Pakistan-Afghanistan Ceasefire | ईद-उल-फितर पर 'बंदूकें शांत'! सऊदी और तुर्किये की मध्यस्थता के बाद पाक-अफगान युद्धविराम की घोषणा
महीनों से जारी सीमावर्ती तनाव और घातक सैन्य हमलों के बीच, दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों- पाकिस्तान और अफगानिस्तान- ने बुधवार को एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। आगामी ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर दोनों देशों ने अपने सैन्य अभियानों को "अस्थायी रूप से रोकने" (Temporary Ceasefire) का निर्णय लिया है। अफगान सरकार द्वारा इस्लामाबाद पर काबुल में एक पुनर्वास अस्पताल पर हमले में 400 लोगों की हत्या का आरोप लगाने के एक दिन बाद यह घोषणा की गई।
इसे भी पढ़ें: Donald Trump Last Warning! ईरान ने कतर पर दोबारा हमला किया तो... क्या मध्य पूर्व महाविनाश की कगार पर है?
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सीमावर्ती क्षेत्र में तालिबान के कथित ठिकानों पर उनके देश द्वारा नए हमले किए जाने के कुछ घंटों बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘‘आगामी इस्लामी त्योहार ईद-उल-फितर को देखते हुए, पाकिस्तान ने अपनी पहल पर और सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे मित्र इस्लामी देशों के अनुरोध पर जारी अभियान ‘गजब-लिल-हक’ के बीच अस्थायी रोक की घोषणा करने का निर्णय लिया है।’’
तरार ने कहा कि यह विराम 18/19 मार्च की मध्यरात्रि से 23/24 मार्च की मध्यरात्रि तक लागू रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार से किसी भी हमले, ड्रोन हमले या पाकिस्तान के अंदर किसी भी आतंकवादी घटना की स्थिति में, अभियान तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
इसे भी पढ़ें: OpenAI CEO Sam Altman का धन्यवाद या खतरे की घंटी? Tech Jobs के Future पर उठे सवाल
इसके कुछ घंटों बाद, अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों ने ईद-उल-फितर के अवसर पर और सऊदी अरब, तुर्किये और कतर के अनुरोध पर रक्षा अभियानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि काबुल ‘‘किसी भी तरह के खतरे की स्थिति में किसी भी आक्रामकता का बहादुरी से जवाब देगा।
Donald Trump Last Warning! ईरान ने कतर पर दोबारा हमला किया तो... क्या मध्य पूर्व महाविनाश की कगार पर है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में अब और "विनाश" बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने जहां एक ओर इजराइल को ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र पर और हमले न करने के लिए राजी किया है, वहीं दूसरी ओर ईरान को कड़े शब्दों में आगाह किया है कि यदि उसने कतर के ऊर्जा केंद्रों या एलएनजी (LNG) ठिकानों को दोबारा निशाना बनाया, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में उस "पूरे क्षेत्र को उड़ाने" में जरा भी नहीं हिचकिचाएगा। यह बयान केवल एक राजनीतिक धमकी नहीं, बल्कि महाविनाश (Catastrophe) की एक गंभीर आहट है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया कि इजराइल ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ पर और हमले नहीं करेगा लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि अगर ईरान ने कतर पर फिर हमला किया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा और उस ‘‘पूरे क्षेत्र को उड़ा देगा।’’ वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल और कतर पर ईरानी मिसाइल हमलों के बीच ट्रंप ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा कि ‘‘मैं इस पैमाने की हिंसा और विनाश की अनुमति नहीं देना चाहता क्योंकि इसका ईरान के भविष्य पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।’’
उन्होंने कहा कि लेकिन अगर कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) स्थलों पर फिर हमला हुआ तो वह ऐसा करने में कतई हिचकिचाएंगे नहीं।’’ इजराइल के हमलों में ईरान के खुफिया मंत्री की मौत हो गई है। इजराइल ने शीर्ष ईरानी नेतृत्व के खिलाफ अपना अभियान जारी रखते हुए बुधवार को ईरान के अपतटीय प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर कथित तौर पर हमला किया जिससे क्षेत्र की आर्थिक जीवनरेखा यानी ऊर्जा पर दबाव और बढ़ गया। ईरान ने अपने विशाल प्राकृतिक गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ पर हुए हमले की निंदा की।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इन हमलों के ऐसे ‘‘अनियंत्रित परिणाम’’ होने की चेतावनी दी, जो ‘‘पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकते हैं।’’ ‘साउथ पार्स’ अपतटीय प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के अपने पड़ोसी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए और कतर के गैस केन्द्रों को निशाना बनाया। इसके जवाब में कतर ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया।
तेहरान ने संयुक्त अरब अमीरात के हबशान गैस संयंत्र और बाब क्षेत्र को भी निशाना बनाया जिसे वहां की सरकार ने युद्ध में ‘‘उकसाने वाला खतरनाक कदम’’ बताया। अबू धाबी के अधिकारियों ने कहा कि इन स्थलों पर गैस परिचालन बंद कर दिया गया था। कतर और संयुक्त अरब अमीरात पर हुए इन हमलों से खाड़ी के अरब देशों पर दबाव बढ़ रहा है। ये देश 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी हमलों से अपनी रक्षा कर रहे हैं, लेकिन अपने सैन्य अड्डों, असैन्य स्थलों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले झेलने के बावजूद उन्होंने ईरान के खिलाफ कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं की है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi

















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)



