तुर्की में घुसी ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो ने मार गिराया, ईरान बोला- यह तीसरे पक्ष की साजिश
अंकारा/इस्तांबुल, 13 मार्च (आईएएनएस)। तुर्की रक्षा मंत्रालय ने ईरान की ओर से हमले का दावा किया। शुक्रवार को दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल तुर्की के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गई थी, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “तुर्की के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल को पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात नाटो की वायु और मिसाइल रक्षा इकाइयों की ओर से निष्क्रिय कर दिया गया है।”
मंत्रालय ने कहा कि देश की ओर आने वाले किसी भी खतरे के खिलाफ सभी जरूरी कदम बिना किसी हिचकिचाहट के उठाए जा रहे हैं। क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, तुर्की की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने बताया कि शुक्रवार सुबह दक्षिणी प्रांत अदाना में स्थित इंचिरलिक एयर बेस पर सायरन सुने गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में भी एक मिसाइल के आने और उसके बाद विस्फोट की आवाज सुनाई दे रही है।
मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में ईरान से तुर्की की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की यह तीसरी घटना है, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हुई है।
इधर, अंकारा में ईरान के राजदूत मोहम्मद हसन हबीबोल्लाहजादेह ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घटना हमारे लिए भी एक सवाल है। उन्होंने दावा किया कि यह किसी तीसरे तत्व की ओर से की गई हरकत है। वे दोनों देशों के दोस्ताना और भाईचारे के संबंधों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
मंगलवार को तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि नाटो की ओर से तुर्की के हवाई क्षेत्र की रक्षा में मदद के लिए दिया गया पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम पूर्वी प्रांत मालात्या में तैनात कर दिया गया है और इसे संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा था कि ईरान पर हुए हमलों से शुरू हुआ युद्ध रुकना चाहिए, इससे पहले कि यह फैलकर पूरे क्षेत्र को आग में झोंक दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कूटनीति अभी भी तनाव कम करने का रास्ता दे सकती है। उन्होंने कहा कि तुर्की कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2020 के बाद 4 गुना बढ़कर करीब 1,500 मेगावाट हुई: सरकार
नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि भारत का डेटा सेंटर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता 2020 में करीब 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक चार गुना बढ़कर लगभग 1,500 मेगावाट हो गई है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास को बढ़ावा देने के लिए एआई कंप्यूट क्षमता ढांचे के तहत 14 पंजीकृत सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के माध्यम से लगभग 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ये कंप्यूटिंग संसाधन स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य पात्र उपयोगकर्ताओं को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो वैश्विक औसत लागत का लगभग एक-तिहाई है।
देश के प्रमुख तकनीकी केंद्रों जैसे मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार डेटा सेंटर इकोसिस्टम की बढ़ती जरूरतों, जैसे बिजली और पानी की मांग, से पूरी तरह अवगत है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, डेटा सेंटर से बिजली की मांग 2031-32 तक बढ़कर लगभग 13.56 गीगावाट तक पहुंच सकती है, क्योंकि एआई और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग सेवाओं के साथ यह क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि देश की राष्ट्रीय ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि बढ़ती बिजली मांग को पूरा किया जा सके और सभी क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
हाल ही में लागू किया गया सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (एसएचएएनटीआई) एक्ट भी भविष्य में छोटे मॉड्यूलर और माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टरों के उपयोग को संभव बनाकर एआई और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
मंत्री ने बताया कि डेटा सेंटर में पानी की खपत इस्तेमाल की जाने वाली कूलिंग तकनीक पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर जैसे औद्योगिक उपयोगों के लिए भूजल के इस्तेमाल को जल शक्ति मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत नियंत्रित किया जाता है।
पानी की खपत कम करने के लिए उद्योग अब डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
इसके अलावा कंपनियां हाई-डेंसिटी रैक सिस्टम भी लगा रही हैं ताकि हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एआई वर्कलोड को बेहतर तरीके से संभाला जा सके और बिजली व पानी की खपत भी कम हो।
--आईएएनएस
डीबीपी
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