दिवाली पर घर बैठकर करना है एंजॉय, तो नेटफ्लिक्स पर देखें ये बेहतरीन फिल्में और सीरीज
Diwali Special Movies-Series: दिवाली का त्योहार हो और परिवार के साथ बैठकर फिल्में या वेब सीरीज देखने का मौका मिले, तो मजा दोगुना हो जाता है. अगर इस बार आप घर पर रहकर ही दिवाली की छुट्टियां एंजॉय करने का प्लान बना रहे हैं, तो नेटफ्लिक्स पर आपके लिए कई शानदार ऑप्शन मौजूद हैं. यहां आपको कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली एंटरटेनमेंट और त्योहार के रंग में रंगी फिल्में और सीरीज देखने को मिलेंगी. 'ढिंढोरा' से लेकर 'दिलवाली दिवाली' तक, इस लिस्ट में ऐसे कई नाम शामिल हैं, जिन्हें आप घर बैठे देख सकते हैं.
1. 'ढिंढोरा' (Dhindora)
फेमस यूट्यूबर और एक्टर भुवन बाम की ये कॉमेडी सीरीज दिवाली की छुट्टियों के लिए अच्छा ऑप्शन है. इसमें भुवन ने टीटू मामा, बबलू जी और जानकी जैसे कई मजेदार किरदार निभाए हैं. सीरीज की कहानी और कॉमेडी आपको हंसने पर मजबूर कर देगी.
2. 'मीठे में क्या है' (Meethe Mai Kya Hai)
नेटफ्लिक्स पर मौजूद फिल्म 'मीठे में क्या है' एक फैमिली ड्रामा है. जो दिवाली पर परिवार के साथ देखने के लिए अच्छी ऑप्शन है. इसमें रिश्तों, परिवार और जिंदगी के उतार-चढ़ाव को दिखाया गया है. फिल्म में ऋत्विक भौमिक, रोहिणी हट्टंगड़ी और आयशा रजा जैसे कलाकार अहम रोल में हैं.
3. 'चुंबक' (Chumbak)
अगर आपको हल्की-फुल्की कॉमेडी और फैमिली ड्रामा पसंद है, तो 'चुंबक' देख सकते हैं. इसमें सुमित राघवन, अर्जुन बिजलानी और नीना गुप्ता जैसे कलाकार नजर आते हैं. इसकी कहानी में रिश्तों और जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प पहलू देखने को मिलते हैं.
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4. 'दिलवाली दिवाली' (Dilwale Diwali)
दिवाली के मौके पर त्योहार से जुड़ी फिल्म देखने का मन है, तो 'दिलवाली दिवाली' देख सकते हैं. ये एक फैमिली ड्रामा है, जिसमें रिश्तों और परिवार की अहमियत को दिखाया गया है. फिल्म में मनोज पाहवा, नीलू कोहली, मिहिर आहूजा और औरा भटनागर नजर आते हैं.
5. 'विश्वनाथ एंड सन्स' (Vishwanath & Sons)
अगर आपको साउथ फिल्में देखना पसंद है तो सूर्या की 'विश्वनाथ एंड सन्स' को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं. फिल्म में सूर्या के साथ ममिथा बैजू, राधिका सरथकुमार और रवीना टंडन भी नजर आ रहे हैं. इसकी कहानी में इमोशन और फैमिली ड्रामा का अच्छा मेल देखने को मिलता है.
6. 'कुरुक्षेत्र' (Kurukshetra: The Great War of Mahabharata)
अगर आपको पौराणिक कहानियां पसंद हैं, तो 'कुरुक्षेत्र: द ग्रेट वॉर ऑफ महाभारत' देख सकते हैं. ये नेटफ्लिक्स पर साल 2025 में रिलीज हुई एक एनिमेटेड वेब सीरीज है. इसमें महाभारत की कहानी को अलग-अलग योद्धाओं के नजरिए से दिखाया गया है. सीरीज में कुरुक्षेत्र के युद्ध, पांडवों और कौरवों के बीच संघर्ष और कई अहम किरदारों की कहानियां देखने को मिलती हैं.
7. 'बत्था' (Baththa)
तमिल स्टार विजय सेतुपति की फिल्म 'बत्था' का लुत्फ भी आप इस मौके पर उठा सकते हैं. बालाजी थारनीथारन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विजय सेतुपति एक दिलचस्प किरदार में नजर आते हैं. फिल्म की कहानी में कॉमेडी और इमोशन का अच्छा मेल देखने को मिलता है. अगर आप दिवाली की छुट्टियों में कुछ अलग और मनोरंजक देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है.
West Bengal: 393 निजी B.Ed Colleges को दाखिले की अनुमति, 205 संस्थानों पर रोक
कोलकाता, छह नवंबर पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के 393 निजी बीएड कॉलेजों को 2026-28 शैक्षणिक सत्र के लिए विद्यार्थियों के दाखिले की खातिर अनुमति दी गई है जबकि 205 अन्य कॉलेजों को बुनियादी ढांचे में सुधार तक दाखिला प्रक्रिया से रोक दिया गया। चट्टोपाध्याय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्यभर के बीएड, आईटीआई, फार्मेसी और पॉलिटेक्निक संस्थानों का निरीक्षण किया था, जिसका उद्देश्य इन संस्थानों के बुनियादी ढांचे एवं शैक्षणिक मानकों का आकलन करना था। उन्होंने कहा, “दाखिले के लिए मंजूरी पाने वाले 393 बीएड कॉलेजों में से 156 को पहले चरण में और 237 को दूसरे चरण में मंजूरी दी गई।” चट्टोपाध्याय ने इस प्रक्रिया के बारे में कहा कि राज्य सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बीएड, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और फार्मेसी संस्थानों का निरीक्षण कराया था।
उन्होंने कहा कि 205 बीएड कॉलेजों को अगले शैक्षणिक सत्र में दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने से रोक दिया गया है क्योंकि इन कॉलेजों को पहले अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल की शैक्षणिक विरासत को फिर से स्थापित करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार शैक्षणिक मानकों में सुधार और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों की शिक्षा से समझौता करके पश्चिम बंगाल का भविष्य नहीं बना सकते।” मंत्री ने कहा कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थानों से मिलने वाली डिग्रियां ज्ञान, योग्यता और अवसरों के प्रतीक हों, न कि वे ‘बिक्री के लिए उपलब्ध कागज का एक टुकड़ा’ बनकर रह जाएं।
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