही समय है। बढ़ते मौके लोगों को स्वतंत्र इनोवेशन करने में मदद कर रहे हैं।”
वैज्ञानिक वोड्डी ने आगे कहा कि भारत की एआई यात्रा तीन स्तंभों पर टिकी होनी चाहिए: “एनर्जी, शिक्षा और वातावरण, जो ट्रिपल ई है,” जिसे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी नई टेक्नोलॉजी का सपोर्ट मिले।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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ईरान ने अबू धाबी में तेल-गैस संयंत्र पर किया मिसाइल और ड्रोन हमला, अब UAE ने लिया ये सख्स फैसला
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग से पूरा मध्य पूर्व आग में जल रहा है. ये जंग लगातार बढ़ती जा रही है. जिसके चलते दुनियाभर पर ऊर्जा संकट मंडराने लगा है. अमेरिका और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी के देशों को निशाना बना रहा है. अब ईरान ने मिडिल ईस्ट के देशों में तेल और गैस संयंत्रों पर हमला करना शुरू कर दिया है. बुधवार को ईरान ने अबू धाबी में मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हबशान गैस संयंत्र को बंद करने का फैसला लिया है.
अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने की पुष्टि
अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की है कि हाल ही में हुए मिसाइल हमलों के बाद हबशान गैस संयंत्र को बंद कर दिया गया है. इसके साथ ही अधिकारी बाब तेल क्षेत्र और आसपास के गैस बुनियादी ढांचे में हुई व्यवधानों पर भी कार्रवाई कर रहे हैं. प्रेस टीवी के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि कार्यालय ने कहा है कि "गैस संयंत्रों में परिचालन निलंबित कर दिया गया है और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है."
ईरान ने तेज किए सैन्य हमले
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सशस्त्र बलों ने क्षेत्रीय प्रतिरोध समूहों के साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है. बुधवार यानी 18 मार्च को, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर और ईरानी सेना ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत कई हमले किए. जिसे उन्होंने 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई को "बिना उकसावे के की गई आक्रामकता" बताया. प्रेस टीवी ने बताया कि अब तक कब्जे वाले इलाकों में इजरायली सैन्य ठिकानों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की 63 लहरें देखने को मिली हैं.
क्षेत्रीय समूहों ने भी तेज की कार्रवाई
उधर लेबनानी हिज़्बुल्लाह ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और पिछले एक साल में बार-बार हुए युद्धविराम उल्लंघन का हवाला देते हुए इजरायली सैन्य ठिकानों के खिलाफ अभियान तेज कर दिए हैं. प्रेस टीवी के मुताबिक, इराकी प्रतिरोध समूहों ने भी इराक और अन्य अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं.
जंग के बीच खाड़ी के प्रमुख ऊर्जा स्थलों पर ते हुए हमले
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार रात फारस की खाड़ी में स्थित प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं पर ईरान ने हमला किया. कतर के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि नागरिक सुरक्षा दल रास लाफान औद्योगिक शहर में लगी आग पर काबू पाने में लगे हुए हैं. इस हमले को "ईरान द्वारा लक्षित" बताया गया. इसके बाद कतर एनर्जी ने पुष्टि की कि मिसाइलों ने साइट पर हमला किया था, जिससे "काफी नुकसान" हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक, आपातकालीन टीमों को तैनात कर दिया गया है और सभी कर्मचारी सुरक्षित है.
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