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सेहत के लिए संजीवनी है शहद और लहसुन का मिश्रण, हृदय रोगों में लाभकारी

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। आयुर्वेद में प्रकृति से मिली जड़ी-बूटियों से सदियों से रोगों का इलाज किया जा रहा है। कुछ जड़ी-बूटियां हमारी किचन में ही मौजूद हैं, जिनके सेवन मात्र से शरीर को सेहत का वरदान मिल सकता है।

लहसुन और शहद दोनों ही ऐसी चीजें हैं, जो आसानी से हर घर में मिल जाती हैं, लेकिन इन दोनों चीजों का मिश्रण शरीर के लिए संजीवनी है। लहसुन और शहद हृदय रोग और मंद पड़े पाचन को दुरुस्त करने में सहायक हैं।

लहसुन का इस्तेमाल सब्जियों के अलावा रोगों में किया जाता है। आयुर्वेद में बड़े हुए कोलेस्ट्रोल से पीड़ित लोगों को ताजा लहसुन की कलियां खाने की सलाह दी जाती है। लहसुन में स्वास्थ्यवर्धक तत्व एलिसिन होता है, जो एक तरह का एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट है। इसके सेवन से रक्त का संचार शरीर में सही बना रहता है और रक्त गाढ़ा भी नहीं होता है। लहसुन में ऑक्सीजन, सल्फर और अन्य रसायन होते हैं, जो लहसुन को जीवाणुरोधी और रोग-रोधी गुण प्रदान करते हैं।

वहीं शहद प्राकृतिक से मिली वो मीठी वस्तु है, जिसका सेवन मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के स्वास्थ्य को भी कम प्रभावित करता है। शहद में फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स नाम के दो एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में खुजली, लालिमा, और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। शहद में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो कई बीमारियों में सहायक हैं।

अब बात करते हैं लहसुन और शहद के मिश्रण की। लहसुन और शहद को एक साथ मिलाकर रखने से इसके गुण दोगुने हो जाते हैं। इथियोपियाई चिकित्सा में लहसुन और शहद के मिश्रण को शरीर के लिए संजीवनी कहा गया है, जो श्वसन रोग, संक्रमण, त्वचा संबंधी रोग, हृदय रोग और पेट से जुड़े रोगों का काल है। यह मिश्रण सर्दी-जुकाम और खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है और रक्त को पतला कर स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। इसके साथ यह उच्च रक्तचाप, गठिया, दांत दर्द, कब्ज और संक्रमण में भी सहायक है।

इसके लिए कांच की साफ बरनी में ताजा लहसुन की कलियों को छीलकर डाल लें। बरनी में शुद्ध शहद को भरकर 5 से 7 दिन के लिए रख दें और फर्मेंट होने के बाद सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। बच्चे और गर्भवती महिलाएं चिकित्सा की सलाह के बाद ही सेवन का मिश्रण करें।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, सेहत का खजाना हैं मसाले; जानें असली और नकली की पहचान

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। स्वाद और सेहत का संबंध सिर्फ आहार से ही नहीं बल्कि शुद्ध आहार से भी जुड़ा है। अच्छी सेहत के लिए अच्छे आहार ही नहीं बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाली सही चीजों की पहचान पर भी निर्भर करती है, खासकर मसालों में।

आज के समय में प्राचीन पद्धति से पीसे गए मसालों की बजाय मिलावट से भरे मसाले बाजारों में जगह बना चुके हैं। बाज़ार में मिलने वाले मसालों में अक्सर खतरनाक मिलावट होती है, चाहे वो हल्दी में लेड क्रोमेट हो या मिर्च में ईंट का चूरा। ये सभी मसाले स्वास्थ्य के लिए जहर हैं और ऐसे में असली और नकली मसालों की पहचान रखना सभी के लिए जरूरी है।

पहले बात करते हैं धनिया पाउडर की। इसकी पहचान के लिए कांच के गिलास में पानी लें। पानी में धनिया पाउडर की दो चम्मच डालें और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। अगर पाउडर गिलास की तली में बैठ जाता है, तो धनिया पाउडर शुद्ध है, और अगर यह ऊपर तैरता है या पानी के साथ घुलने की कोशिश करता है, तो यह अशुद्ध है।

सेंधा नमक को शुद्धि का प्रतीक माना जाता है और हर घर में सेंधा नमक का इस्तेमाल सदियों से होता आया है, लेकिन आज के समय में इसमें मिलावट की संभावना रहती है। इसके लिए आलू को बीच से काट लें और उस पर सेंधा नमक रख दें। सेंधा नमक पर कुछ बूंदे नींबू की डालें और छोड़ दें। अगर सेंधा नमक असली है तो सेंधा नमक के रंग में कोई बदलाव नहीं होगा, वहीं इसके विपरीत अगर मिलावट है तो आलू काला या नीला पड़ने लगेगा।

अब जानते हैं लाल मिर्च के बारे में। इसके लिए कांच के गिलास में पानी लें। पानी में लाल मिर्च की दो चम्मच डालें। अगर मिर्च पानी के ऊपर ही तैर रही है तो मिर्च शुद्ध है और वहीं अगर वो पानी में डूब रही है और पानी को लाल कर रही है तो समझ लीजिए की यह अशुद्ध है। वहीं काली मिर्च के पाउडर में भी मिलावट की जाने लगी है। इसकी जांच के लिए भी पानी का सहारा ले। एक गिलास पानी में काली मिर्च का पाउडर लें। अगर डूब जाए तो अशुद्ध है और पानी के ऊपर तैरने लगे तो पूर्णता शुद्ध है।

हल्दी पाउडर के बिना सब्जी का स्वाद और रंग दोनों ही प्रभावित होते हैं। ऐसे में कांच के गिलास में पानी लेकर हल्दी पाउडर डालें। शुद्ध हल्दी बिना अपना गाढ़ा रंग दिखाए धीरे-धीरे बैठने लगती है, वहीं मिलावटी हल्दी पानी में जाते ही अपना रंग छोड़ देती है और पानी में घुल जाती है। मसालों का काम सिर्फ स्वाद बढ़ाना ही नहीं, बल्कि सेहत का ध्यान भी रखना है। इसलिए स्वास्थ्य से समझौता न करें।

--आईएएनएस

पीएस/पीएम

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