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फिजिकल हेल्थ- क्या बुढ़ापे को रोक सकता है सेलेनियम:क्या है ये मिनरल, शरीर में करता ये 9 जरूरी काम, पूर्ति के लिए खाएं ये चीजें

हर शख्स की चाहत होती है कि वह हमेशा सुंदर और जवान दिखे। चमकदार स्किन और लंबे-काले बाल भला किसे नहीं पसंद हैं? इसके लिए सेलेनियम बेहद जरूरी मिनरल है। यह एक एंटी-एजिंग तत्व है, जो हॉर्मोन संतुलन, मजबूत इम्यून सिस्टम और हेल्दी कोशिकाओं को लिए भी बेहद जरूरी है। यह डीएनए को भी सुरक्षित रखता है। इसकी कमी से शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, इंफ्लेमेशन और कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है। शरीर कोई भी मिनरल स्वयं नहीं बनाता है, यह सिर्फ कैल्शियम, आयरन जैसे कुछ मिनरल्स को छोड़कर बाकी को बहुत दिन तक स्टोर भी नहीं कर सकता है। इसलिए इसे डेली डाइट में शामिल करना जरूरी होता है। संतुलित और तरह-तरह के फूड्स से भरपूर डाइट से इसकी पूर्ति हो सकती है। इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि सेलेनियम क्या है। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- सेलेनियम क्या है? जवाब- सेलेनियम एक ट्रेस मिनरल है। इसका मतलब ऐसा मिनरल, जिसकी शरीर को बहुत थोड़ी सी मात्रा में जरूरत होती है। हालांकि, यह स्वस्थ रहने के लिए जरूरी मिनरल है। सवाल- सेलेनियम शरीर के लिए कितना जरूरी है? जवाब- शरीर के संतुलित तरीके से काम करने के लिए सेलेनियम बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। सवाल- सेलेनियम शरीर में किन बुनियादी कामों के लिए जरूरी है? जवाब- सेलेनियम शरीर के कई बुनियादी कामों के लिए महत्वपूर्ण मिनरल है। सवाल- सेलेनियम की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं? जवाब- इसकी कमी होने पर समय से पहले बुढ़ापा नजर आने लगता है। इससे स्किन रूखी हो जाती है और झुर्रियां पड़ जाती हैं। बाल समय से पहले रूखे, बेजान और सफेद होने लगते हैं। इससे होने वाली सभी समस्याएं ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सेलेनियम वाकई एंटी एजिंग है। यह कैसे काम करता है? जवाब- हां, सेलेनियम एक एंटी-एजिंग न्यूट्रिएंट है। यह ऐसे काम करता है- सवाल- सेलेनियम किन-किन बीमारियों का जोखिम कम करता है? जवाब- सेलेनियम शरीर को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन से बचाकर कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। सवाल- एक स्वस्थ वयस्क को रोज कितने सेलेनियम की जरूरत होती है? जवाब- एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 55 माइक्रोग्राम सेलेनियम की जरूरत होती है। सवाल- किन लोगों में सेलेनियम की कमी का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- सेलेनियम की कमी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जो जिन इलाकों की मिट्टी में सेलेनियम की मात्रा कम होती है। ऐसी जगह उगने वाली फसलों में भी सेलेनियम कम होता है। सवाल- सेलेनियम की पूर्ति के लिए डाइट में किन फूड्स को शामिल करना जरूरी है? जवाब- संतुलित डाइट से शरीर को जरूरी सेलेनियम मिल जाता है। समुद्री मछलियां जैसे टूना, सार्डिन और झींगा इसका सबसे अच्छा सोर्स हैं। यह अंडे और चिकन में भी मिलता है। शाकाहारी लोगों के लिए साबुत अनाज, ब्राउन राइस, दालें, बीन्स और दूध-दही अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सेलेनियम के अच्छे सोर्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सेलेनियम की पूर्ति भोजन से हो सकती है या सप्लीमेंट की भी जरूरत पड़ती है? जवाब- अगर संतुलित डाइट लें तो सेलेनियम की जरूरत पूरी हो सकती है। भोजन में नट्स, सीड्स, दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स और हरे पत्ते वाली सब्जियां शामिल करना फायदेमंद है। सप्लीमेंट की जरूरत उन लोगों को पड़ती है, जिन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम है। ये याद रखें कि डॉक्टर की सलाह के बिना सेलेनियम सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक भी हो सकता है। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- जवानी में बढ़ रहा नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर: ये 9 गलत आदतें जिम्मेदार, ये संकेत इग्नोर न करें, हेल्दी लिवर के 8 टिप्स ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ यूरोप’ में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस में करीब 2 करोड़ लोग नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर से ग्रस्त हैं, लेकिन 75% लोगों को इसका पता ही नहीं कि वे जोखिम में हैं। आगे पढ़िए…

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जरूरत की खबर- आयरन डेफिशिएंसी के 12 संकेत:न करें इग्नोर, हो सकता है एनीमिया, इंफेक्शन, डाइट में शामिल करें रेड लीफी ग्रीन्स

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 (NFHS-5) के मुताबिक, भारत में 15-49 साल की लगभग 57-59% महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी है। एनीमिया की मुख्य वजह है- आयरन की कमी। आयरन शरीर के लिए क्रिटिकल (बेहद जरूरी) मिनरल है। आयरन की कमी से शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। लोग इसके शुरुआती संकेतों को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ ऐसे फूड्स हैं, जो एनीमिया के खतरे से बचा सकते हैं। रेड लीफी ग्रीन्स (लाल पत्तेदार साग) भी इन्हीं में से एक है। इनमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- आयरन क्या है और ये शरीर में क्या काम करता है? जवाब- आयरन एक जरूरी मिनरल है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है। शरीर का लगभग 70% आयरन ब्लड में हीमोग्लोबिन के रूप में स्टोर रखता है। हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में मौजूद प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर उसे पूरे शरीर में पहुंचाता है। ब्लड में आयरन की कमी होने पर ऑक्सीजन सप्लाई घट जाती है। इससे थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है। आयरन शरीर में कौन से जरूरी काम करता है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- प्लांट-बेस्ड आयरन और एनिमल-बेस्ड आयरन में क्या अंतर है? जवाब- प्लांट-बेस्ड आयरन को ‘नॉन-हीम आयरन’ कहा जाता है, यानी जो हरी सब्जियों, दालों और अनाज में पाया जाता है। शरीर इसे धीरे-धीरे अवशोषित करता है। आयरन के अच्छे अवशोषण के लिए विटामिन C से भरपूर फूड्स लेना जरूरी होता है। हालांकि, एनिमल-बेस्ड आयरन (हीम आयरन) यानी मांस, मछली और अंडे से मिलने वाला आयरन आसानी से अवशोषित हो जाता है। सवाल- महिलाओं में आयरन डेफिशिएंसी ज्यादा क्यों होती है? जवाब- इसकी वजह ये है कि महिलाओं के जीवन के अलग-अलग चरणों (जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग) में उनकी बॉडी को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक आयरन की जरूरत होती है। पॉइंटर्स से मुख्य कारणों को समझिए- सवाल- किन महिलाओं को आयरन डेफिशिएंसी का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ महिलाओं को आयरन की जरूरत ज्यादा हो सकती है। जैसेकि- सवाल- आयरन डेफिशिएंसी के क्या संकेत हैं? जवाब- आयरन की कमी धीरे-धीरे शरीर पर असर डालती है। शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एनीमिया की स्थिति बन सकती है। सभी लक्षण नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- आयरन डेफिशिएंसी के हेल्थ रिस्क क्या हैं? जवाब- लंबे समय तक आयरन की कमी शरीर के कुछ जरूरी अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स क्या हैं और इनमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स यानी लाल पत्तेदार साग ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी पत्तियां लाल या बैंगनी रंग की होती हैं। इनमें नेचुरल पिगमेंट (एंथोसायनिन) के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें चौलाई के पत्ते (अमरनाथ), लाल पालक और चुकंदर के पत्ते शामिल हैं। ये खासतौर पर आयरन सपोर्ट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स से हमें डेली जरूरत का कितना प्रतिशत आयरन मिल सकता है? जवाब- 300 ग्राम रेड लीफी ग्रीन्स में करीब 3.71 mg आयरन होता है। इससे डेली जरूरत का लगभग 20% से 45% हिस्सा पूरा हो सकता है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, आयरन की डेली की जरूरत उम्र और जेंडर के अनुसार बदलती है। जैसेकि- सवाल- क्या रेड लीफी ग्रीन्स रोज खा सकते हैं? जवाब- हां, रेड लीफी ग्रीन्स रोज खाई जा सकती हैं, बशर्ते इन्हें संतुलित मात्रा में और अच्छी तरह धोकर व पकाकर खाया जाए। रोजाना सेवन से आयरन, फोलेट और फाइबर मिलता है। हालांकि, जिन लोगों को किडनी स्टोन या ऑक्सलेट की समस्या है, उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इसके नियमित सेवन के कई फायदे हैं। सभी बेनिफिट्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स को रोजमर्रा की डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं? जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स को कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं- सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के अलावा और कौन से फूड्स आयरन रिच होते हैं? जवाब- कई वेज और नॉनवेज फूड्स आयरन के अच्छे सोर्स हैं। वेजिटेरियन लोगों के लिए आयरन के सोर्स नॉन-वेजिटेरियन लोगों के लिए सवाल- क्या सिर्फ डाइट से आयरन की कमी पूरी हो सकती है? जवाब- आमतौर पर आयरन की कमी संतुलित और आयरन-रिच डाइट से पूरी हो सकती है। लेकिन एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति में केवल खानपान पर्याप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में सप्लीमेंट की जरूरत हो सकती है। सवाल- किन स्थितियों में आयरन सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ती है? जवाब- आयरन सप्लीमेंट की जरूरत तब पड़ती है, जब केवल खानपान से कमी पूरी न हो। डॉक्टर कुछ स्थितियों में ब्लड टेस्ट के आधार पर सप्लीमेंट लिख सकते हैं- सवाल- आयरन डेफिशिएंसी का पता कैसे चलता है? जवाब- आयरन की कमी का पता आमतौर पर इसके लक्षणों और ब्लड टेस्ट से चलता है। डॉक्टर आमतौर पर इन टेस्ट्स की सलाह देते हैं- सवाल- आयरन डेफिशिएंसी होने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है- ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बीन्स खाने से लंबी होती है उम्र: सॉल्यूबल फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, जानें किसे नहीं खाना चाहिए साल 2023 में ‘एडवांस इन न्यूट्रिशन’ जर्नल में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, रोज 50 ग्राम बीन्स खाने से समय से पहले मौत का जोखिम लगभग 6% तक कम हो जाता है। पूरी खबर पढ़िए…

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