'कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली और दिल दोनों से रखा दूर', असम के सिलचर में बोले PM मोदी
PM Modi Assam Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर के राज्य असम के दौरे पर हैं. शनिवार को उन्होंने सिलचर में शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया. यह उत्तर-पूर्वी भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर है. जिसे बनाने में करीब 22,860 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. ये कॉरिडोर 166 किलोमीटर लंबा होगा. जिससे मेघालय और असम के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इससे गुवाहाटी और सिलचर के बीच की दूरी कम होगी और यात्रा का समय 8.5 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे हो जाएगा.
सिलचर में पीएम मोदी की जनसभा
पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, "सिलचर को बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है, ये वो जगह है जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम से मिलकर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है. यहां बांग्ला बोली जाती है, असमिया की गूंज सुनाई देती है और अन्य जनजातीय परंपराएं भी फलती फूलती हैं. यहां इतनी विविधता को अपनी ताकत बनाकर आप सभी भाईचारे के साथ सद्भाव के साथ इस पूरे क्षेत्र का विकास कर रहे हैं."
पीएम मोदी ने कहा कि, 'ये बराक वैली का बहुत बड़ा सामर्थ्य है. पराग नदी के उपजाऊ मैदानों ने यहां के चाय बागानों ने यहां किसानों को, यहां के ट्रेड रूट्स को एजुकेशन सेंटर्स को हमेशा प्रोत्साहित किया है. ये क्षेत्र असम ही नहीं पूरे नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को भी कनेक्ट करता है. बराक घाटी के इसी महत्व को 21वीं सदी में और अधिक सशक्त करने के लिए मैं आपके बीच आया हूं.'
'कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली और दिल से दूर रखा'
पीएम मोदी ने आगे कहा कि, आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दोनों से ही दूर रखा. कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को एक प्रकार से भुला दिया. लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है. आज नॉर्थ ईस्ट भारत की एक्स ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है. दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है. लेकिन जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था. ठीक वैसे ही बराक वैली को भी बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है. जब देश आजाद हुआ तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी जिसे बराग घाटी का जैसे समंदर से संपर्क ही टूट गया.
क्या आपकी प्रकृति है वात? आयुर्वेद से जानिए संतुलन का सही तरीका
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। आयुर्वेद के अनुसार वात प्रकृति वाले लोग हल्के, दुबले-पतले और फुर्तीले होते हैं, लेकिन अस्थिर भी। उनका मन बहुत जल्दी इधर-उधर भटकता है, याददाश्त कमजोर हो सकती है और शरीर जल्दी ठंडा या थका हुआ महसूस कर सकता है। इसलिए वात को संतुलित रखना बेहद जरूरी है।
सबसे पहला कदम है सही खान-पान। वात प्रकृति वाले लोग ठंडी, भारी और सूखी चीजों से बचें। आलू, कच्ची सब्जियां, ठंडी सलाद या बहुत तैलीय और मसालेदार चीजें उनके लिए ठीक नहीं। इसके बजाय गर्म, हल्का भारी और पौष्टिक भोजन अपनाएं। चावल, गेहूं, मूंग और उड़द जैसी दालें बहुत फायदेमंद हैं। सब्जियों में गाजर, लौकी, कद्दू, शतावरी, टिंडा और भिंडी खाने से वात संतुलित रहता है। फल में केले, पपीता, तरबूज, अनार और बेल खाने से भी फायदा होता है। इसके साथ घी, मक्खन और दूध को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
खान-पान के अलावा दिनचर्या और आदतें भी महत्वपूर्ण हैं। वात प्रकृति वाले लोग जल्दी थक जाते हैं और मानसिक रूप से भी जल्दी व्याकुल हो जाते हैं। इसलिए दिन में छोटी नींद लेना फायदेमंद है। ज्यादा मेहनत वाले या थकान वाले व्यायाम से बचें। हल्की सैर, योग और धीमे व्यायाम अच्छे रहते हैं। आयुर्वेद में तेल से मालिश करने की भी सलाह दी गई है। यह शरीर को गर्म रखता है, ऊर्जा देता है और मांसपेशियों की थकान कम करता है।
मानसिक शांति भी बहुत जरूरी है। वात प्रकृति वाले लोग बहुत जल्दी बोलते हैं, जल्दी सोचते हैं और उनका मन इधर-उधर भटकता है। इसलिए तनाव, चिंता या अनावश्यक बातचीत से बचें। ध्यान, प्राणायाम और गहरी नींद अपनाना मदद करता है। सपनों में दौड़ना, उड़ना या गिरना भी वात प्रकृति का संकेत है, इसलिए मन को शांत रखना बहुत जरूरी है।
वात प्रकृति वाले लोग तेज, फुर्तीले और ऊर्जावान होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी दिनचर्या और खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। अगर आप इन चीजों को अपनाएंगे, तो न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहेगा, बल्कि मन भी शांत और स्थिर रहेगा।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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