Mahboob Chowk Clock Tower: बिना चाबी के चलने वाली घड़ी का क्या है असली राज? देखिए महबूब चौक टॉवर का इनसाइड सच
Mahboob Chowk Clock Tower Engineering Mystery Explained: हैदराबाद के चारमीनार के पास स्थित महबूब चौक क्लॉक टॉवर 1892 से इतिहास का गवाह रहा है. पांच मंजिला यह भव्य टॉवर इंडो-यूरोपीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है. जिसे नवाब आसमान जाह ने छठे निजाम मीर महबूब अली खान के सम्मान में बनवाया था. स्थानीय किंवदंतियों में अक्सर इसे 'बिना चाबी' या हवा के दबाव से चलने वाली जादुई घड़ी कहा जाता रहा है. लेकिन असल में यह एक जटिल 'मैकेनिकल वेट-ड्रिवन सिस्टम' पर आधारित है. इसमें भारी लोहे के वजन गुरुत्वाकर्षण के कारण धीरे-धीरे नीचे गिरते थे. जिससे पेंडुलम को ऊर्जा मिलती थी और घड़ी की सुइयां घूमती थीं. विशेषज्ञों के अनुसार इस घड़ी को चलाने के लिए हर हफ्ते एक ऑपरेटर को वजन वापस ऊपर खींचने पड़ते थे. जिसे 'चाबी देना' कहा जाता था. एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने पर घड़ी अगले सात दिनों तक बिना रुके चलती थी. समय के साथ देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक घड़ी खामोश हो गई थी. लेकिन साल 2018-19 में GHMC और हेरिटेज विशेषज्ञों ने इसका जीर्णोद्धार कर इसे फिर से जीवित कर दिया. आज यह टॉवर 19वीं सदी की शानदार इंजीनियरिंग के प्रमाण के रूप में अपनी पुरानी शान के साथ हैदराबाद के आकाश में समय की सटीक जानकारी दे रहा है.
बंगाल में ममता बनर्जी बनाम TMC का खेल, अपने विधायकों ने ही कर दिया विद्रोह, अब क्या करेंगी दीदी?
West Bengal Chunav: पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी की. ममता बनर्जी ने इसे पार्टी के लिए खास दिन बताया. इस सूची में 74 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं मिला, जिनमें मोनिरुल इस्लाम भी शामिल हैं. ऐसे में टिकट नहीं मिलने के कारण कई विधायकों ने बगावत का रुख अपना लिया है. ऐसे में पार्टी के भीतर ही ममता बनर्जी बनाम टीएमसी हो गया है.
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